डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन व्याख्यान-2018 का आयोजन
| Rainbow News - Jan 8 2018 12:36PM

भदंत आनंद कौसल्यायन एक कुशल अनुवादक व लेखक थे : प्रो. एम.एल. कासारे

डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र, महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के तत्वावधान में डॉ.भदंत आनंद कौसल्यायन के जन्मदिवस के अवसर पर ‘बौद्ध धम्म के विकास में डॉ.भदंत आनंद कौसल्यायन का रचनात्मक योगदान’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत त्रिशरण, पंचशील एवं भदंत जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात चिंतक प्रो.एम.एल.कासारे ने बुद्ध के गुणों कि चर्चा करते हुए कहा कि जो सत्य है वो धम्म है, जो धम्म है वो सत्य है, बुद्ध ने इसी सत्य की प्रतिस्थापना की, वैज्ञानिक भी इस बात को स्वीकार करते है। मन के ऊपर हजारों वैज्ञानिकों ने किताबें लिखी परंतु मन को किसी ने सही मायने में समझा तो वह बुद्ध ही थे। मन ही सभी कर्मों का अगुआ है।

डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन के छात्र जीवन कि चर्चा करते हुए प्रो.कासारे ने कहा कि उनके जीवन पर लाला हरदयाल का बहुत प्रभाव था। लाला जी का कहना था कि हम कौन सा कार्य करें कि हमें समाज से कम लेना हो व समाज को हम ज्यादा से ज्यादा दे सकें। इसी का अनुसरण करते हुए भदंत जी ने एक बौद्ध भिक्षु होना स्वीकार किया। भदंत एक कुशल अनुवादक व लेखक थे। उन्होने बुद्ध और उनका धम्म, बौद्ध धर्म का सार एवं पालि साहित्य के कई ग्रन्थों का अनुवाद किया। 31 दिनों मे पालि, भिक्षु के पत्र, यदि बाबा न होते इत्यादि पुस्तकों का लेखन भी किया। भदंत जी कहते थे उनके जीवन के दो पहियें है, एक पालिभाषा और एक हिंदी। हिंदी के लिए उनके मन में अगाध प्रेम था, वह चाहते थे कि हिंदी राष्ट्रभाषा एवं सभी भारतीयों की संपर्क भाषा बने। हिंदी के लिए गांधी से उनकी बहस भी हुई थी। विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित मा॰रामभाऊ उमरे ने भदंत जी द्वारा रचित पुस्तक ‘यदि बाबा न होते’ के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डालते हुए बुद्ध, अंबेडकर एवं भदंत जी को मानवता के लिए हित चिंतक बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ.सुरजीत कुमार सिंह ने अन्याय को देख उसका विरोध करने के लिए कहा कि चुप रहकर भी कातिल की मदद होती है। डॉ. सिंह ने नेट, जेआरएफ उत्तीर्ण हुए विभाग के व अन्य छात्रों को बधाई भी दी। कार्यक्रम का फेसबूक पर लाईव प्रसारण स्त्री विमर्श विभाग के वरिष्ठ शोधार्थी रजनीश कुमार अंबेडकर द्वारा किया गया। अंत मे श्रीलंका के अनुराधपुर से लाई गई बोधिवृक्ष की शाखा का रोपण भी किया गया। अथितियों का स्वागत भंते राकेश आनंद एवं कार्यक्रम संचालन डॉ. कृष्ण चंद पांडेय ने किया। कार्यक्रम में प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, भंते कारुणिक नन्दन, भंते इंद्रश्री, रजनीश अंबेडकर, जितेंद्र बौद्ध, श्रेयात, रामदेव जुर्री,पंकज वेला, एकता जैन, निलुराम कोर्राम, जितेंद्र सोनकर, रंजना पाटिल, अर्चना, धम्म रतन, रमेश सिद्धार्थ, गौरव उपाध्याय, अमन ताकसांडे, किरण कुट्टे, नीतू आनंद, मालती चव्हाण, सुभाष कांबले व अन्य उपस्थित थे।



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