आईजी एसटीएफ का मामला: यह कहानी तो फिल्मी है
| Rainbow News - Sep 23 2017 12:04PM

-के.पी. सिंह/ पंजाब के पटियाला जिले की नाभा जेल पर धावा बोलकर खूंखार अपराधियों को फरार कराने के गत् वर्ष हुए कांड के मास्टर माइंड गुरुप्रीत सिंह उर्फ गोपी घनश्यामपुरा को क्या सचमुच यूपी एसटीएफ ने पकड़ने के बाद एक करोड़ रुपये जेब में डालकर छोड़ दिया था। दंग करने वाले इस इल्जाम के चलते अपनी पुलिस की घनघोर बदनामी से यूपी सरकार एक बार हिल गई। तथापि उसने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भले ही कर दिये हों लेकिन वह आईजी अमिताभ यश के बारे में इतने संगीन आरोप को बिल्कुल भी हजम नही कर पा रही है। इस अपराध में देशद्रोह का भी पहलू जुड़ा है क्योंकि गोपी घनश्यामपुरा देश के खिलाफ बुने जा रहे षड़यंत्र का भी एक अहम किरदार है और कैसे भी लालच या दबाव में अमिताभ यश किसी देशद्रोही की मदद कर दें यह बात उन्हें जानने वालों को बिल्कुल भी गंवारा नही हो सकती।

इसीलिए जब डीजीपी सुलखान सिंह प्रेस ब्रीफिंग में बता रहे थे कि उन्होंने मामले की जांच एडीजी लाॅ एंड आर्डर आनंद कुमार सिंह को सौंप दी है तो उन्हें उस पुलिस अधिकारी का नाम लेने में बहुत आपत्ति थी। जिसके खिलाफ यह जांच लक्षित है। उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में यह भी साफ कर दिया कि आरोपित अधिकारी को तत्काल उसके पद से सिफ्ट करने का सवाल ही नही है। जाहिर है कि सीएम योगी आदित्य नाथ और पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह कहीं न कहीं इस सनसनीखेज मामले की नजाकत को पकड़े हुए हैं। जिससे वे अमिताभ यश के मनोबल की पूरी परवाह जांच शुरू कराने के बावजूद करना नही भूले।

उधर अमिताभ यश ने पूरे मामले की जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी से भेंट की। इसके बाद उनके खिलाफ जांच कर रहे एडीजी लाॅ एंड आर्डर आनंद कुमार सिंह जो कि अवकाश पर थे ड्यूटी पर लौटते ही उनसे भी मुलाकात की। एडीजी लाॅ एंड आर्डर इसके बाद जांच के लिए पंजाब रवाना हो गये हैं लेकिन उनके मन में भी अमिताभ यश के लिए साॅफ्ट कार्नर है यह छुपा नही रह सका। इसलिए पंजाब रवानगी से पहले उन्होनें पत्रकारों को बताया कि इस मामले में चर्चित आॅडियों रिकार्डिंग में अमिताभ यश का नाम तो आया है लेकिन पैसे का जिक्र बिल्कुल नही है। चूंकि पूरी बातचीत गुरुमुखी में है इसलिए अमिताभ यश का नाम किस संदर्भ में लिया गया यह भी स्पष्ट नही हो पाया है।

डीजीपी सुलखान सिंह हो सकता है कि फील्ड के तजुर्बे में कुछ कच्चे हों लेकिन तीन महीने के उनके डीजीपी के रूप में कार्यकाल में भी उन पर कोई ऐसा छींटा नही आया जिससे उनकी विभाग में मिस्टर क्लीन की छवि में एक भी दाग दिखाई देता। जिस अधिकारी ने अपनी पूरी नौकरी बेमिसाल ईमानदारी से गुजारी हो वह आखिरी वक्त में क्या खाक मुसलमा होगा, यानी किसी भ्रष्ट अधिकारी के बचाव के लिए अपनी साख दांव पर क्यों लगायेगा। इसलिए डीजीपी सुलखान सिंह अगर इस मामले में अमिताभ यश की इतनी चिंता कर रहे हैं तो साफ है कि अमिताभ यश के मामले में कुछ न कुछ जटिल गुत्थी जरूर है।

दूसरी ओर खुद अमिताभ यश का कैरियर भी कम सुनहरा नही है। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर के महारथी आईपीएस अधिकारियों में टाॅप सूची पर गिना जाता है। एक समय जब पंचनद क्षेत्र में डकैतों का दुर्दमनीय आतंक छाया हुआ था उन्ही की कटिबद्धता और कारगर प्लान से निर्भय गूजर जैसे सरगनाओं और अन्य सारे गिरोहों का सफाया हो सका था। एसटीएफ में उनकी पहली पोस्टिंग नही है। अपराजेय घोषित किये जा चुके पाठा के जंगल के डाकू सरगना ददुआ और उसके बाद ठोकिया को एसटीएफ में आकर उन्होंने ही धराशायी किया था जिससे कानून के हाथ लंबे होते हैं, की मुहावरे की इज्जत सलामत रह सकी थी।

एसटीएफ में रहते हुए उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क को भी ध्वस्त किया और इस सिलसिले में कई खूंखार संगठनों के आतंकवादियों को मौत के मुंह में पहुंचा दिया। मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में अमिताभ यश द्वारा किये गये ऐसे एनकाउंटर सुर्खियों में छा गये थे जिसकी वजह से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की हिट लिस्ट तक में उनका नाम शामिल था। यह बताने की जरूरत नही कि सीएम योगी आदित्य नाथ ने जब शपथ लेने के कुछ दिन बाद उन्हें बतौर आईजी के नये सिरे से एसटीएफ में पोस्टिंग की तो आईएसआई जैसी भारत विरोधी शक्तियों को कितनी परेशानी हुई होगी। सीएम योगी आदित्य नाथ और डीजीपी सुलखान सिंह इसीलिए अमिताभ यश के खिलाफ आये मामले को किसी खतरनाक साजिश से जुड़ा देख रहे हैं। प्रमुख सचिव गृह ने कह भी दिया है कि इस पूरे मामले में एसटीएफ को डिरेल करने की साजिश हो सकती है जिसे सफल नही होने दिया जायेगा।

अमिताभ यश की कार्यप्रणाली सैन्य किस्म की है जबकि सिविल मोर्चे पर सेना की तर्ज पर किसी मिशन को अंजाम देना पुलिस के लिए खतरे की घंटी बजा सकता है। अमिताभ यश इस मामले में कानून से बंधे न रहने के लिए विवादित हैं। वे जोश में मानवाधिकार की सीमाओं को भी भूल जाया करते हैं। कहीं ऐसा तो नही है कि बब्बर खालसा से जुड़े गुरुप्रीत सिंह की तथाकथित धरपकड़ और उसे बिना गिरफ्तारी के छोड़ जाने के पूरे प्रकरण के तार अमिताभ यश के किसी रोमांचक आतंकवाद विरोधी मिशन से जुड़े हुए हों।

खालिस्तानी संगठनों के नेटवर्क में सीआईए की गहरी पैठ है। कश्मीर में आतंकवादी उपद्रव को नये सिरे से हवा देने के बाद आईएसआई द्वारा खालिस्तानी नेटवर्क के जरिये पंजाब में भी भारत के खिलाफ मोर्चा खोले जाने की खबरे आईं थी। आईबी सहित कई भारतीय एजेंसियां इसके चलते चैकन्ना हो गई थीं। माना जाता है कि नाभा जेल ब्रेक में भी आईएसआई का हाथ जरूर था। क्या यूपी एसटीएफ ने गोपी घनश्यामपुरा को अपना मोहरा बनाकर आईएसआई की चाल को उलट देने की व्यूह रचना की है और क्या ऐसी ही किसी जानकारी की वजह से सीएम और डीजीपी अमिताभ यश के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं। गोपी घनश्यामपुरा का मामला पूरी तरह गोपनीय रहता लेकिन उसी के एक साथी ने इसे अपनी एफबी पर पोस्ट करके उजागर किया।

कहा यह जा रहा है कि उसने ऐसा इसलिए किया कि यूपी एसटीएफ कहीं गोपी का एनकाउंटर न कर दे। लेकिन यह भी तो हो सकता है कि यह एसटीएफ की व्यूह रचना को विफल करने का एक पैंतरा हो। लखीमपुर के एक शराब व्यापारी रिपल का नाम आ रहा है कि उसने एसटीएफ के अधिकारी के लिए गोपी को छोड़ने के एवज में रुपये की व्यवस्था की थी लेकिन रिपल फिलहाल नदारत है। उसके पकड़े जाने के बाद वस्तुःस्थिति बहुत कुछ स्पष्ट होगी। जांच की वजह बनी आॅडियो रिकार्डिंग में रिपल और इस प्रकरण के बाद शाहजहांपुर से पकड़े गये गोपी के साथी अमनदीप के बीच बातचीत दर्ज है। इसी में अमिताभ यश के नाम का जिक्र आया।

दूसरी गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रकरण के बाद आईबी को अचानक खालिस्तानी आतंकवादियों के बारे में तेजी से इनपुट मिलना शुरू हुए हैं जिनके जरिये यूपी एटीएस ने पंजाब पुलिस के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं। यह भी उजागर हुआ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीति के अंदर भी खालिस्तानी अलगाववादियों ने अपने पैर जमाने शुरू कर दिये हैं जिसमें एक बड़ी गिरफ्तारी सुल्तानपुर के कांग्रेसी नेता संदीप तिवारी उर्फ पिंटू की हुई है जो कि सोनिया, राहुल और प्रियंका का विश्वास पात्र माना जाता है। बहरहाल अब इंतजार इस बात का है कि पूरे मामले में यूपी के एडीजी लाॅ एंड आर्डर पंजाब से क्या खगांल कर लाते हैं और अमिताभ यश जैसे अफसर पर उठीं उंगलियों की परिणति क्या होती है।



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