'टुन टुन' का गाना सुन उनसे शादी करने भारत आ गया था एक पाकिस्तानी
| Rainbow News - Aug 8 2017 3:56PM

60 के दशक की सिंगर और एक्ट्रेस टुन टुन के नाम से हर कोई वाकिफ है। टुन टुन उस दशक की पहली फीमेल कॉमेडियन थीं जिनके पर्दे पर आते ही हॉल में ठहाके गूंजने लगते थे। टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। लेकिन मोटे होने की वजह से उन्हें लोग टुन टुन बुलाने लगे। तबसे उनका नाम टुन टुन पड़ गया। टुन टुन का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे। टुन टुन से 9 साल बड़ा उनका एक भाई हरि था। वहीं उनका ख्याल रखता था। लेकनि कुछ समय बाद हरि का भी निधन हो गया। अब टुन टुन के लिए खाने के भी लाले पड़ गए थे।

वो रिश्तेदारों के घर में नौकारानी का काम करने लगीं। थोड़े बड़े होने पर टुन टुन को पता चला कि उनकी जमीन हड़पने के लिए उनके माता-पिता और भाई का कत्ल करवा दिया गया था। टुन टुन को बचपन से ही गाने का शौक था और वो मुंबई आकर सिंगर बनना चाहती थीं। टुन टुन ने ठान लिया था कि जब भी उन्हें गाने का मौका मिलेगा तो वो नौशाद के लिए गाएंगी। एक दिन चुपचाप वो रिश्तेदारों से भागकर मुंबई आ गईं। दिल्ली में किसी ने उन्हें निर्देशक नितिन बोस के असिस्टेंट जव्वाद हुसैन का पता दिया था। वो मुंबई आकर उनसे मिलीं और उन्होंने ही टुन टुन को पनाह दी।

ये बात 1947 की है तब देश का बंटवारा हो रहा था। उन दिनों कारदार फिल्म 'दर्द' बना रहे थे। तभी टुन टुन एक दिन बेरोकटोक उनके घर में जा घुसीं और उन्हीं से पूछ बैठीं कि कारदार कहां मिलेंगे, 'मुझे गाना गाना है।' दरअसल, टुन टुन फिल्मी तौर तरीकों से वाकिफ नहीं थी। टुन टुन का ये अंदाज कारदार को बहुत पसंद आया। कारदार ने तुरंत नौशाद साहब के असिस्टेंट को बुलाया और टुन टुन का टेस्ट लेने को कहा। तब टुन टुन ने उन्हें फिल्म 'जीनत' का गाना 'आंधियां गम की यूं चली' गाया। टुन टुन का गाना उन्हें इतना पसंद आया कि 500 रुपए महीने की नौकरी पर उन्हें रख लिया।

टुन टुन का पहला गीत फिल्म 'दर्द' में 'अफसाना लिख रही हूं' था। ये गाना ‌सुपरहिट हुआ और टुन टुन की किस्मत चमक गई। टुन टुन का ये गाना एक पाकिस्तानी अख्तर अब्बास काजी को इतना पसंद आया कि वो अपना मुल्क छोड़कर भारत आ गए और टुन टुन से शादी कर ली। अख्तर टुन टुन के पुराने जानने वाले थे। इसके बाद तो टुन टुन ने लगातार करीब 45 गाने गाए। लेकिन प्रेग्नेंट होने और कुछ घरेलू जिम्मेदारियों के चलते उन्हें फिल्मों से ब्रेक लेना पड़ा। टुन टुन के पति अख्तर नौकरी करते थे लेकिन परिवार बढ़ने के साथ सैलरी कम पड़ने लगी। इसलिए टुन टुन ने फिर काम करने की सोची। बच्चे होने के बाद टुन टुन का वजन लगातार बढ़ता जा रहा था।

तभी नौशाद फिल्म 'बाबुल' बना रहे थे। उन्होंने टुन टुन से एक हास्य किरदार करने को कहा जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसी फिल्म में नौशाद साहब ने उमा देवी को टुन टुन नाम दिया था। जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। टुन टुन का किरदार लोगों को बेहद पसंद आया और देखते ही देखते वो एक कॉमेडी एक्ट्रेस बन गईं। अपने पांच दशक के करियर में टुनटुन ने करीब 200 फिल्मों में काम किया। 90 का दशक में पति की मौत के बाद उन्होंने फिल्मों से खुद को अलग कर लिया। 24 नवंबर, 2003 को टुनटुन इस दुनिया को अलविदा कह गईं, लेकिन आज भी वे लोगों के दिलों में जिंदा हैं।



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