गर्मी में भिंडी की बुआई का सही समय फरवरी से मार्च : डा. रवि प्रकाश मौर्य
| Rainbow News - Feb 10 2018 11:32AM

भिंडी के हरे एवं मुलायम फलों का प्रयोग सब्जी, सूप, फ्राई तथा अन्य रूप में किया जाता है। आज कल भिंडी की कैनिंग और फ्रीजिंग भी की जा रही है। पौधों का तना एवं जड़, गुड़ एवं खाँड बनाते समय रस साफ करने के काम में प्रयोग किए जाते हैं। इसके रेशे में रस्सियाँ बना सकती हैं तथा डठलों को कागज बनाने काम में प्रयोग किया जाता है। नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पाँती अंबेडकर नगर के कार्यक्रम समन्वयक डॉ.रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि भिंडी की खेती के लिये जल निकास वाली दोमट भूमि सबसे अच्छी होती है।

एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई कर दो तीन बार हैरो से जुताई कर खेत तैयार करे। जायद में अच्छे जमाव के लिये बीज को बोने के 10 से 12 घंटे पहले  पानी में भिगोना लाभदायक है। फरवरी में समान्यतः बीज जमाने में 10 से 12 दिन का समय लगता है। बुआई 30 सेमी की दूरी पर कतारों में की जाती है। एक पौधे से दूसरे पौधे का अंतर 20 से 30 सेंटीमीटर भी रखते हैं। भूमि मे नमी कम हो तो पहले पलेवा करना आवश्यक है।जिसे जमाव अच्छा हो सके। भिंडी की प्रमुख प्रजातियां अंकुर- 41, परभनी क्रांति, अर्का अभय,  बीआरओ -5, बीआरओ -6, काशी लालिमा है।

गर्मी के मौसम में प्रति विश्वा 200 से 250 ग्राम बीज लगता है। खेत तैयार करते समय प्रति विश्वा 2.50 कुंटल गोबर की सड़ी खाद देना चाहिये। बुआई के पूर्व सिंगल सुपर फास्फेट 5 किलोग्राम, यूरिया 1 किलोग्राम,म्यूरेट आफ पोटाश 1 किग्रा प्रति विश्वा की दर से प्रयोग करे। बुआई के 30 व 50 दिन बाद एक-एक किग्रा. यूरिया की टापडेसिंग करे। पर्याप्त नमी न होने पर बुआई के तुरन्त बाद सिंंचाई करे। मार्च मे 10-12 दिन, अप्रेल मे 7-8 दिन, मई-जून मे4-5 दिन के अन्तर पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करे। भिंडी में जैसिड कीट का प्रकोप होता है। जिसके शिशु एवं प्रौढ.पत्तियों और नरम भागो से रस चूुसते है, जिसके फलस्वरुप पत्तियां मुड़ जाती है।

इसके नियंत्रण के लिए मैलाथियान 2 मिली मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़़काव करें ।तना एवं फल छेदक कीट का प्रकोप होता है इस कीट की सुड़ी सफेद रंग कीहोती है। सूड़िया तने एवं फलों में छेद करके क्षति पहुंचाती है जिसके फलस्वरुप तने में फूल मुरझा कर गिर जाते हैं। कीट ग्रसित भागों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। तथा क्लोरोपायरीफॉस 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। भिंडी की तुड़ाई फूल खिलने के 6 से 7 दिन बाद की जाती है। केवल उन्हीं फलों को तोड़ना चाहिए जो नरम हो और जिनके सिरा थोड़ा सा ही मोड़ने  पर टूट जाए। सिद्धांतः हर 3 से 4 दिन के अंतर पर फल तोड़ने योग्य तैयार हो जाते हैं। भिंडी की उपज प्रति विश्वा एक से डेढ़ कुंतल प्राप्त होती है।



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