आदमी जलता यहाँ
| Rainbow News - Oct 4 2017 3:12PM

बेवजह तू, जेब मे, माचिस लिए चलता यहाँ।
देखकर ही, आदमी को, आदमी जलता यहाँ।

जान हो मुमकिन अगर, मंगल मे होगा क्या भला,
जब दिलों मे ही, अमंगल फूलता फलता यहाँ।

हर गली, हर मोड़ पर, रहता है जो किरदार मे,
गिरगिटों के, रंग का, सूरज नही ढलता यहाँ।

वक्त है, तो वक्त पर, पहचान नादां वक्त को,
वक्त बीते, हर कोई बस, हाथ ही मलता यहाँ।

शौक तो होते हैं पूरे, दौलत-ए-मां-बाप से,
खुद कमा तो, बस जरूरत के लिए, खटता यहाँ।

देख भारी जेब, दुनियां हर कदम पर, साथ हो,
जेब खाली ले के, तन्हा बाट ही, तकता यहाँ।

अब नही मुमकिन है, तेरी चाकरी बे-दिल जहां,
बन के खासमखास जो, 'राकेश' को, छलता यहाँ।



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