मां की चौक सजाने की होड़
| Rainbow News - Sep 28 2017 3:37PM

घर घर मे, मां की चौक, सजाने की होड़ है।
दे हाथ ओट, दीप जलाने की, होड़ है ।

है लालसा किसी की, कि, आए अपार बल,
पूरी हो मन की कामना ,जाए न एक पल,
चाहे कोई कि ,जीवन ,आराम से कटे,
करनी पडे न मेहनत ,पाऊं जियादा फल,
मूरत जमा के ,चौक पुजाने की, होड़ है ।
घर घर मे ----------

औलाद चाहे कोई, धन धान्य सुख कोई ,
हो ओहदे दार अफसर ,फड़ का प्रमुख कोई ,
छपकी लगाके, गेरू की ,अपने मकान मे,
माता की करे भक्ती, हरने को दुख कोई ,
हर इक जतन से, मां को ,रिझाने की होड़ है ।
घर घर मे -----------

उठ भोर, जा नदी मे ,मल मल के सारा तन,
ब्रत रखे, और जाके मंदिर, बजाए घन,
फिर माल ,पुआ ,पूड़ी ,औ खीर दूध की
धो पैर, पूज भोजे, कन्याएं बरहमन,
मंगल के गीत, गाने गवाने की, होड़ है।
घर घर मे ---------

फल,फूल,अक्षत, चंदन ,के थाल सजाकर ,
गेंदा, गुलाब ,मोतिन की ,माल बनाकर,
झरबेरी ,हरसिंगार ,धरे गन्ना, सेंगरी,
पूजा की, अर्चना की ,मांग ढाल बनाकर
'राकेश'मन मुराद ,पुराने की होड़ है ।
घर घर मे -----------

आप सभी को नवरात्रि की बहुत बहुत बधाई।



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