बच्चे रहें फरार...
| Rainbow News - Jan 29 2018 12:41PM

लफड़े दिन पर दिन बढ़े, प्राइमरियों मे यार।

बिल्डिंग है, टीचर नही, बच्चे रहें फरार।

बच्चे रहें फरार, न खाना हो चौके पर।

दर्ज तीन सौ, पर तेंतिस, मिलते मौके पर।

कहते कवि ' राकेश', प्रधान मास्टर से झगड़े।

कनवर्जन की कास्ट, कराए सारे लफड़े।

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विदा हो जिंदगी जालिम

रुलाती है कभी यारा, हंसाती है, कभी जालिम।

लगा देती, कभी उस पार, या देती डुबा जालिम।

दिलों के तार, पर दिल से, रखो' राकेश' यूं बांधे।

न जाने कब, सजे अर्थी, विदा हो जिंदगी जालिम।।



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