तो तलवारों के दम पर ही ख़िलजी को नाप दिए होते
| Dr. Anil Upadhyay 'Mela' - Jan 27 2018 5:22PM

हृदय कुंज क्षत्रिय निष्ठा मे,
पद्मावती का बास हुआ!
रानी की क़ाबिलियत का
चलो आज एहसास हुआ.

छत्रिय समाज के कुंवर सुनों -
तुम तभी साथ गर हो जाते....
इतिहास नहीं ग़ाली देता अपने कल पर न शरमाते!

झॉसी का अंत नहीं होता
मेंवाड़ राज भी इतराता.!
जयचंदी चालों में फंसकर
राणा भी घास नहीं खाता.!

सरकारों से भी कहना है- भंसाली जी को समझाओ.
चिंगारी दबी ही रहने दो-
शोलों जैसा मत भड़काओ.

गु़ज़रे कल पर मत शोर करो ...
बीती बातों को रहने दो .
रानी ज्ञानी थी ,जौहर लीं-
बकने वालों को, बकने दो.

जौहर के पल में यदि क्षत्रिय .
रानी का साथ दिए होते .
तो तलवारों के दम पर ही ख़िलजी को नाप दिए होते.

हिंदू मुस्लिम की बात नहीं, जु़ल्मी की बात मैं करता हूं
पर नारी के प्रति मोह जगे ऐसे पचरे से डरता हूं..!

वामन मेश्राम भी ख़िलजी है.
सड़कों पर गा़ली बकता है.
ब्राह्मणों और मंत्री जन को फांसी देने को कहता है...

जो संविधान को ना मानें आतंकी है, अपवादी है.
मनुवाद शब्द से, घात करें क्या वह मानवतावादी है?



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