पुलिस द्वारा प्रताड़ित पत्रकार के समर्थन में पत्रकारों का धरना-प्रदर्शन
| Rainbow News - Oct 5 2017 2:18PM

अम्बेडकरनगर। इब्राहिमपुर थाना अंतर्गत ग्राम अवसानपुर निवासी अरविंद यादव को एल.एन.टी. कर्मियों के ऊपर हुए हमले सहित कई मुक़दमों में पुलिस ने फ़र्ज़ी तरीके से रंज़िशन फ़साया है। अरविंद का पत्रकारिता से अलग कोई फालतू विषय का लेना देना नहीं है संबंधित प्रकरण की जॉच किसी गैर एजेंसी या गैर जनपदीय टीम से करा ली जाय।

इस आशय के तहत पीडित पत्रकार जो कि अब तथाकथित पत्रकार के नाम से मशहूर हो रहा है के बचाव/ न्याय की इच्छा से राज्य स्तरीय पत्रकारों का दल पटेल नगर चौराहे पर बुधवार 4 अक्टूबर 2017 को शान्तिप्रिय ढंग से धरना प्रदर्शन किया, और गॉधीगीरी की तर्ज़ पर पुलिस कप्तान से मुलाका़त की।

अरविंद यादव जनपद के एक सम्मानित अख़बार में रिपोर्टिंग किया करता था कसौटी के क्षण में जिला संबाददाता उसे अपना प्रतिनिधि अब मॉनने को तैयार नहीं है, माना कि ए विषय गूढ़ चिन्तन से जुड़ा है कि जब लोग अपनों को पहचानने से ग़ुरेज़ करते हैं। पत्रकार न सही मुल्क़ के एक नागरिक के हैसियत से पहली नज़र में या साफ़गोई के बाबत न्याय हित में गैर जनपदीय जॉच दल से जॉच करानें में प्रशासन को हर्ज़ क्या है...?

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अरविन्द यादव मामले में तटस्थ एजेन्सी से जाँच कराई जाए : डॉ. मेला

अम्बेडकरनगर। इब्राहिमपुर थाना अंतर्गत अवसानपुर निवासी या विवादित पत्रकार अरविंद यादव जिसे आज पुलिस अपराधी मान रही है। जिसके बाबत राज्य स्तरीय पत्रकारों समेत तमाम सामाजिक संगठनों ने पटेल नगर तिराहे पर धरना प्रदर्शन कर किसी दूसरे ज़िले की पुलिस या ज़ॉच एजेंसी से यादव के मॉमले में जॉच कराने की मॉग की।

सवाल उठता है कि जिले लगभग आला ख़बरदारों ने इस ख़बर की अनदेखी किया!तवज़्ज़ो नही दी। क्या अरविंद यादव दाउद, गवली, छोटा राजन, वीरप्पन, सुल्ताना, आदि के स्तर का अपराधी होता तो ख़बर बनती? या चहेता पत्रकार होता तो ख़बर लिखा जाता। अरविंद अपराधी है कि रिपोर्टर? जॉच का विषय है। अपराधियों का प्रवेश मीडिया में कराने वाले क्यों कानून की ज़द में नही आते? अरविंद यादव का मीडिया गुरू कौन है?

उस मीडिया मेंकर को हमारी पुलिस क्यों नहीं तलाशती?जो उसका पनाहदाता है। किसने बनाया उसे कल तक पत्रकार? अपराधियों को पत्रकार बनानें वाले दोषी जन पर क्यों नही लेती पुलिस एक्शन? मीडिया जगत की बदनॉमी का कारण कौन है? किसी कलमकार द्वारा ऑखों देखी खबर लिखना कोई ज़ुर्म नही है, छुपाना ग़लत है।

दूसरे जनपद से जॉच की ज़रूरत है कि मॉग धरने पर बैठे तमॉम राज्यों की मीडिया और सामाजिक संगठनों ने किया है ,तो इस पर एतराज़ किसे और क्यों होगा? मैने किसी को आज़ तक गुनाह कारित व्यक्ति को पत्रकार नहीं बनाया, फिर भी न्याय के रक्षार्थ ए सच है कि... "अरविंद भी अपने भारत देश का नागरिक पहले है...पत्रकार व किसी का चेला बाद में।"

वह अपनी बात मीडिया के द्वारा कह सकता है और कहा है। अदालत भी मुल्जिम को अपनी सफ़ाई पेश करने का भरपूर मौका देती है, तो अरविंद की गैर जनपदीय दल से जॉच की मॉग क्यों गलत होगी? सियासत के दौर में कौन सही कौन ग़लत कहना बड़ा मुश्किल है...। अपराधी के साथ कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए बशर्ते वह अपराधी हो....और बिना सघन जॉच व साक्ष्य के इल्ज़ाम तो आते रहते है।



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