अरहर की फसल पर रखे कीटों की निगरानी समय से करे प्रबंधन : डॉ रवि प्रकाश मौर्य
| Rainbow News - Jan 31 2018 3:07PM

अरहर की फसल में इस समय फूल आए हुए हैं तथा फलियाँ आनी भी प्रारम्भ हो गई है, इस समय किसान भाइयों को विशेष रुप से फली छेदक कीट एवं फल की मक्खी कीट पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसकी निगरानी समय-समय पर किसान भाई करते रहे। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पाँती, अंबेडकरनगर के  कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि फली छेदक कीट अरहर की फसल को 20 से 30% तक हानि पहुंचाता है। अधिक अनुकूल वातावरण मिलने पर इसके प्रकोप से पूरी फसल नष्ट हो जाती है।

शरद ऋतु के बाद फरवरी और मार्च में तापमान बढ़ने के साथ-साथ फली छेदक कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। व्यस्क सूडी़ अरहर की फलियों में छेद करके दानों को भारी नुकसान पहुंचाती है। प्रायः किसान इस कीट के प्रकोप को उस समय समझ पाते है, जब सूड़ी बड़ी होकर अरहर की फसल को 5 से 7 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा चुकी होती है। इस अवस्था में फली छेदक कीट का नियंत्रण कर पाना काफी कठिन होता है। इस कीट के निगरानी के लिए 2 फेरोमेन ट्रेप प्रति बीघा की दर से खेत में लगाएं। प्रबंधन हेतु 350 ग्राम बी.टी. 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करे। या इमामेक्टीन बेन्जोएट 5 एस.जी. 80 ग्राम को 250 लीटर पानी या। इन्डेक्सोकार्ब 15.8ई.सी. 125 मिली को 250 लीटर पानी मे घोल कर प्रति बीघा मे छिड़काव करे। अरहर का दूसरा प्रमुख कीट फली मक्खी है। देर से पकने वाली अरहर की फसल को नुकसान पहुंचाता है।

इस हानिकारक कीट की सभी अवस्थाएं फली के अंदर ही होती है ।इस कारण फसल की हानि का सही अनुमान फसल की कटाई पिटाई होने पर ज्ञात होता है। इसलिए इसका प्रबंधन अपेक्षाकृत कठिन होता है किसान भाई फलीं को तोड़कर उन्हें चीर कर अच्छी तरह से देखें तो उसमें कीट दिखाई पड़ता है। फली पर गोल छेद भी दिखाई पड़ता है। फली की मक्खी के नियंत्रण के लिए एसीफेट 75 एस.पी. 250 ग्राम, 2.5 कि ग्राम गुड़, 250 लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड 17.5 एस. एल  250मिली, 2.50 किग्रा. गुड़, 250 लीटर पानी मे घोल कर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करे।



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