समर्पण
| Rainbow News - Oct 7 2017 11:32AM

एक कविता जो समर्पित है ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट रचना स्त्री को। समर्पित है श्रद्धा और इड़ा को। ईव को, हाड़ा रानी को जिन्होंने अपना मस्तक अपने पति के चरणों में भेज दिया।पन्ना धाय, झलकारी बाई, माँ अहिल्या जैसी असंख्य स्त्रियों को जिन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा इस मानव जाति का उद्धार किया। साक्षी और पी वी सिंधु को जिन्होंने नारी शक्ति का डंका पूरे विश्व में बजाया।यह समर्पित है जीवन में हर क्षण बलिदान दे रही प्रत्येक नारी को। यह समर्पित है आपको......

इस धरा का मान तुम
हो सर्वशक्तिमान तुम,
तुम सिंधु तुम सरस्वती
तुम विश्व की प्रणय प्रति,
हो प्रेम का समुद्र तुम
श्वेत सा एक रंग तुम,
तुम हर कवि की कल्पना
तुम सिंह की सी गर्जना,
तुम बुद्ध की यशोधरा
दुष्यन्त की शकुंतला,
मेवाड़ जिसका ऋणी रहा
वो धाय माँ महान तुम,
हो इस धरा का मान तुम
हो सर्वशक्तिमान तुम।

ये रंग तुम हो रूप तुम
लावण्य तुम,अभिरूप तुम,
स्त्रीत्व में पौरुष तुम
विजय का युद्धघोष तुम,
तुम ईश्कृति संपूर्णा हो
तुम शक्ति अन्नपूर्णा हो,
दुर्गावती तुम हाड़ी हो
तुम लक्ष्मी की झलकारी हो,
रखी थी लाज कृष्ण ने
उस द्रौपदी की आन तुम,
हो इस धरा का मान तुम
हो सर्वशक्तिमान तुम।

तुमने सदा सावन को
अपने आँचल में झुलाया है,
तुमने सदा वसंत को अपने
आँगन में सजाया है,
तुमने ही तो प्राण अपनी
कोख़ में पिलाये है,
भीषण समर के वक़्त में
बिगुल जीत के बजाये है,
हर मकाँ को घर बनाया है
एक स्वर्ग सा सजाया है,
कोख़ में मर कर भी
दे रही जीवन दान तुम
हो इस धरा का मान तुम
हो सर्वशक्तिमान तुम।



Browse By Tags



Other News