अम्बेडकरनगर : एस.बी.आई. अकबरपुर के शाखा प्रबन्धक व लिपिक का रवैय्या माशा अल्लाह....
| By- Reeta Vishwakarma - Dec 2 2017 1:12PM

बुजुर्गों के मुँह से सुना है कि उनके जमाने में कलेक्टर और पुलिस कप्तान के बाद वकील, डाक्टर और बैंक मैनेजर का ही ओहदा काफी बड़ा माना जाता था। यह बात सच भी हो सकती है, और अब तो एक प्रचलन सा चल गया है कि लोग अपने बच्चों को बैंक मैनेजर, कैशियर, बड़े बाबू आदि बनाने के लिए उन्हें कामर्स की शिक्षा दिलवाते हैं। कामर्स विषय को लेकर अभिभावकों का मानना है कि उनके बच्चे इसकी पढ़ाई करके वाणिज्यिक बैंकों में अच्छी नौकरी पाकर कमाऊ बन सकते हैं, इससे घर/परिवार का दुःख दलिद्दर दूर हो जाएगा।

बैंक की नौकरी में किसी प्रकार है-है या खै-खै नहीं होती है, ऊपर से प्रतिमाह अच्छी पगार लाखों की अन्य कमाई। काम-धाम के बारे में कुछ भी नहीं कहना। किसी भी बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर शाखा प्रबन्धक तक को देखा जाए तो उनके ठाट-बाट देखने लायक होते हैं। प्लाट-बंगला, गाड़ी-घोड़ा, बैंक बैलेन्स के साथ ही अन्य सारी सुख-सुविधाएँ इन्हीं के पास देखने को मिलती हैं। इन पर न कोई जाँच-न पड़ताल, सारे कर इनकी सैलरी में से कट जाते हैं और इन्हें मालूम ही नहीं चलता है।

खैर! जब बचवा कामर्स पढ़ ही लिए हैं और बैंक की नौकरी की परीक्षा दे ही दिए हैं तो माँ-बाप यही मन्नत मांगते हैं कि उनके कामर्स पढ़े लाल को देश के कथित बड़े व पुराने बैंक में अच्छे ओहदे पर नौकरी मिल जाए। और जब माँ-बाप की मन्नत पूरी हो जाती है तो उनके लल्ला-लल्ली भारतीय स्टेट बैंक जैसे लब्ध-प्रतिष्ठ बैंक की शाखा में प्रतिष्ठापित होकर बैंक ग्राहकों से इस तरह पेश आते हैं जैसे जिले का कलेक्टर या फिर पुलिस कप्तान हों। वे भूल जाते हैं कि वाणिज्यिक बैंक में ग्राहक देवो भव को ही सर्वोपरि रखा जाता है और इसको विस्मृत करने वाले ओहदेदार उसके मूल में मट्ठा डालने का काम करते हैं। प्रतिस्पर्धा के युग में हर बैंक और इनकी बढ़ती शाखाएँ एक दूसरे के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।

आज हम अपने पाठकों को एक ऐसे बैंक व उसमें कार्यरत कर्मचारियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बैंकों के मूल मंत्र ग्राहक देवो भव को ताक पर रखकर कार्य कर रहा है, और विरोध या प्रतिरोध करने की स्थिति में मुलाजिमों का कहना यह होता है कि यह भारत का सर्व प्रमुख, सर्व श्रेष्ठ और बहुत बड़ा बैंक है। यहाँ वर्कलोड ज्यादा रहने से ग्राहकों की अनदेखी होना आम बात है। बैंक कर्मचारियों का यह जवाब कुछ अजीब सा ही लगता है कि जब ये ग्राहकों का ही काम नहीं कर रहे हैं तो इनकी व्यवस्तता का कारण क्या है और ये यहाँ किस काम के लिए नियुक्त किए गए हैं? क्या बैंक ग्राहकों के कार्य के अलावा भी इन्हें कोई अतिरिक्त कार्य करना रहता है?

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद के मुख्यालयी शहर अकबरपुर में संचालित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के एक कनिष्ठ कर्मचारी (एकाउण्टैंट/लिपिक) नीलेश सेन और मुख्य शाखा प्रबन्धक संजय कुमार एक ऐसे बैंक कर्मचारी हैं जिनकी कार्यप्रणाली व आम ग्राहकों के प्रति व्यवहार से इस पुरानी बैंक शाखा से लोगों का मोह भंग होने लगा है। सर्वप्रथम नीलेश सेन के बारे में बताना जरूरी है कि ये एस.बी.आई. मुख्य शाखा अकबरपुर अम्बेडकरनगर (उ.प्र.) के एकल खिड़की नं. 5 पर बैठकर बैंक ग्राहकों के बाह्य चेकों की क्लियरिंग व अन्य कार्य करते हैं।

इनके बारे में कहा जाता है कि ये बैंक चेकों को क्लियर करने में ग्राहकों से सुविधा शुल्क की मांग करते हैं और जब कोई ग्राहक इससे इनकार करता है तो उसका चेक/डॉफ्ट या अन्य बैंक कागजात हफ्ते-15 दिन के लिए वेटिंग बॉक्स में डाल देते हैं फिर ग्राहक इंतजार करते रहें कि कब उनका चेक क्लियर होकर पैसा उनके खाते में आएगा। यही नहीं यदि किसी ने इनसे पूछ लिया कि अभी तक चेक क्लियर क्यों नहीं हुआ तो ये उस पर भड़क जाते हैं और इनका वक्तव्य होता है कि स्टेट बैंक कोई मामूली बैंक नहीं है, भारत का सबसे बड़ा बैंक हैं और तुम यहाँ खड़े होकर हमसे बात कर रहे हो ये मेरी और इस बैंक की मेहरबानी है।

इतना सुनने के बाद कोई भी बैंक ग्राहक वहाँ नहीं रूकेगा। इसी तरह का एक वाकया बीते 30 नवम्बर 2017 गुरूवार को पेश आया जो एक मीडियाकर्मी/युवा पत्रकार सम्बन्धित है, और काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला कुछ इस प्रकार है- अकबरपुर अम्बेडकरनगर के निवासी युवा पत्रकार/सम्पादक अयोध्या की पुकार (हिन्दी समाचार पत्र) संजय मौर्य को एक चेक जिला पंचायती राज अधिकारी कार्यालय अम्बेडकरनगर से प्राप्त हुआ था, जिसे क्लियर करके उसका भुगतान उनके सिन्डीकेट बैंक अकबरपुर की शाखा में भेजना था। डिजीटल युग में जब बैंकों के समस्त कार्य कंप्यूटर/इन्टरनेट के माध्यम से हो रहे हैं और यह कार्य नीलेश सेन के लिए मिनट भर का रहा तब भी उन्होंने उक्त पत्रकार के चेक को ससमय क्लियर न करके लटकाए रखा। और जब संजय मौर्य ने अपने चेक के क्लियरेंस के बारे में बात किया तो वह आदत अनुसार भड़क उठे और काफी बहस हुई।

उक्त मामले की जानकारी पत्रकार संजय मौर्य ने अपने अन्य मीडिया कर्मी मित्रों को दिया। सभी ने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया। अकबरपुर के वरिष्ठ नागरिक व लेखक/पत्रकार भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी ने नीलेश सेन के मोबाइल नं0 8299293454 काल किया तो बैंक कर्मी नीलेश सेन गुस्से में आ गए और बोले कि मेरा नम्बर आपको कहाँ से मिला? गुस्से में वह और भी न जाने क्या अनाप-शनाप बोलते रहे। अकबरपुर के वरिष्ठ पत्रकार को नीलेश सेन के इस व्यवहार से काफी दुःख हुआ क्योंकि बगैर किसी बड़े अपराध व कारण के उन्हें नीलेश सेन ने बहुत कुछ सुना दिया। फिर भी गर्गवंशी ने उन्हें फोन कॉल करने का कारण बताते हुए सिफारिश किया कि मीडिया परसन संजय मौर्य का कार्य कर दें उनकी महान कृपा होगी। नीलेश का उत्तर था कि फोन रखो देखता हूँ अभी बैंक का कुछ कार्य कर रहा हूँ। इतना कहकर फोन काट दिया।

नीलेश सेन के व्यवहार से अचंभित व आहत भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी ने भारतीय स्टेट बैंक अकबरपुर की मुख्य शाखा के प्रबन्धक संजय कुमार को 8795833620 पर फोन करके जब उक्त की जानकारी दिया तो उन्होंने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है इसमें वर्कलोड अधिक रहता है ऐसी स्थिति में बैंक कर्मियों का उत्तेजित हो जाना आम बात है। चूँकि आप जैसा कि कह रहे हैं कि मीडिया कर्मी हैं आपके साथ बैंक कर्मी/लिपिक नीलेश सेन ने अभद्रता किया है तो आपको बैंक आकर मुझसे मिलकर अपनी बात कहनी चाहिए। जब पत्रकार ने संजय कुमार से कहा कि वह वयोवृद्ध/वरिष्ठ पत्रकार हैं कहीं आने-जाने में असमर्थ हैं तो मुख्य शाखा प्रबन्धक ने कहा कि यदि आप यहाँ आकर दर्शन नहीं दे पा रहे हैं तो कहिए कभी हम ही आकर आपका दर्शन करें। इस तरह कहकर कुमार ने बड़े ही कुटिल और व्यंग्यात्मक लहजे का इस्तेमाल किया। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जब एक बड़े बैंक का शाखा प्रबन्धक इस तरह का व्यवहार कर सकता है (वह भी वरिष्ठतम पत्रकार के साथ) तब एक कनिष्ठ लिपिक जैसे ओहदे पर कार्यरत कर्मचारी से और क्या अपेक्षा की जा सकती है।

नीलेश सेन के बारे में पता चला है कि ये फैजाबाद में अपने माता-पिता और परिवार के साथ रहकर वहीं से अप-डाउन करते हैं। देर से आना व जल्दी जाना इनकी आदत में शुमार हैं। यह भी एक कारण हो सकता है जिसकी वजह से ये बैंक ग्राहकों का काम समय से नहीं निपटा पाते हैं और वह पेन्डिंग हो जाता है इसके चलते बैंक ग्राहक असंतुष्ट रहते हैं। भारतीय स्टेट बैंक अकबरपुर के मुख्य शाखा प्रबन्धक के बारे में पता चला है कि अभी इनको आए एक माह ही हुए हैं। इन्हें अकबरपुर की मुख्य शाखा में कार्यों का सम्पादन/निष्पादन किस तरह किया जाना चाहिए सीखने में कुछ समय लग सकता है।

पाठकों की अदालत में अकबरपुर, अम्बेडकरनगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में कार्यरत लिपिक नीलेश सेन व प्रबन्धक संजय कुमार द्वारा वरिष्ठ पत्रकार भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी से किए गए अप्रत्याशित व्यवहार से सम्बन्धित आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है। आप भी पढ़ें, जानें और निर्णय करें।



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