तुम्हारे हुस्न की खुश्बू...
| Rainbow News - Oct 9 2017 3:09PM

तुम्हारे हुस्न की, खुश्बू है मन को महकाती।
मेरे ख़यालों मे, खाबों मे, आ के बस जाती।

है तेरे चेहरे की रंगत, खतो-किताबत सी ,
जो बंद आंख भी, मेरी ,सुकूं से पढ़ पाती।

ये जिस्म जां की इमारत, है आलीशान मगर,
पलक झपकते ही, इक बुलबुले सी, ढह जाती।

मिला शबाब, लगा जिंदगी को ,तब जाके,
वो जब भी प्यार से, दीवाना मुझको कह जाती।

नशा शराब सा, होता है, महज चर्चे से,
देखकर रूबरू, आंखों की पलक, थम जाती।

न होती जुस्तजू, फिर और किसी मंजिल की ,
जो मेरे पहलू मे, दो चार घड़ी, रुक जाती ।

अजीब फलसफा, 'राकेश', है जमाने का,
बड़ी ही मछली यहां, छोटी को निगल जाती ।



Browse By Tags



Other News