ऐसे हैं अम्बेडकरनगर के डी.पी.आर.ओ. मायाशंकर मिश्र.....
| By- Reeta Vishwakarma - Nov 22 2017 4:36PM

‘‘मूदहुँ आँख कतहुँ कछु नाहीं’’ जिस तरह अँधेरी रात में टार्च अथवा सड़क पर वाहनों के हेड लाइट की रोशनी देखकर खरगोश अपनी आँखे बन्द कर यह सोचता है कि उसे कोई नहीं देख रहा है, ठीक उसी तरह अपने व्हाट्सएप्प नम्बर या फिर मोबाइल नम्बर पर किसी का नम्बर रिजेक्ट अथवा ब्लॉक कर देने से फुरसत नहीं मिलने वाली। जो भी कहना, लिखना-पढ़ना या सुनना होगा किसी अन्य माध्यम से ऐसा करने वाले के सूचनार्थ प्रेषित किया जाता रहेगा।
यहाँ हम अम्बेडकरनगर के जिला पंचायती राज अधिकारी के एक ऐसे नम्बर की बात कर रहे हैं जिसे डी.पी.आर.ओ. मायाशंकर मिश्र द्वारा संचालित किया जाता है और उस पर उनका व्हाट्सएप्प एकाउण्ट भी बना हुआ है। उक्त मोबाइल नम्बर है- 9415805972। जिस पर www.rainbownews.in की सम्पादक का व्हाट्सएप्प नम्बर- 8765552676 ब्लॉक कर दिया गया है। शायद ऐसा करने के पीछे डी.पी.आर.ओ. का मंतव्य रहा हो कि विभागीय किसी भी ऐसी खबर अथवा सूचना जो उन्हें अवसादग्रस्त अथवा हाइपर कर सकती है को पाने से वे बचे रहें। पिछले लगभग 3 महीनों से ब्लाक किए गए नम्बर पर उनके सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु खबर व सूचनाएँ लगातार प्रेषित की जा रही हैं, लेकिन नम्बर ब्लाक होने की वजह से वे सूचनाएँ डी.पी.आर.ओ. तक सीधा नहीं पहुँच पा रही हैं। हम यहाँ डी.पी.आर.ओ. को पूर्व में व्हाट्सएप्प पर प्रेषित कुछ संक्षिप्त सूचनाएँ एवं खबरें प्रकाशित कर रहे हैं।

01/9/2017

➡भ्रष्टाचारियों के लिए ‘कामधेनु‘ साबित हो रहा है स्वच्छ भारत मिशन, गाँवों में नहीं महज सरकारी अभिलेखों में दर्ज है शौचालय

http://www.rainbownews.in/News-Detail.aspx?Article=1205

14/10/2017

वी.आई.पी. कल्चर समाप्त कर सरकारी कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर भेजा जाए

सरकारी महकमों में वी.आई.पी. कल्चर व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। सफाई कर्मी/चतुर्थ श्रेणी और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों द्वारा अपने ठाट-बाट, आरामतलबी व शिक्षा के दृष्टिगत वी.आई.पी. कल्चर को अपनाया गया है। ये लोग (अधिकांशतः) अपने मूल पदों पर कार्य करने में अपनी तौहीन समझते हैं इसीलिए विभागाध्यक्षों को खुश करके अपने को मुख्यालय स्थित विभागीय कार्यालयों में सम्बद्ध करवा लिया है। इस तरह का (वी.आई.पी. कल्चर) कार्य शिक्षा विभाग, विकास विभाग और राजस्व विभाग में कुछ ज्यादा ही प्रचलन में है। ऐसे कर्मचारियों के उनके मूल पदों पर रहकर कार्य न करने से वहाँ सम्बन्धित कार्य अपेक्षाकृत संतोषजनक नहीं हो पा रहा है। विभागाध्यक्षों के कार्यालयों से सम्बद्ध सरकारी मुलाजिमों का रूतबा होता है। इन्हें वे कार्य नहीं करने पड़ते जो इनके जातीय, शैक्षिक व आर्थिक स्तर को कमतर बनाते हैं, साथ ही इन्हें आम जनता की कपर ढैं-ढैं भी नहीं सुनना पड़ती है। बहरहाल कुछ भी हो इन सरकारी कर्मचारियों की सम्बद्धता समाप्त होनी चाहिए और उन्हें उनके मूल पद पर कार्य क्षेत्रों में जाकर वह सब करना चाहिए जिसके लिए अच्छी ‘पगार’ पर इनकी भर्ती हुई है। बड़े सरकारी अधिकारियों और इन कर्मचारियों की मिलीभगत भी एक तरह से भ्रष्टाचार और निरंकुशता का जीता-जागता उदाहरण हैं............शीघ्र ही विस्तृत पढ़ने के लिए http://www.rainbownews.in क्लिक करें............रीता, 8423242878.........

13/10/2017

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण शौचालय) का सच

स्वच्छ भारत मिशन। सड़कों के किनारे खुले में शौच करते लोग। करोड़ो/अरबों रूपए सरकारी अनुदान की लूट। सुबह-शाम के धुंधलके में हाइवे, राजकीय राजमार्ग पर चलकर हो सकते हैं सच्चाई से वाकिफ।
गाँवों के अपात्र व अनुदान माफियाओं के चहेते पा रहे हैं सरकारी अनुदान का लाभ। माँस-मदिरा का सेवन जारी है। ग्राम प्रधान से लेकर प्रधान प्रतिनिधि, प्रधानपति, ग्राम विकास अधिकारी (सेक्रेटरी), सहायक खण्ड विकास अधिकारी (पंचायत), खण्ड विकास अधिकारी, डी.पी.आर.ओ., मुख्य विकास अधिकारी सभीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण शौचालयों के निर्माण हेतु दे रहे हैं अपनी कर्मठता का परिचय, मची है आपाधापी क्योंकि इन्हें कागजी खानापूर्ति करके लेना है अगले सरकारी अनुदान का लाभ....................। http://www.rainbownews.in

21/11/2017

Katehari block office mein attach safai karmi Riyaz aur Jitendra apne mool tainati par kab bheje jayenge.....? yeh dono ADO panchayat ke chahete bataye jate hain...Transfer-posting mein khoob dhan ugahi karne ka aarop hai inpar... Rainbow News Media Group.... http://www.rainbownews.in

दैनिक जागरण हिन्दी समाचार-पत्र के 20 नवम्बर 2017 के अंक में पृष्ठ संख्या-4 पर प्रकाशित ‘‘सम्बद्धता में मौज उड़ा रहे सफाई कर्मी हुए वापस’’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार की कटिंग।



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