येरूशलेम पर ट्रंप का बयान....कहीं तीसरे विश्वयुद्ध की आहट तो नहीं?
| -Jagjeet Sharma - Feb 12 2018 3:22PM

क्या येरुशेलम तीसरे विश्वयुद्ध का कारन बन सकता है? ये समझने के लिए ये जानना जरुरी है कि क्या है येरुशेलम का इतिहास और क्यूँ है ये इतना विवादित। बाइबिल में इस शहर का नाम 700 बार आता है। यहूदी और ईसाई मानते हैं कि यही धरती का केंद्र है। राजा दाऊद और सुलेमान के बाद इस स्थान पर बेबीलोनियों तथा ईरानियों का कब्जा रहा फिर इस्लाम के उदय के बाद बहुत काल तक मुसलमानों ने यहाँ पर राज्य किया। इस दौरान यहूदियों को इस क्षेत्र से कई दफे खदेड़ दिया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसराइल फिर से यहूदी राष्ट्र बन गया तो यरुशलम को उसकी राजधानी बनाया गया और दुनिया भर के यहूदियों को पुनः यहाँ बसाया गया। यहूदी दुनिया में कहीं भी हों, येरुशलम की तरफ मुँह करके ही उपासना करते हैं। भूमध्य सागर और मृत सागर के बीच इसराइल की सीमा पर बसा येरुशलम एक शानदार शहर है। शहर की सीमा के पास दुनिया का सबसे ज्यादा नमक वाला डेड सीयाने मृतसागर है। कहते हैं यहाँ के पानी में इतना नमक है कि इसमें किसी भी प्रकार का जीवन नहीं पनप सकता और इसकेपानी में मौजूद नमक के कारण इस में कोई डूबता भी नहीं है।

मध्यपूर्व का यह प्राचीन नगर यहूदी, ईसाई और मुसलमान का संगमस्थल है। उक्त तीनों धर्म के लोगों के लिए इसका महत्व है, इसीलिए यहाँ पर सभी अपना कब्जा बनाए रखना चाहते हैं। जेहाद और क्रूसेड के दौर में सलाउद्दीन और रिचर्ड ने इस शहर पर कब्जे के लिए बहुत सारी लड़ाइयाँ लड़ी। ईसाई तीर्थ यात्रियों की रक्षा के लिए इसी दौरान नाइट टे पलर्स का गठन भी किया गया था। इसराइल का एक हिस्सा है गाजापट्टी और रामल्लाह। जहाँ फिलिस्तीनी मुस्लिम लोग रहते हैं और उन्होंने इसराइल से अलग होने के लिए विद्रोह छेड़ रखा है। ये लोग यरुशलम को इसराइल कब्जे से मुक्त कराना चाहते हैं। अंततः इस शहर के बारे में जितना लिखा जाए कम है। काबा, काशी, मथुरा, अयोध्या, ग्रीस, बाली, श्रीनगर, जाफना, रोम, कंधहार आदि प्राचीन शहरों की तरह ही इस शहर का इतिहास भी बहुत महत्व रखता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने येरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे दी है। साथ ही उन्होंने विदेश मंत्रालय को आदेश दिया है कि अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानातंरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। कई अरब देशों के नेताओं ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से पहले से ही संवदेनशील पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की चेतावनी दी है।

ट्रंप ने 2016 में अपने चुनाव अभियान के दौरान इसका वादा किया था। अरब नेताओं ने चेताया कि इस फैसले से पश्चिम एशिया और दूसरी जगहों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘अमेरिकी सरकार यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे है। वह इसे ऐतिहासिक वास्तविकता को पहचान देने के तौर पर देखते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यरुशलम प्राचीन काल से यहूदी लोगों की राजधानी रहा है और आज की वास्तविकता यह है कि यह शहर सरकार, महत्वपूर्ण मंत्रालयों, इसकी विधायिका, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र है।’ एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कदम उठाने के साथ ट्रंप अपना एक प्रमुख चुनावी वादा पूरा करेंगे। पूर्व में राष्ट्रपति चुनाव के कई उ मीदवार यह वादा कर चुके हैं। सऊदी अरब के शाह सलमान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देलफतेहअल-सिसी ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को लेकर चेतावनी दी है। सलमान ने इसे एक ‘खतरनाक कदम’ बताते हुए आगाह किया कि इससे ‘दुनिया भर में मुस्लिमों की भावनाएं भड़केंगी’। वहीं सिसी ने कहा कि इससे स्थिति जटिल हो जाएगी और ‘पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाएं खतरे में पड़ जाएंगी।’

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ट्रंप की योजना की आलोचना करते हुए कहा कि यह ‘गलत, अवैध, भड़काऊ और बेहद खतरनाक’ है। जॉर्डन के शाहअब्दुल्ला द्वितीय ने कहा कि येरूशलम पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पोप फ्रांसिस ने भी इस कदम को लेकर ‘गंभीर चिंता’ जताई और संयुक्तराष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप शहर की यथास्थिति का स मान करने की प्रतिबद्धता जताने की अपील की। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने बुधवार को जेरुसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में अमेरिका द्वारा मान्यता दिए जाने के फैसले की निंदा की और यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि यह सभी अंतर्राष्ट्रीय और द्विपक्षीय प्रस्तावों का उल्लंघन करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेरुसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद और अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से जेरुसलम स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए विदेश विभाग को निर्देश दिए जाने के बाद अब्बास ने फिलिस्तीन के आधिकारिक टेलीविजन पर लाइव प्रसारण में यह बात कही।

अब्बास ने कहा कि इस मामले में इजरायल को कोई भी रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जेरुसलम फिलिस्तीन की शाश्वत राजधानी है। फिलिस्तीनी चाहते हैं कि भविष्य में पूर्वी जेरुसलम स्वतंत्र फिलिस्तीन की राजधानी बने, जबकि इजरायल चाहता है कि जेरुसलम का सभी भाग इजरायल की राजधानी रहे। अब्बास ने कहा जेरुसलम पर अमेरिका के निर्णय के बाद हमारा राष्ट्रीय फिलिस्तीनी मुद्दा दोराहे पर आ गया है। उन्होंने कहा फिलिस्तीनी एकजुट रहेंगे और जेरुसलम, शांति और स्वतंत्रता की रक्षा करने और राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करने कामयाब होंगे। मामले की गंभीरता को समझते हुए येरुशेलम के इस विवाद को उठाया गया जहाँ ट्र प को मुँह की खानी पडी। भारत ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के इस विवादित फैसले का विरोध करते हुए प्रस्ताव के विपक्ष में वोट किया।जिसके बाद  येरुसलम की यथास्थिति बनाये रखने का फैसला लिया है। फिलहाल इस विवाद पर एक विराम लगा दिया गया है पर ट्र प और नेतन्याहू आगे भी पूरी कोशिश करते रहेंगे येरुशेलम को इजराइल की राजधानी बनाने के लिए।



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