अम्बेडकरनगर : बगैर टैक्सी परमिट के सवारियाँ ढो रहे हैं सैकड़ो लग्जरी वाहन, परिवहन विभाग को लगा रहे हैं लाखों का चूना
| By- Reeta Vishwakarma - Aug 9 2017 3:13PM

सवारियाँ ढोने के अलावा सरकारी विभागों में ऐसे वाहन किए गए है अनुबंधित

अम्बेडकरनगर। जिले में बगैर टैक्सी परमिट के सैकड़ों निजी लग्जरी वाहनों का प्रयोग सवारी ढोने में किया जा रहा है जिससे परिवहन विभाग को टैक्स के रूप में लाखों रूपए की चपत लग रही है। इन वाहनों से यात्री लखनऊ, दिल्ली, बनारस, गोरख, बस्ती, आजमगढ़, इलाहाबाद, विन्ध्याचल, जौनपुर, मिर्जापुर, मैहर देवी जैसे बड़े शहरों व धार्मिक स्थानों की यात्रा करते हैं। इनसे वाहन स्वामी अच्छा-खासा भाड़ा वसूल करते हैं। यही नहीं चालाक वाहन स्वामी अपनी सवारियों से यह भी कह देते हैं कि यदि कहीं चेकिंग हो तो बताना कि सब घर के ही लोग हैं।

सड़कों पर फर्राटा भरते इन निजी उपयोगार्थ चार पहिया लग्जरी वाहनों के बारे में बताया जाता है कि टैक्स की चोरी करके इनके स्वामी इनका इस्तेमाल सवारियाँ (बुकिंग) ढोने के लिए कर रहे हैं। इस बावत परिवहन विभाग भी स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दे पा रहा है कि जिले में कितने वाहनों को टैक्सी परमिट दी गई है। मजेदार बात यह कि कई दर्जन लग्जरी वाहन विकास, पंचायत, स्वास्थ्य समेत अनेकों सरकारी गैर सरकारी विभागों में अनुबंधित किए गए हैं, जिनके पास टैक्सी परिमिट नहीं है बावजूद इसके हजारों रूपये प्रतिमाह ‘भाड़ा’ कमा रहे हैं और परिवहन विभाग को लाखों का चूना लगा रहे हैं।

बताया जाता है कि कई प्रतिष्ठित औद्योगिक कम्पनियों, निर्माणदायी संस्थाओं, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, विकास विभाग, पंचायत आदि दर्जनों विभागीय कार्यालयों में इसी तरह के लग्जरी वाहन बगैर टैक्सी परमिट के अनुबंधित किए गए हैं। निजी वाहन स्वामियों द्वारा विभागों के पुराने व घाघ किस्म के भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों (बाबुओं) से साठ-गाँठ करके सुविधा-शुल्क और कमीशन की अच्छी खासी रकम के एवज में यह कार्य धन्धे के रूप में किया जा रहा है। इस कार्य में लगे दर्जनों निजी लग्जरी वाहन परिवहन विभाग से टैक्सी परमिट लिए बगैर सरकारी/विभागीय कार्यालयों से सम्बद्ध होकर हजारों रूपए महीने लेकर अहलकारों को ढो रहे हैं।

इस सम्बन्ध में बात करने पर कुछेक विभागों के सम्बन्धित बाबुओं ने बताया कि यह कार्य आज से नहीं वर्षो से हो रहा है। कुछ भी हो यदि सरकारी विभाग अनुबंधित निजी वाहनों के पंजीयन कागजात के साथ-साथ टैक्सी परमिट की माँग नहीं करता है तो यह परिवहन विभाग को प्रतिमाह लाखों रूपए का चूना लगाने का कार्य हुआ साथ ही इसे नियम विरूद्ध कार्य भी कहा जाएगा। क्या परिवहन विभाग बगैर परमिट के इन प्राइवेट वाहनों को ठेका गाड़ी के रूप में संचालित होने देता रहेगा या फिर इस पर नियंत्रण भी लगाने व राजस्व वसूली में इजाफा करने के लिए चेकिंग करके इन अनधिकृत वाहनों को टैक्सी परमिट लेने के लिए बाध्य करेगा, अन्यथा की स्थिति में वाहन स्वामी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, समन शुल्क व अनधिकृत ठेका वाहन के रूप से संचालित प्राइवेट लग्जरी वाहनों की धरपकड़ करेगा।

सूबे की सरकार का ध्यानाकृष्ट कराते हुए कई समाजसेवी और आर.टी.आई एक्टिविस्टों ने कहा है कि परिवहन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी ‘टैक्सी परमिट’ धारक वाहनों का ही संचालन भाड़ा (ठेका) कमाई में होने दें और जिन विभागों में ऐसे वाहन अनधिकृत रूप से बगैर टैक्सी परमिट के अनुबंधित किए गए हैं सम्बन्धित से जवाब तलब कर उसके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की सुनिश्चित करें।

इस सम्बन्ध में ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह ने बताया कि बगैर टैक्सी परमिट के कोई सरकारी विभाग अपने यहाँ निजी वाहनों को अनुबंधित ही नहीं कर सकता है। यदि करता है तो यह अवैध है।



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