भक्त वत्सल रूप है मां विंध्यवासिनी का
| Santosh Dev Giri - Sep 28 2017 2:50PM

माता विन्ध्येश्वरी रूप भी माता का एक भक्त वत्सल रूप है और कहा जाता है कि यदि कोई भी भक्त थोड़ी सी भी श्रद्धा से मां कि आराधना करता है तो मां उसे भुक्ति दृ मुक्ति सहज ही प्रदान कर देती हैं। विंध्याचल पर्वत श्रंखला में इनका निवास है।

दृ-माता की नित्य उपस्थिति ने विंध्य पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ कि श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है और विश्व समुदाय में एक अतुलनीय मान सम्मान का भागी बनाया है। थोडा सा यदि विचार करें तो मां कि एक दया भरी नजर यदि पाषाण समूह को इस श्रेणी पर खड़ा कर सकती है तो मानव मात्र यदि पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी उपासना करे तो उसको मां क्या नहीं प्रदान कर देंगी।

प्रयाग एवं काशी के मध्य मीरजापुर नामक शहर के अंतर्गत विंध्याचल नामक तीर्थ स्थल है। जहां मां विंध्यवासिनी निवास करती हैं। गंगा जी के तट पर स्थित यह महातीर्थ शास्त्रों के द्वारा सभी शक्तिपीठों में प्रधान घोषित किया गया है। यह महातीर्थ भारत के उन 51 शक्तिपीठों में प्रथम और अंतिम शक्तिपीठ है जो गंगातट पर स्थित है।

-सन्तोष देव गिरि मीरजापुर (उ.प्र.)



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