हत्या जैसे मामले में मालीपुर पुलिस की लापरवाही शोचनीय : डॉ. मेला
| Rainbow News - Dec 7 2017 1:42PM

अम्बेडकरनगर। थाने के बड़े साहेब का दम क्यों बेदम हो गया है? जबकि तहरीर नामजद पड़ी है। 16 नवंबर 2017 को पड़ी तहरीर में जिलाजीत हरिजन ने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि मृतक नरेंद्र कुमार पुत्र अमृतलाल को उसके सगे बेटे बंटी ने नल के हत्थे से पीट-पीटकर मार डाला। छोटी सी बात पर पुलिसिया तांडव करने वाले काबिल पुलिसकर्मी हत्या जैसे विषय पर ठंडे क्यों पड़े हैं स्वयं में एक चिंतन का विषय है।

थाना मालीपुर अंतर्गत बैरागल़ गांव के नामज़द हत्या आरोपी बंटी को अभी तक स्थानीय पुलिस ने बुलाकर पूछताछ करने तक की जहमत नहीं उठाई। क्या सह आरोपी वर्तमान दबंग ग्राम प्रधान की पहुंच सत्ता के गलियारों में दमदारी के साथ है, जिसके चलते स्थानीय पुलिस बेचारगी का अनुभव कर रही है।

नए एसपी के आने के बाद तमाम उम्मीदें बलवती हुई थी लेकिन इसका भी मालीपुर थाने की पुलिस पर कुछ असर नहीं हुआ। हत्या जैसे विषय को ठंडे बस्ते में डाल देना स्वयं में एक जबरदस्त सवाल है।

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अम्बेडकरनगर। थाना मालीपुर अंतर्गत ग्राम बैरागल में सगे पुत्र द्वारा पिता की नल के हत्थे से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. नामजद हत्यारे के खिलाफ तीसरी बार खबर चलने पर दिनांक 6 दिसंबर 2017 को शाम 5:00 बजे थानाध्यक्ष मालीपुर में मेरे टेलीफोन पर संपर्क करके मुझसे पूछा कि जब हत्या की रिपोर्ट परिजन नहीं लिखा रहे हैं तो पड़ोसी के लिखाने से क्या होता है? मैंने कहा पुत्र ने पिता की हत्या की है तो FIR कौन दिखाएगा? मॉ या परिजन? जिसका पति नल के हत्थे से पीट-पीट कर मार डाला गया, उसका सगा बेटा जेल चला जाए.... तो क्या चश्मदीद गवाह F.I.R. नही लिखा सकता?

थानाध्यक्ष मालीपुर को इस खबर के संदर्भ में बार-बार खबर चलाए जाने पर भले ही ऐतराज महसूस हो रहा हो परंतु मैंने जब पत्रकार की हैसियत से पूछा कि जिलाजीत द्वारा शासन प्रशासन को रजिस्टर्ड शिकायत पत्र भेजकर नामजद हत्यारोपी के खिलाफ FIR करने की मांग की गई तो अब तक आपने एक थाना अध्यक्ष की हैसियत से क्या किया? शिकायतकर्ता अथवा आरोपी को बुलाकर या जा कर आपने क्या कुछ जाना?

क्योंकि हत्याभियुक्त का साथी/ मददगार वर्तमान ग्राम प्रधान निस्संदेह पावरफुल आदमी है. आज के कुछ वर्ष पहले वर्तमान ग्राम प्रधान पर गंभीर विषय बिंदु पर थाना मालीपुर में वर्तमान ग्राम प्रधान पर अभियोग लिखा जा चुका था.

आखिर 20 अक्टूबर की हुई हत्या के संदर्भ में चश्मदीद गवाह द्वारा FIR की मांग करना कितना नाजायज है? और खबर चलाने वाला पत्रकार कितना दोषी? शासन-प्रशासन के जवाबदार लोगो को स्थानीय थाने की नीयत समझने में देर क्यों? -डा.मेला.



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