गर्व से सीना चौड़ा कर देता है हरियाणा का सैन्य योगदान
| Rainbow News - Dec 7 2017 3:28PM

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस (7 दिसम्बर) विशेष

वर्ष 1947-48 के कश्मीर कश्मीर युद्ध में हरियाणा के 30 शूरवीरों ने अपनी शहादत दी। इनमें झज्जर जिले के सर्वाधिक 14 सैनिक शामिल थे। उसके बाद रोहतक के पाँच, भिवानी के तीन, जीन्द के दो, सोनीपत के दो और करनाल, फतेहाबाद, रेवाड़ी व महेन्द्रगढ़ जिले से एक-एक जवान ने अपने तिरंगे के लिए बलिदान दिया। इस युद्ध में अनूठी शूरवीरता के लिए हरियाणा प्रदेश के आठ रणबांकुरों को महावीर चक्र और 33 शूरवीरों को वीर चक्र मरणोपरान्त प्रदान किए गए, जिनमें से तीन महावीर चक्र और 6 वीर चक्र मरणोपरान्त दिए गए थे। हरियाणा के रणबांकुरे सैकिण्ड जाट के नायक शीशपाल को प्रथम महावीर चक्र (मरणोपरान्त) से सम्मानित किया गया था। उनके अलावा कुमाँऊ रेजीमेंट के सिपाही मान सिंह और डोगरा के लेफ्टि. कर्नल आई.जे.एस. बुटालिया को भी मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया। इनके अलावा लांस नायक राम सिंह (फतेहाबाद), नायक सरदार सिंह (भिवानी), सूबेदार शर्दूल सिंह (भिवानी), जमादार थाम्बूराम (सोनीपत), सिपाही मांगे राम (सोनीपत), हवलदार यादराम (भिवानी) को मरणोपरान्त वीर चक्र से नवाजा गया।

सन् 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में हरियाणा के कुल 254 शूरवीर सैनिकों ने अपनी शहादत दी। इस युद्ध में सबसे अधिक 37 सैनिक रेवाड़ी जिले के शहीद हुए। इसके बाद भिवानी और महेन्द्रगढ़ के क्रमशः 36-36 सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। झज्जर के 35, रोहतक के 18, फरीदाबाद के 14, करनाल के 13 गुडगाँव के 13, अम्बाला के 11 और सोनीपत के 11 शूरवीर सैनिक शहीद हुए। कुरूक्षेत्र के 6, जीन्द के 6, कैथल के 4, हिसार के 4, पानीपत के 3, पंचकूला के 2 और सिरसा जिले से एक सैनिक ने अपने देश के लिए शहादत दी। इस ऐतिहासिक युद्ध में अपनी वीरता और बहादुरी के लिए कुल 17 वीरता पदक हासिल किये, जिनमें तीन महावीर चक्र और चौदह वीरचक्र शामिल थे। इनमें से एक महावीर चक्र मेजर एम.एस. चौधरी (सोनीपत) को मरणोपरान्त महावीर चक्र और मरणोपरान्त ही नायक धर्मपाल दहिया (झज्जर), लांस नायक सरदार सिंह (झज्जर), सूबेदार निहाल सिंह (भिवानी), कैप्टन गुरचरण भाटिया (यमुनानगर), नायक हुकमचन्द (गुडगाँव), लांस नायक सिंहराम (रेवाड़ी), नायक गुलाब सिंह (महेन्द्रगढ़), नायक मुंशीराम (सोनीपत), नायब सूबेदार सूरजा (भिवानी) को वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

वर्ष 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान भी हरियाणा के वीर सैनिकों ने अपनी अनुपम वीरता और अदम्य साहस का परिचय दिया और अपने प्राणों की आहूतियां दीं। इस युद्ध में हरियाणा के 305 सैनिकों ने शहादतें दीं। शहादत देने वालों में अम्बाला जिले के 14, कुरूक्षेत्र के 6, करनाल के 16, कैथल के 5, गुडगाँव के 8, फतेहाबाद के एक, फरीदाबाद के 16, रोहतक के 31, भिवानी के 39, हिसार के 9, सिरसा के 2, जीन्द के 9, सोनीपत के 18, रेवाड़ी के 19, झज्जर के 56, महेन्द्रगढ़ के 35, यमुनानगर के 6, पानीपत के 11 और पंचकुला के 4 सैनिक शामिल थे। हरियाणा के इन रणबांकुरों को इस युद्ध के लिए 5 महावीर चक्र और 22 वीर चक्र प्रदान किए गए, जिनमें से 7 वीर चक्र मरणोपरान्त प्रदान किए गए। मरणोपरान्त वीर चक्र पाने वालों में नायक राम कुमार (रेवाड़ी), ले.हवलदार उमराव सिंह (महेन्द्रगढ़), मेजर एस.पी.वर्मा (सोनीपत), राईफलमैन माथन सिंह (भिवानी), नायक जगदीश सिंह (महेन्द्रगढ़), सूबेदार नंदकिशोर (रेवाड़ी), राईफलमैन माही लाल सिंह (फरीदाबाद) शामिल थे।

वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी हरियाणा के शूरवीरों का योगदान बड़ा अहम् रहा, जिसमें 374 रणबांकुरों ने अपनी जान देश के लिए कुर्बान की, इनमें सबसे अधिक 69 शूरवीर सैनिक भिवानी जिले के थे। इनके अलावा अम्बाला जिले के 13, कुरूक्षेत्र के 7, करनाल के 12, कैथल के 5, गुडगाँव के 13, फतेहाबाद के 3, फरीदाबाद के 8, रोहतक के 36, हिसार के 16, सिरसा के 2, जीन्द के 15, सोनीपत के 30, रेवाड़ी के 25, झज्जर के 61, महेन्द्रगढ़ के 39, यमुनानगर के 6, पानीपत के 9 और पंचकुला के 5 सैनिक शामिल थे। इस युद्ध के लिए एक परमवीर चक्र 5 महावीर चक्र और 42 वीरचक्र हरियाणा के जाबांज सैनिकों को उनकी अनूठी वीरता के लिए प्रदान किए गए। इनमें से 2 महावीर चक्र कैप्टन डी.एस.अहलाव (झज्जर), मेजर वी.आर. चौधरी (अम्बाला) को मरणोपरान्त प्रदान किए गए और नायब सूबेदार उमेद सिंह (झज्जर), मेजर एचएस ग्रेवाल (अंबाला), हवलदार दयानंद (भिवानी), लां.नायक अभेराम (जीन्द), सीएचएम किशन सिंह (यमुनानगर), कैप्टन के.एस. राठी (झज्जर), ले. हवासिंह (हिसार) और नायक रमेशचन्द (पलवल) को मरणोपरान्त वीर चक्र से नवाजा गया।

सन् 1999 में भारत ने कारगिल में घुसपैठ करने का दुःसाहस किया तो भारत माँ के लालों ने ‘कारगिल ऑप्रेशन विजय’ के तहत पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीठ दिखाकर भागने के लिए विवश कर दिया। भारत माँ के इन लालों में हरियाणा की पावन मिट्टी में जन्में अनेक शूरवीर शामिल थे। ‘कारगिल ऑप्रेशन विजय’ 21 मई से 14 जुलाई, 1999 तक चला। इसमें कुल 348 शूरवीरों ने शहादत दी, जिनमें हरियाणा के 80 रणबांकुरे शामिल थे। हरियाणा के रणबांकुरों ने देश की आन-बान और शान के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने में तनिक भी संकोच नहीं किया। इसकी पुष्टि इसी तथ्य से हो जाती है कि इस युद्ध में 17 जाट के 12 जवान तथा 18 ग्रेनेडियर के 12 जवान एक ही दिन में शहीद हुए।

‘कारगिल ऑप्रेशन विजय’ में भिवानी जिले के जवानों ने सर्वाधिक शहादतें दीं। इसके बाद महेन्द्रगढ़ के दस, फरीदाबाद के बारह, रोहतक के दस, फरीदाबाद के सात, रेवाड़ी के छह, गुडगाँव के पाँच तथा शेष अन्य जिलों के जवानों की शहादतें दर्ज हुईं। ‘कारगिल ऑप्रेशन विजय’ में अद्भूत शौर्य प्रदर्शन करने वाले लेफ्टि. बलवान सिंह को महावीर चक्र और सूबेदार रणधीर सिंह व लांस हवलदार रामकुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इनके अलावा हवलदार हरिओम, नायक समुन्द्र सिंह, नायक बलवान सिंह, लांस नायक रामकुमार, सिपाही सुरेन्द्र सिंह तथा लांस हवलदार बलवान सिंह को सेना मेडल से अलंकृत किया गया। इन सब युद्धों के अलावा आतंकवाद से लोहा लेने में भी हरियाणा के वीरों की अह्म भूमिका रही है, जिसमें मुख्य रूप से सेकिण्ड लेफ्टि. राकेश सिंह व मेजर राजीव जून के नाम सर्वोपरि स्थान पर आते हैं। ये दोनों वीर योद्धा 22 ग्रेनेडियर रेजीमेंट के थे और दोनों को अशोक चक्र से मरणोपरान्त सम्मानित किया गया। ‘सशस्त्र सेना झण्डा दिवस’ के अवसर पर देश पर तन-मन-धन अर्पण करने वाले और अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सभी जाने-अनजाने वीर-सूरमाओं को कोटि-कोटि सादर नमन है।



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