भाव अनमोल बताता है बिछौंनें वाला
| Dr. Anil Upadhyay 'Mela' - Jan 30 2018 11:58AM

खुद से सीखे हैं हुनर
ढूंढकर ज़रायम के
फिर भी बदनाम हुआ
हाय मदरसे वाला।

अब कभी फ़ाक़ाकशी उसको रुलाएगी नहीं
बम बनाने लगा
मिट्टी के खिलौने वाला।।

जु़र्म को देते हैं शह
पहन के वर्दी जब-जब
जांच के घेरे में आते हैं
वो अफ़सर आला।

जब हवालातों में मरने का
चलन चल ही पड़ा..
यूं ही क़ैदी नहीं भगते हैं-तोड़कर ताला।।

मख़मली बिस्तरों पे
नींद ना आएगी मुझे
भाव अनमोल बताता है बिछौंनें वाला।



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