सर्वधर्म सद्भाव का परचम लहराता चंडीगढ़ का राम दरबार
| -Nirmal Rani - Jan 25 2018 4:15PM

          हमारे देश में चारों ओर जहां धर्म, आस्था, विश्वास, जात-पात तथा मान्यताओं के नाम पर तरह-तरह के विवादों के समाचार अक्सर आते रहते हैं वहीं इसी देश में अनेक स्थान ऐसे भी हैं जो इस प्रकार की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर एक ही छत के नीचे सभी धर्मों को मान-स मान देने तथा सभी के प्रति नतमस्तक होने जैसे मानवतापूर्ण आयोजनों को प्रोत्साहन देते हैं। वैसे भी हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित सूफ़ी परंपरा एक ऐसी ही परंपरा का नाम भी है जहां किसी भी धर्म का मानने वाला कोई भी व्यक्ति अपने रब या ईष्ट को याद करते हुए उसकी याद में ख़ुद को भुला देना चाहता है और अपने सर्वस्व को अपने प्रभु को समर्पित कर देता है। सर्वधर्म संभाव को प्राथमिकता के आधार पर मानने वाली इस सूफ़ी परंपरा में भक्तगण अपने ईष्ट को राज़ी करने के लिए अपने पीर-ो-मुर्शिद अर्थात् अपने वसीले को ख़ुश करने या उसे मनाने के क्रम में तरह-तरह के गीत-संगीत व नृत्य,फ़रियाद,कसीदा,भजन-कीर्तन,ह द-ो-सिना, सलाम, कॉफ़ी,कव्वाली तथा बैत आदि का सहारा भी लेते हैं। भारतवर्ष में अनेक प्रसिद्ध सूफ़ी दरगाहें तथा  वानक¸ाहें ऐसी हैं जहां एक ही छत के नीचे बैठकर विभिन्न धर्मों से संबंध रखने वाले अलग-अलग लोग एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से प्रार्थनाएं करते हैं तथा अपने गुरू या पीर के आगे नतमस्तक होते हैं।

                केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ स्थित राम दरबार एक ऐसे ही प्रसिद्ध स्थान का नाम है जहां सदियों से सूफ़ी परंपरा को परवान चढ़ाने का यह सिलसिला बख़ूबी चला आ रहा है। महान सूफ़ी संत सख़ी चंद जी व अ मी हुज़ूर के प्रयासों से स्थापित सांप्रदायिक सौहार्द्र के इस प्रमुख केंद्र का संचालन राम दरबार के वर्तमान गद्दीनशीन तथा अ मी हुज़ूर व सखी चंद जी महाराज के विशेष कृपा पात्र शहज़ादा पप्पू सरकार द्वारा बख़ूबी अंजाम दिया जा रहा है। शहज़ादा पप्पू सरकार जोकि राम दरबार के गद्दीनशीन होने के साथ-साथ एक अप्रवासी भारतीय भी हैं, द्वारा करोड़ों रुपये ख़र्च कर राम दरबार के भवन का कायाकल्प भी किया जा रहा है। पप्पू सरकार के निर्देशन में इन दिनों सर्वधर्म संभाव पर आधारित एक ऐसा आलीशान मकबरा अपने गुरुजनों की स्मृति में तैयार कराया जा रहा है जो पूरा होने के बाद पूरे चंडीगढ़ महानगर के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसके अतिरिक्त शहज़ादा पप्पू सरकार अपने पूरे सामथर््य तथा श्रद्धा के साथ यहां प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले सालाना उर्स-ए-मुबारक एवं सर्वधर्म समागम का भी आयोजन करते आ रहे हैं। एक सप्ताह तक चलने वाला यह वार्षिक आयोजन प्रत्येक वर्ष 14 से 20 जनवरी के मध्य आयोजित होता है। राम दरबार की सभी गतिविधियों का संचालन माता रामबाई चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

                इस वर्ष भी राम दरबार का यह साप्ताहिक आयोजन अपने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ किया गया। महान सूफ़ी संत बाबा रुकनुद्दीन(कुंडे वाली सरकार)का 54वां तथा जन्नतनशीन मर्द-ए-क¸लंदर परम पूज्य माता रामबाई जी हुज़ूर शहंशाह का 35वां उर्स-ए-मुबारक 14 से 20 जनवरी तक सर्वधर्म समागम के रूप में आयोजित किया गया। इस साप्ताहिक सर्वधर्म समागम के अंतर्गत् 14 जनवरी को श्रीमद् भागवत सप्ताह का शुभारंभ हुआ। 15 जनवरी को अखंड पाठ श्री गुरु ग्रंथ साहब आरंभ हुआ। 16 जनवरी का दिन भजन-कीर्तन का दिन था। 17 जनवरी को श्री गुरु ग्रंथ साहब का भोग डाला गया। 18 जनवरी को रामचरित मानस का अखंड पाठ शुरु हुआ जो 19 जनवरी को समाप्त हुआ।19 जनवरी को ही हवन-यज्ञ के कार्यक्रम हुए तथा रात्रि के समय रस्म-ए-मेंहदी एवं सूफ़ी संगीत की शाम आयोजित की गई। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के अंतर्गत् उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एजज़ेडसीसी) पटियाला ने पहली बार राम दरबार के आयोजन में अपना सहयोग देते हुए अपनी सहभागिता बनाई। देश के मशहूर पंजाबी सूफ़ी गायक मानक अली द्वारा 19 जनवरी की रात्रि में प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम एनज़ेड सीसी द्वारा प्रायोजित रहा। साप्ताहिक समागम का अंतिम दिन अर्थात् 20 जनवरी को सुबह श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा का भोग डाला गया तथा भजन-कीर्तन संपन्न हुआ। सायंकाल झंडा रस्म अदा की गई तथा दरबार के प्रति आस्था रखने वाले विभिन्न धर्मस्थलों  के श्रद्धालुओं व भक्तों द्वारा झंडे भेंट किए गए। इसी दिन रात्रि के आयोजन में टीवी गायिका नीलम शर्मा द्वारा फ़रियाद पढ़ी गई। इसके पश्चात देश के प्रसिद्ध बांसुरी वादक उस्ताद मुजतबा हुसैन द्वारा अपनी संगत के साथ बांसुरी की धुन बजाकर अपनी श्रद्धाजलि पेश की गई। 20 जनवरी को ही सारी रात कव्वालियों का सिलसिला भी चलता रहा जिसमें रज़मी कव्वाल एंड पार्टी मुज़ फ़रनगर तथा सलीम कव्वाल एंड पार्टी मलेरकोटला के अतिरिक्त और भी कई कव्वाल पार्टियों ने अपना नज़राना पेश किया। इस पूरे सप्ताह के आयोजन के दौरान आम लोगों के लिए लंगर भंडारा तथा जलपान आदि की पूरी व्यवस्था की गई थी।

                इस पूरे आयोजन में सभी धर्मों के लोगों का एक साथ मिल-बैठ कर किसी धार्मिक समागम में शिरकत करना जहां अपने-आप में न केवल एक अनूठा प्रयास है बल्कि यह इस समय पूरे देश व दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत भी है। आज जहां हमारे देश में अनेक ऐसी शक्तियां सक्रिय हैं जो लोगों को धर्मों व जातियों के नाम पर लड़वा रही हैं। मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारे व गिरिजा घरों के अलग-अलग ईष्टों के अलग-अलग मानने वालों के अलग-अलग धर्मस्थान प्रमाणित करने पर आमादा हैं वहीं शहज़ादा पप्पू सरकार की गद्दीनशीनी में संचालित होने वाला राम दरबार भारत का एक ऐसा गौरवपूर्ण स्थान है जहां आपको हर समय हर धर्म व समुदाय के लोग पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ अपने शीश झुकाते हुए देखे जा सकते हैं। राम दरबार एक ऐसा स्थान है जहां विभिन्न धर्मों,आस्थाओं तथा विश्वासों को लेकर टकराव अथवा विवाद की बात नहीं होती बल्कि यहां मानवता का संदेश दिया जाता है। धर्म की रूढ़ीवादी मान्यताओं से अलग हटकर मानवता प्रेम,सद्भाव तथा परस्पर भाईचारे को सबसे अधिक अहमियत दी जाती है। राम दरबार के भक्तगण एक-दूसरे के खाने,पहनने,उसके धार्मिक पूर्वाग्रहों पर न तो चर्चा करना चाहते हैं न ही इन्हें विवाद अथवा चर्चा का विषय समझते हैं।

                शहज़ादा पप्पू सरकार इस आयोजन के संबंध में फ़रमाते हैं कि चूंकि मानवता धर्म से कहीं ज़्यादा बड़ी चीज़ है इसलिए सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्म के उसी स्वरूप को मानना चाहिए तथा उन बातों पर अमल करना चाहिए जो हमें मानवता, प्रेम,सद्भाव,सहयोग तथा भाईचारे की सीख देती हों। यदि किसी भी धर्म का मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिकता का चोला लपेटकर समाज में ज़हर फैलाए,समाज को धर्म के नाम पर विभाजित करने की कोशिश करे,देश को धर्म व जाति के नाम पर तोड़ने की कोशिश करे,धर्म के नाम पर हिंसा,आगज़नी,हत्याएं तथा लूटपाट को प्रोत्साहित करे ऐसा व्यक्ति धार्मिक कहने योग्य ही नहीं है। देश के अमनपसंद लोगों को ऐसे फ़िरकापरस्त व सांप्रदायिकतावादी,लोभी,स्वार्थी,दुराचारी तथा व्याभिचारी किस्म के तथाकथित स्वयंभू धर्मगुरुओं से दूर रहना चाहिए। और एक सच्चे व अच्छे इंसान को हमेशा यही कोशिश करनी चाहिए कि वह प्रत्येक माध्यम से मानवता व भाईचारे  की शमा रौशन करने में ही अपना जीवन बसर करे।



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