उन्ही गलियों मे आके खो गया मैं
| Rainbow News - Dec 18 2017 11:46AM

मुकाबिल आसमां के, हो गया मैं।
पीठ पर, पंख बांधे, सो गया मैं।।

जहां पैदा हुए, परवाज पाई।
उन्ही गलियों मे आके, खो गया मैं।।

बहारें, वादियां, पुरअमन मंजर।
घोलकर जहर उनमे, लो गया मै।।

अजब फितरत, गजब मौका परस्ती।
अभी तक था यहीं, अब वो गया मैं।।

अलंबरदार, मजहब का, बना तो।
बीज नफरत के, सब मे बो गया मैं।।

आग के गिर्द, फेरे, सात लेकर।
सगा, इक अजनबी का, हो गया मै।।

टूटता तारा दिखा, 'राकेश' जब से।
ख्वाब सीने मे, रखकर सो गया मै।।



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