अम्बेडकरनगर: जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी.पी. वर्मा की घटती लोकप्रियता का कारण, आप भी जानें.......
| By- Reeta Vishwakarma - Oct 6 2017 4:23PM

अम्बेडकरनगर जिले के महात्मा ज्योतिबा फुले संयुक्त जिला चिकित्सालय के जन्मोपरान्त फिजीशियन पद पर तैनात चिकित्सक डॉ. डी.पी. वर्मा वर्तमान में वरिष्ठ फिजीशियन के रूप में चर्चित हो चुके हैं और स्वजातीयों की जुबान पर रहते हैं। रेनबोन्यूज इस एपीसोड में डॉ. वर्मा के बारे में प्रकाशित कर रहा है, जिसे चर्चाओं के आधार पर ही नहीं उसने स्वयं भी महसूस किया है। डॉ. डी.पी. वर्मा ने इस जिले में स्वजातीय प्रभावशाली एवं धनिकों के बीच रहकर दस साल के बीच में निजी प्रैक्टिस कर पैसा कमाने का जो कीर्तिमान बनाया है उसे इनके अलावा अन्य किसी जाति का चिकित्सक (अपवादों को छोड़कर) बना ही नहीं सकता। हालांकि इनके अलावा अन्य कई सरकारी चिकित्सक सर्जरी व मेडिसिन डिग्री धारक हैं जो जिले में रहकर अकूत पैसा कमा चुके हैं और यह क्रम अभी भी जारी है उनके बारे में मीडिया कभी कभार अवश्य ही कुछ न कुछ लिखकर यह साबित करती है कि चिकित्सकों की प्राइवेट कमाई अपने चरम पर है।

इस तरह की खबरें प्रकाशित व प्रसारित होने का कोई असर घाघ व कथित लुटेरे किस्म के चिकित्सकों पर नहीं पड़ता है, क्योंकि ये चिकित्सक कहीं न कहीं अपने धन-बल के चलते माननीयों, प्रभावशालियों व बाहुबलियों से जुड़े हुए हैं। इन्हीं सबके चलते ये चिकित्सक सरकारी सेवाओं पर कम और प्राइवेट प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान देते हैं। जिला चिकित्सालय में लम्बे समय से नियुक्त ये चिकित्सक इस कदर मनबढ़ हो गए हैं कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों से बदसलूकी करने व इन्हें डांट-डपट कर भगा देने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं। यही नहीं इन चिकित्सकों द्वारा मरीजों को देखने व सुनने से पहले ही उनसेे मौखिक रूप से यह कह देना कि पी.जी.आई. सद्दरपुर जावो, लखनऊ जावो वहाँ विशेषज्ञ को दिखाओं यहाँ क्यों चले आए हो आज-कल आम बात हो गई है। एक सीनियर फिजीशियन के मुँह से इस तरह की बातें सुनने वाले पढ़े-लिखे लोगों को बहुत अजीब सा लगता है। उन लोगों के अनुसार डी.पी. वर्मा जिला चिकित्सालय के काफी पुराने व सीनियर चिकित्सक हैं जो अब निजी प्रैक्टिस के दृष्टिगत अस्पताल की ओ.पी.डी. में मरीजों को देखने में कम रूचि दिखाते हैं। बावजूद इसके इनके नाम का यह असर है कि लोग इन्हें ही भगवान मानकर अपना इलाज कराना चाहते हैं। हालांकि ये भक्त और समर्थक ज्यादातर इनके स्वजातीय ही हैं। यहाँ रेनबोन्यूज इस समय अपनी अटपटी कार्य शैली के चलते चर्चा में रहने वाले चिकित्सकों का जिक्र नहीं कर रहा है उनके बारे में बाद में पहले हम डॉ. डी.पी. वर्मा के बारे में वह सब लिख रहे हैं जो हमने लोगों से सुना और स्वयं महसूस किया है।

इस समय अकबरपुर के जुड़वा उपनगर शहजादपुर का वह भाग जो काफी दिनों से वीरान सा लग रहा था अब आबाद हो गया है और वहाँ चहल-पहल काफी बढ़ गई है। ऐसा चमत्कार क्यों और कैसे हुआ इसकी हरियाली का राज क्या है? तो खुलासा कर दिया जाए कि यहीं यानि शहजादपुर चौराहे के सन्निकट मालीपुर रोड पर सहकारी शीतगृह के पास नवीन मेडिकल स्टोर वह स्थान है जहाँ डॉ. डी.पी. वर्मा द्वारा अम्बेडकरनगर जिला चिकित्सालय में अपनी तैनाती के शुरूआती दिनों से ही नित्य-नियमित 6 घण्टे (अपरान्ह 3 से रात 9 बजे तक) बैठकर मात्र 200 रूपए फीस लेकर अनगिनत मरीजों को देखा जाता है। गणित का माहिर आसानी से यह आंकलन कर सकता है कि इनकी प्रतिदिन की कमाई क्या है? परन्तु इसके लिए उसे उमड़ी भीड़ (मरीजों) की गणना और अपना 6 घण्टे का समय देना पड़ेगा। डॉ. वर्मा के बारे में अब जो कुछ सुना और देखा जा रहा है वह 10 साल के पहले से काफी भिन्न है। फिजीशियन के रूप में तैनाती के शुरूआती दिनों से ही अम्बेडकरनगर के जिला अस्पताल की ओ.पी.डी. में बैठकर काफी शालीनता व गम्भीरता से मरीजों को देखने वाले डॉ. डी.पी. वर्मा वर्तमान में काफी धनाढ्य लोगों में शुमार हो गए हैं और अपनी निजी प्रैक्टिस को लेकर काफी चर्चा में भी रहने लगे हैं। अपने स्वजातीय मानिन्दों व सत्ता दलालों को ऑब्लाइज करने वाले डॉ. वर्मा ने इस समय मरीजों को गम्भीरता से न देखकर टरकाऊ रवैय्या अपना रखा है। आश्चर्य होता है कि सुशिक्षित फिजीशियन द्वारा हल्के-फुल्के रोगियों को भी मेडिकल कॉलेज या फिर बेवजह उच्च चिकित्सीय प्रबन्धन की बात कहकर उन्हें मौखिक रूप से अन्यत्र व अमुक स्थानों के लिए संदर्भित कर दिया जाता हैं। आखिर उनके द्वारा ऐसा क्यों किया जा रहा है?

बीते दिवस एक मीडिया कर्मी को बगैर देखे ही ओ.पी.डी. के अपने कक्ष में बैठे डॉ. डी.पी. वर्मा ने उक्त का पर्चा यह कहकर वापस कर दिया कि मेडिकल कॉलेज में जावो और किसी विशेषज्ञ को दिखावो। इसका इलाज यहाँ नहीं हो पाएगा। मीडिया कर्मी भौचक्क हो उठा और उसने यह बात अपने अन्य सहकर्मियों को बताया। सभी ने घोर आश्चर्य व्यक्त किया कि एलर्जी, फोड़ा-फुन्सी, वायरल फीवर व अन्य छोटी-मोटी बीमारियों का निदान व इलाज अब एम.डी. उपाधि धारक डॉक्टर वर्मा के पास क्यों नहीं है? काफी मन्थन के बाद पता चला कि जब वह किसी मरीज को इस तरह कहकर अन्यत्र जाने को कहें तो समझना यह चाहिए कि उसे नवीन मेडिकल स्टोर निकट सहकारी शीतगृह, शहजादपुर, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर 3 बजे से 9 बजे के मध्य पहुँचना चाहिए, जहाँ मात्र 200 रूपए फीस लेकर हर बीमारी की दवा हजारों रूपए की कीमत पर आसानी से मिल जाएगी। यहाँ बताना आवश्यक है कि जिस मीडिया कर्मी ने फोड़े-फुन्सी के उपचार हेतु ओ.पी.डी. में बैठे डॉक्टर डी.पी. वर्मा को जिला अस्पताल की पर्ची बनवा कर दिखाया था वह मीडिया से जुड़ा है यह शायद उन्हें नहीं मालूम रहा होगा। चलिए अच्छा ही हुआ कि कम से कम इसी बहाने उनकी मंशा तो उजागर हुई और उनके कार्य करने की जानकारी भी हुई कि वह सामान्य मरीजों को जिला अस्पताल की ओ.पी.डी. में न देखकर मौखिक रूप से सांकेतिक भाषा में अपने प्राइवेट अस्पताल में बुलाते हैं वह स्थान है नवीन मेडिकल स्टोर, जिसका विवरण पहले ही दिया जा चुका है। हर व्यावसायिक चिकित्सक की तरह इनके भी स्वजातीय मित्रों, समर्थकों और दलालों की फेहरिस्त काफी लम्बी है। ऐसे लोगों का जमावड़ा जिला अस्पताल की ओ.पी.डी., उनके आवास और नवीन मेडिकल स्टोर पर नित्य-नियमित लगा रहता है। लोगों का कहना है कि खासमखास के कहने पर निजी तौर पर मरीजों को देखकर ये मुँह मांगी रकम वसूलते हैं, और ऐसे मरीज जो इनके स्वजातीय और दलालों की कृपा पर इन्हें दिखाते हैं उन्हें फीस और दवाओं का दाम नहीं या कम देना पड़ता है। कुछ मुँह लगे लोगों से अपने पक्ष में नारेबाजी करवाने के राजनैतिक पैंतरे का भरपूर इस्तेमाल करते हुए डी.पी. वर्मा द्वारा नकद पैसे व फिजीशियन सैम्पुल की दवाएँ उपहार में दी जाती हैं।

अपनी उच्च स्तरीय मेडिकल शिक्षा के चलते जो चिकित्सक अब से 10 साल पहले सर्वजन हिताय को ध्यान में रखकर कार्य करता रहा हो और हर जाति, धर्म के लोगों की जुबान पर उसका नाम रहा हो अब वही नाम संकीर्ण होता हुआ एक जाति विशेष के लोगों तक ही सीमित होकर रह गया है। रेनबोन्यूज से बात-चीत के दौरान एक इन्हीं के जाति के छुटभैय्ये किस्म के कथित नेता ने कहा कि फैजाबाद जनपद के जिस इलाके के ये रहने वाले हैं वहाँ इनके स्वजातीयों की बहुलता है और इनकी पोस्टिंग जिस जनपद में हुई उसमें भी उसी जाति का बाहुल्य  है जो इनके लिए काफी फायदेमन्द साबित हुआ है। उक्त नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी जाति के लोग काफी धनी व खुशहाल हैं तथा सत्ता के गलियारों में अपनी दमदार पहुँच रखते हैं। बसपा, सपा, भाजपा या कोई अन्य राजनैतिक पार्टी सभी में डी.पी. वर्मा की जाति के लोग महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान रहे हैं जिसका इन्हें भरपूर लाभ मिलता रहा है। इस समय इन्हें इनके स्वजातीय मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. सिंह का पूरा समर्थन प्राप्त है। यहाँ बताना आवश्यक है कि सी.एम.ओ. डॉ. जी.के. सिंह मीरजापुर जनपद के मूल निवासी और ओ.बी.सी. जाति के हैं। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि डॉ. डी.पी. वर्मा निजी प्रैक्टिस का कीर्तिमान बनाने की होड़ में अपनी लोकप्रियता खोने लगे हैं उन्हें मात्र पैसा ही दिखने लगा है तो सर्वथा गलत नहीं होगा और शायद यही कारण भी है कि वह जिला अस्पताल की ओ.पी.डी. कक्ष में मात्र नाम के लिए बैठते हैं। वहाँ बैठकर मरीजों को मौखिक रूप से अन्यत्र के लिए संदर्भित करते हैं। यहाँ ये यह भूल जाते हैं कि दूर-दराज से आने वाले मरीज को इनसे कितनी अपेक्षाएँ रहती हैं। यह अन्त नहीं है शेष और विशेष फिर कभी.....।

-रीता



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