फिल्म पद्मावत के बारे में डॉ. रैना के विचार
| Rainbow News - Jan 26 2018 4:32PM

ऐसा तो नहीं हैं कि फ़िल्म सेंसर बोर्ड ने कभी किसी फिल्म पर रोक न लगाई हो।चौदह फिल्मों पर अब तक यह बंदिश डाली जा चुकी है। जन-भावनाएं अगर फ़िल्म पद्मावती के विरोध में खड़ी हैं तो बात तो कुछ होगी ही वैसे ही जैसे "सैटेनिक वर्सेज"में कोई बात थी। उच्च न्यायालय का फैसला अपनी जगह और जनता का आक्रोश अपनी जगह। अब एक ही रास्ता बचा है कि दर्शक स्वयं अपने विवेक का प्रयोग करें।

एक तरफ माता समान रानी पद्मावती के बलिदान की शौर्यगाथा जिसने अपने कुल-शील की मर्यादाओं का पालन करते हुए किसी गैर मर्द के सामने आत्म-समर्पण करने से आग में कूद जाना श्रेयस्कार समझा और दूसरी तरफ उसके इस अभूतपूर्व और लोमहर्षक त्याग और बलिदान को रागरंग में भुनाकर फ़िल्म निर्माता द्वारा धनार्जन की महती लिप्सा। पैसे से जनित रागरंग बड़ा या फिर पतिपरायण भारतीय नारी के प्रति हमारा सम्मान-भाव बड़ा ?निर्णय हमको लेना है।

-डॉ. शिबेन कृष्ण रैणा



Browse By Tags



Other News