टैम्पों में लगी हेडलाइट के समान लोगों को दिशा दिखाती है पत्रकारिता: नीलेश उत्पल
| By- Reeta Vishwakarma - Jan 26 2018 3:38PM

इण्डिया की डेमोक्रेसी में पत्रकारिता (मीडिया) को चौथा खम्भा कहा जाता है। किसी इमारत की मजबूती इसी में होती है कि उसके सभी खम्भे ठीक-ठाक हों। पत्रकारिता के बारे में हर किसी का अपना-अपना नजरिया व सोच है। हम भी मीडिया से हैं। पत्रकारिता को मिशन मानकर इसकी पूजा करते हैं। ऐसे में पत्रकारिता के बारे में लोगों की राय जानने/सुनने की जिज्ञासा बनी रहती है। जिसकी शान्ति के लिए जानकारों/समीक्षकों व वरिष्ठ विद्यावानों के सम्पर्क में जाना पड़ता है।

इसी क्रम में हमने अम्बेडकरनगर जिले के पूर्ति अधिकारी नीलेश उत्पल से मिलकर पत्रकारिता व पत्रकारों के बारे में उनकी राय जानने का प्रयास किया। उनके चैम्बर में कार्य दिवस अवसर पर अपरान्ह पहुँचे और उनको अपना मन्तव्य बताया। पहले तो वह इस पर गम्भीर नहीं थे बाद में काफी आग्रह उपरान्त उन्होंने कुछ बातें ऐसी कीं, जिसको हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के लोकतन्त्र में न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और पत्रकारिता चार स्तम्भ हैं, जिसमें उनका यह मानना है कि पत्रकारिता यानि मीडिया सर्वोपरि है। वह इसलिए कि पत्रकारिता द्वारा दिखाये गए मार्ग पर पूरी व्यवस्था संचालित होती है। नीलेश उत्पल ने कहा कि भारत का लोकतन्त्र एक प्रकार से टेम्पो वाहन है जिसमें तीन पहिये होते हैं जिन्हें हम न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका कह सकते हैं और उसके आगे लगी हेडलाइट रूपी पत्रकारिता पूरे टेम्पो के सुचारू संचालन में पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाती है।

उनकी बातें सुनकर बड़ा अच्छा लगा और कुछ जानने समझने का मन हो आया। आगे पूछा गया कि पत्रकारिता के बारे में अब तक आपका क्या अनुभव रहा है। उसे अवश्य ही शेयर करें। इस पर उत्पल ने कहा कि छात्र जीवन से लेकर अब उनका उठना-बैठना पत्रकारों के बीच ही रहा है। वह जब जौनपुर में इसी पद पर कार्यरत थे तब वहाँ के सभी मीडिया परसन्स उनकी फ्रेन्ड सर्किल में थे और सभी उनके विभागीय कार्यों के प्रशंसक भी थे। उन्होंन कहा कि अजीब संयोग ही रहा कि इतना सब होते हुए भी वहाँ के बस एक अखबार के पत्रकार बन्धु मुझसे असन्तुष्ट थे। हालांकि मैंने उनका कभी विरोध नहीं किया। वो अपना काम करते रहें और मैं अपना।

मेरे अब तक के कार्यकाल में मीडिया जगत से जुड़े इस जिले के लोगों ने काफी कॉआपरेट किया है और कर रहे हैं। विभाग व इससे सम्बन्धित अन्य दूर-दराज क्षेत्रों की खबरों का प्रकाशन करने के पूर्व खामियों और समस्याओं के समाधान सम्बन्धी गुफ्तगू करके हमारा पक्ष भी जानते हैं। बड़ा अच्छा लगता है कि वे लोग ऐसा करते हैं। इससे हमको हमारी कार्य पद्धति व खामियों के बारे में जहाँ पता चलता है वहीं दूसरी तरफ हम सक्रिय होकर ससमय विभागीय कार्यों सम्बन्धी खामियों को दूर करने का हर सम्भव प्रयास करते हैं। डी.एस.ओ. नीलेश उत्पल ने कहा कि इस जिले के पत्रकार धनात्मक, सकारात्मक व रचनात्मक पत्रकारिता करते हैं जो प्रशंसनीय है।

कोटा, कोटेदार, एपीएल, बीपीएल, अन्त्योदय, खाद्य/रसद विभाग, धांधली, अनियमितता से सम्बन्धित खबरें तो प्रायः छपती ही रहती हैं लेकिन जिलापूर्ति अधिकारी और उनका मीडिया के प्रति नजरिया प्रकाशित करना इसलिए भी आवश्यक हो गया क्योंकि इस साक्षात्कार में उन्होंने मीडिया को गम्भीरता से लिया था, जो भी कुछ कहा वह उत्साहवर्द्धक ही रहा। डी.एस.ओ. नीलेश उत्पल एक अत्यन्त सुलझे और विभागीय कार्यों में दक्ष अधिकारी तो माने ही जाते हैं साथ ही इनमें सामाजिक सरोकारों के प्रति भी सजगता देखी जाती है। गौरवर्णीय, अर्द्धकेशाच्छादित सिर और दैदीप्यमान मुखमण्डल वाले नीलेश के चर्चे प्रबुद्ध वर्गीय लोगों में होना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है।

पाठकों यह साक्षात्कार 25 जनवरी 2018 को अपरान्ह 2.30 से 4 बजे के बीच का है। उस समय डी.एस.ओ. उत्पल अपनी कुर्सी पर विराजमान थे सामने पड़ी कुर्सियों पर मिलने वालों की भीड़ थी। रेनबोन्यूज के अलावा एक टी.वी. चैनल के पत्रकारबन्धु भी वहाँ उपस्थित थे। इसी बीच बाहर से चाय और बिस्किट लेकर जलपान की दुकान से एक नवयुवक आया। वहाँ बैठे लोगों ने नीलेश के आग्रह पर चाय की चुस्कियाँ लिया। यह आग्रह ठीक उसी अन्दाज में किया गया जैसे बॉलीवुड के प्रख्यात अभिनेता फारूख शेख अपनी अदायगी में किया करते थे। यहाँ दिए गए उनके छायाचित्र से लोगों को यह पता ही चल जाएगा कि यहाँ फारूख शेख का जिक्र क्यों किया गया।



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