पनामा पेपर्स से करप्शन उजागर करने वाले ऑर्गनाइजेशन की जर्नलिस्ट की हत्या
| Rainbow News - Oct 18 2017 3:18PM

वालेटा। पनामा पेपर्स के जरिए माल्टा में करप्शन को उजागर करने वाली महिला जर्नलिस्ट डैफने कैरुआना गैलिजिया (53) की हत्या कर दी गई। उन्हें माल्टा के मोस्ता शहर में घर से कुछ ही दूर कार बम ब्लास्ट करके निशाना बनाया गया। गैलिजिया ने करप्शन का खुलासा करने वाले दस्तावेजों को दुनिया के सामने रखा। अमेरिकी अखबार पॉलिटिको ने गैलिजिया को 'वन-वुमन विकीलीक्स' का नाम दिया था। बता दें कि पनामा पेपर्स के जरिए 52 देशों का करप्शन उजागर किया गया था।

मस्कट के पीएम को देना पड़ा था इस्तीफा

पनामा पेपर्स मई 2016 में सामने आए थे। इसके तीन महीने पहले ही माल्टा की जर्नलिस्ट डैफने कैरुआना गैलिजिया ने दावा किया था कि माल्टा के पीएम जोसेफ मस्कट भी करप्शन मेंं शामिल रहे हैं। डैफने ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि पीएम की पत्नी और उनके चीफ ऑफ स्टाफ कीथ शेंब्री भी पनामा की एक कंपनी के मालिक हैं। गैर कानूनी तरीके से पैसों के लेन-देन के लिए इस कंपनी का इस्तेमाल किया जाता है। डैफने के खुलासे से माल्टा में सरकार हिल गई थी। जोसेफ को इस्तीफा देना पड़ा। फिर से चुनाव हुए। हालांकि, इसमें जोसेफ फिर जीत गए थे।

रनिंग कमेंट्री नाम से लिखती थीं ब्लॉग​

डैफने किसी मीडिया संस्थान से नहीं जुड़ी थीं। सिर्फ 'रनिंग कमेंट्री' नाम से ब्लॉग लिखती थीं। माल्टा की आबादी 4.5 लाख है, 4 लाख लोग डैफने का ब्लॉग पढ़ते थे। मंगलवार को भी उन्होंने ब्लॉग लिखा था। इसमें कीथ शेंब्री के बारे में लिखा गया था। 2 बजकर 35 मिनट पर डैफने ने ये ब्लॉग अपडेट किया और कार लेकर निकलीं। इसके 35 मिनट बाद ही कार में ब्लास्ट हो गया।

'सिस्टम फेल होता है तो सबसे पहले जर्नलिस्ट मारा जाता है'

डैफने के बेटे मैथ्यू भी जर्नलिस्ट हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मेरी मां कानून और इसे तोड़ने वालों के बीच हमेशा खड़ी रहीं। इसलिए मारी गईं। जब सिस्टम फेल हो जाता है तो ऐसा ही होता है। ऐसे में. आखिर तक लड़ने वाला शख्स जर्नलिस्ट ही होता है और सबसे पहले मारा जाने वाला भी जर्नलिस्ट ही होता है। पीएम जोसेफ मस्कट, कीथ शेंब्री और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। वही जिम्मेदार हैं।"

मैं इस हत्याकांड में शामिल नहीं: पीएम

माल्टा के पीएम जोसेफ मस्कट ने बयान जारी कर कहा कि हत्याकांड में उनका हाथ नहीं है। मस्कट ने कहा, "ये फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर हमला है। डैफने पॉलिटिकल और निजी तौर पर मेरी आलोचकों में से एक थीं, लेकिन इन बातों का हत्या से कोई संबंध नहीं है।"

वर्ल्ड मीडिया ने डैफने की हत्या पर क्या लिखा?

बीबीसी: डैफने ने सबूतों के आधार पर सरकार की जमकर आलोचना की। उनका ही असर था कि देश के पीएम को कुर्सी बचाने के लिए दोबारा चुनाव तक कराना पड़ा।
इंडिपेंडेंट: हाई लेवल पर चल रहा पॉलिटिकल करप्शन सामने लाने के बाद डैफने पर खतरा था। इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई।
माल्टा टुडे: डैफने के अंदर बहुत काबिलियत थी। वो किसी मुद्दे पर लोगों को डिबेट करने के लिए इंस्पायर कर देती थीं। उनकी बातें सुनकर आप चुप नहीं रह सकते। यही उनकी जर्नलिज्म की कामयाबी का राज था।
सीएनएन: माल्टा की राजनीति में जो भी करप्शन है, उसे उजागर करने में सबसे पहले डैफने का ही नाम लिया जाएगा। उनके जर्नलिज्म ने पूरे यूरोप को इंस्पायर किया।



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