आदमी मेहनत से ज्यादा साजिशें रचता यहां....
| Rainbow News - Oct 9 2017 3:10PM

जिंदगीभर, सुख कमाने के लिए, खटता यहां।
आदमी, मेहनत से ज्यादा, साजिशें रचता यहां।

जहर, पानी मे घुला है, प्यास भी बेइंतहा,
पी के भी, मरना था, न पीता तभी मरता यहां।

हैं बड़ी बेचैन आंखें ,उम्र भर शिकवा यही,
नींद भी आधी, अधूरा ख्वाब ही, पलता यहां।

वक्त था तो, सब्र कम था, सब्र है तो वक्त कम,
कशमकश, ताजिंदगी, हर मोड़ पर चलता यहां।

लौट तो थक हार कर, आना ही है वापस यहीं,
फिर भी ये, नादां परिंदा, गगन मे उड़ता यहां।

हैं बहुत शिकवे गिले,' राकेश'पर ये जानले,
पाया है, जितना नही, बहुतों को है मिलता यहां।



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