...दे के जा उपहार कोई या करेंसी नोट अब
| Rainbow News - Dec 7 2017 1:54PM

जिस्म पर हमला, मगर है, रूह पर भी चोट अब।
यूं उजागर, हो रही, उनकी नियति की खोट अब।

तन के चिथड़े, ले गई है, छीन कर गुरबत मगर,
कहें वे, चारो तरफ, फैशन सजाए गोट अब।

इस कदर कोहराम, हो हल्ला, मचा है क्यूं भला,
ले चली है, मौत जब, अपना गला ही घोट अब।

हर्ष के, उल्लास के, त्योहार शायद आ गए,
बढ़ रहा है, पुलिस की, सरगरमियों का शोर अब।

प्यार की पींगे, बढाई है, तो नादां सोच ले,
हिचकी, सिसकी, तड़पझिड़क कमर देगी तोड अब।

आया है 'राकेश' दावत मे, तो खाए या न खा,
दे के जा, उपहार कोई, या करेंसी नोट अब।



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