सिंघम इज एक्टिव इन अकबरपुर.....(सॉरी...सर्वर नॉट फाउण्ड)
| By- Reeta Vishwakarma - Dec 12 2017 1:13PM

अपने शहर की अहम समस्या जाम। इस जाम को लेकर कई ब्राण्डेड प्रिन्ट समाचार-पत्र वर्षों से लिखते आ रहे हैं। अक्सर इनके पृष्ठों पर जाम की समस्या आम छपा हुआ देखने व पढ़ने को मिलता है। कोतवाली पुलिस का आधा अमला कोतवाल के नेतृत्व में दिन भर जाम से ही जूझता रहता है। अच्छी खासी सूरत, वर्दी के दोनों कन्धों पर तीन-तीन स्टार, कमर में बेल्ट के साथ लगा सर्विस रिवॉल्वर, आँखों पर सनग्लास (गॉगल), मूंछें सिंघम जैसी, वाणी से तेज आवाज में अपशब्दों की बौछार अजीब सा लगता है देखकर कि यह कौन सी नौकरी?

जिसमें एक खूबसूरत सिंघम सा दिखने वाला पुलिस आफीसर सड़क पर खड़ा होकर यातायात नियंत्रण कर और करवा रहा है। ठेला, खोमचे वालों की शामत तब आती है जब सायरन बजाती पुलिस की गाड़ी से सिंघम उतरता है। छोटे-बड़े, आई.पी., वी.आई.पी., वी.वी.आई.पी. वाहनों को पंक्तिबद्ध करके उन्हें चलने का इशारा करता है। इनके दल-बल के पुलिस कर्मी लम्बा सा डण्डा दिखाते, मुँह से बड़बड़ाते इनके साथ जब चलते हैं तो लोग इन्हें ही देखते हैं। कहते हैं भागो भइया सिंघम आ गया। वाह री नौकरी....।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं अम्बेडकरनगर जिले के अकबरपुर कोतवाली थाना के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार पंत के बारे में। जिनका बहैसियत कोतवाल अकबरपुर कार्यकाल अभी मात्र दो माह का ही हुआ है, फिर भी अपराध व अन्य ऐसी जन समस्याएँ जिनका निराकरण पुलिस स्तर पर हो सकता है में नियंत्रण लगा है। वर्दी की हनक व व्यक्तिगत आचरण से इंस्पेक्टर पंत ने लोगों में अपने को चर्चा का विषय बना दिया है।

अक्टूबर माह 2017 के शुरूआती दिनों में टाण्डा कोतवाली से अकबरपुर आए मनोज कुमार पंत की सक्रियता तब से और भी बढ़ गई है जब से युवा आई.पी.एस. सन्तोष कुमार मिश्र ने यहाँ पुलिस अधीक्षक का पदभार ग्रहण किया। भाइयों/बहनों इन्टरनेट बाधा (सर्वर नॉट फाउण्ड) की वजह से यह आलेख विस्तार नहीं पकड़ पाया......नेटवर्क ठीक होने पर विस्तृत आलेख प्रस्तुत किया जाएगा।



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