प्याज एवं लहसुन के प्रमुख रोगों एवं कीटों की रोकथाम : डा. रवि प्रकाश
| Rainbow News - Jan 6 2018 1:07PM

प्याज एवं लहसुन की फसल में अनेक रोग लगते हैं किन्तु कुछ ही विशेष रूप से हानिकारक हैं। इनकी रोकथाम अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा पूरा परिश्रम तथा फसल पर किया गया व्यय निरर्थक हो जाता है तथा किसानों को घोर निराशा व हानि‍ होती है। कृषि विज्ञान के न्द्र अम्बेकर नगर के कार्यक्रम समन्यवक डा. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि  बैंगनी धब्बा रोग (परपल ब्लाच)प्रायःप्याज एवं लहसुन उगाने वाले सभी क्षेत्रों में पायी जाती है। इस बीमारी का कारण आल्टरनेरिया पोरी नामक कवक (फफूंद) है। यह रोग प्याज की पत्तियों, तनों तथा बीज डंठलों पर लगती है।

रोग ग्रस्त भाग पर सफेद भूरे रंग के धब्बे बनते हैं जिनका मध्य भाग बाद में बैंगनी रंग का हो जाता है। रोग के लक्षण के लगभग दो सप्ताह पश्चात इन बैंगनी धब्बों पर पृष्ठीय बीजाणुओं के बनने से ये काले रंग के दिखाई देते हैं। अनुकूल समय पर रोगग्रस्त पत्तियां झुलस जाती हैं तथा पत्ती और तने गिर जाते हैं जिसके कारण कन्द और बीज नहीं बन पाते। रोकथाम हेतु पौध की रोपाई के 45 दिन बाद  मैकोजेब या कापर आक्सीक्लोराइड 500 ग्राम 200 लीटर पानी मे घोल कर प्रति बीघा की दर सै छिड़काव करे। चिपकने वाली पदार्थ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यदि बीमारी का प्रकोप ज्यादा हो तो छिड़काव 3-4 बार प्रत्येक 10-15 दिन के अन्तराल पर करना चाहिए।

झुलसा  रोग मे  पत्तियों और बीच के डंठलों पर पहले छोटे-छोटे सफेद और हलके पीले धब्बों के रूप में पाया जाता है। बाद में यह धब्बे एक-दूसरे से मिलकर बड़े भूरे रंग के धब्बों में बदल जाते हैं और अन्त में ये गहरे भूरे या काले रंग के हो जाते हैं। पत्तियां धीरे-धीरे सिरे की तरफ से सूखना शुरू करती हैं और आधार की तरफ बढ़कर पूरी सूख कर जल जाती हैं और कन्दों का विकास नहीं हो पाता। रोकथाम हेतु मैनकोजेब या कॉपर आक्सीक्लोराइड 500 ग्राम को 200लीटर पानी मे घोलकर प्रति बीघा की दर से छिड़काव प्रत्येक 15 दिन के अन्तराल पर 3-4 बार करना चाहिए। चूसक कीट (थ्रिप्स )आकर मे छोटे व 1-2 मि.मी. लम्बे कोमल कीट होते हैंI ये कीट सफ़ेद-भूरे या हल्के पीले रंग के होते हैंI इनके मुखांग रस चूसने वाले होते हैं जो कि सैंकड़ों कि संख्या मे पौधों कि पत्तियों के कक्ष (कपोलों) के अन्दर छिपे रहते हैंI

इस कीट के निम्फ एवं प्रौढ़ दोनों ही अवस्थायें मुलायम पत्तियों का रस चूस कर उन्हें क्षति पहुँचाती हैंI इस कीट से प्रभावित पत्तियों में जगह जगह पर सफ़ेद धब्बे दिखाई देते हैंI इनका अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां सिकुड़ जाती है और पौधों की बढ़वार रुक जाती है तथा प्रभावित पौधों के कंद छोटे रह जाते हैं जिससे उपज मे कमी हो जाती  हैI प्रबंधन के लिये कीटों का संक्रमण दिखाई देने पर नीम द्वारा निर्मित कीटनाशी 500 मि.ली. प्रति 200लीटर पानी की दर से आवश्यकतानुसार घोल तैयार कर शाम के समय फसल पर 10-12 दिनों के अंतराल पर 2-3 छिड़काव करें या डाईमेथोऐट 30 ई.सी. 150 मि.ली./150 ली. पानी के साथ या मेटासिस्टॉक्स 25 ई.सी. 250मिली./150  ली. पानी के साथ या इमिडाक्लोप्रिड 8 एस.एल. 30 ई. सी. 50 मि.ली./ 15 0ली. पानी के साथप्रति बीघा मे  छिड़काव करेंI

मक्खी प्याज की फसल का प्रमुख हानिकारक कीट है जो अपने मैगट पौधों के भूमि के पास वाले भाग, आधारीय तने में दिए जाते हैंI मैगटों की संख्या 2-4 तक हो सकती हैI इनसे भूमि के पास वाले तने का भाग सड़कर नष्ट हो जाने से पूरा पौधा सूख जाता हैI कभी - कभी इस कीट द्वारा फसल को भारी मात्रा मे क्षति होती हैI खड़ी फसल मे इस कीट (मैगट) का संक्रमण दिखाई देने पर कीटनाशी क़्वीनालफॉस 500 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी की दर से आवश्यकतानुसार मात्रा में घोल तैयार कर शाम के समय २-३ छिड़काव करेंI

: फसल पकने या कन्द विकसित होने की अवस्था में किसी भी दैहिक कीटनाशियों का इस्तेमाल न करेंI



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