कर बहियाँ बल आपने, छाड़ पराई आस
| Rainbow News - Feb 26 2018 4:27PM

मेरे गाँव में चाँदसी दवाखाना वाले बंगाली डॉक्टर भगन्दर के सर्वोत्तम इलाज के लिए जिले में प्रसिद्ध हैं। लोगों के हिसाब से वह भगन्दर विशेषज्ञ हैं। वह चाहते भी यही है कि उनके पास केवल भगन्दर के रोगी ही आवें किन्तु उनकी प्रसिद्धि के कारण उनके पास छोटी-मोटी फुन्सी या बवासीर के रोगी बड़ी संख्या में पहुँच जाते हैं। वह आदतन पहले उसे भगन्दर में तफदील करते हैं और जब सचमुच भगन्दर हो जाता है तब उसका इलाज कर उसे पूर्णतः स्वस्थ कर देते हैं।

शासन प्रशासन की स्थिति भी बंगाली डॉक्टर जैसी ही है। सबका मानना है कि वह कानून व व्यवस्था की स्थिति को बहुत अच्छे ढंग से संभाल सकते हैं। यह भी हमेशा यही चाहते है कि इनके सामने लायी गयी हर समस्या कानून व्यवस्था को चुनौती देने लायक हो। अगर नहीं है तो यह उसे उस लायक बना देने में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग करते हैं या फिर उसे नजरअंदाज कर उसके बन जाने का इन्तजार करते हैं और जब स्थिति बिगड़कर कानून व्यवस्था पर भारी पड़ने लगती है तब शासन प्रशासन उसे नियंत्रित करता है, भले ही उसे गोलियाँ चलाने जैसी कठोरतम कार्यवाही ही क्यों न करनी पड़े।
    शासन-प्रशासन और हमारे बंगाली डॉक्टर में अन्तर यह है कि वहाँ डॉक्टर के प्रयास से वह मरीज भला चंगा हो जाता है और यहाँ शासन-प्रशासन की कार्यवाही से नये रोग पनप जाते हैं।

वैसे भी शासन-प्रशासन की परिभाषा है कि वह बड़ी-बड़ी समस्याओं से जूझे। यदि शुरूआती अवस्था में जनसमस्याओं का निदान हो जाये तो ऊपर बैठेे लोग क्या करेंगे और फिर जनता के बीच आकर वह कैसे बता पायेंगे कि जब मैं आया तो मैंने यह किया, मैंने वह किया। चमत्कार तो यह है कि शासन-प्रशासन की इस मंशा को निचले स्तर के अधिकारी-कर्मचारी भी खूब बूझते-समझते हैं इसलिए किसी भी छोटी से छोटी जनसमस्या का कहीं निचले स्तर पर ही समाधान न हो जाये इसके लिए अपना पूरा का पूरा दिमाग खपा डालते हैं। यह वहीं अधिकारी कर्मचारी हैं कि जब ऊपर बैठे लोग उड़नखटोले से उनके गाँव या शहर विकास की गति नापने आ रहे होते हैं तो सड़क, पानी, बिजली, साफ-सफाई आदि की सभी समस्याओं का निदान रातो-रात अपने जादू से कर दिखाते हैं।

यह निर्विवाद है कि नाली, खडंजा, पगडंडी, बारजा, रास्ता आदि के छोटे-छोटे विवाद यदि तत्काल नहीं निपटाये जाते है तो कालान्तर में यही बड़ी-बड़ी घटनाओं को जन्म देते हैं। ऐसे मसलों पर हम सभी को चेतना होगा कि इनका निदान आपसी समझौते यदि हम दूसरों पर आश्रित रहने के बजाय अपना रास्ता स्वयं खोजे तो अपने साथ-साथ देश का भी भला कर पायेंगे।

-महात्मा गाँधी

से स्वयं हल करने का प्रयास करें। जिसके त्वरित निदान के लिए तहसील दिवस, लोक अदालत आदि सुगम विकल्प मौजूद हैं। जहाँ ऐसे मामलों का सौहार्दपूर्ण तरीके से हल किया जाता है।

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार जिला गाजीपुर के सातों तहसील मुख्यालय पर विभिन्न जनसमस्याओं से सम्बधित लोगों द्वारा 521 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें मात्र 23 की समस्याओं का तत्काल निदान सम्भव हो सका। समस्याओं के निदान की यह गति चिन्तनीय है।  हालांकि इस निदान की गति बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी गाजीपुर के. बालाजी ने सम्बन्धित अधिकारियों को सचेत करते हुए निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के अन्दर प्राप्त आवेदनों का निस्तारण कर उन्हें सूचित किया जाये।

इतिहास गवाह है कि विश्व में एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी इस प्रकार अनेक सभ्यताओं का जन्म हुआ। यह सभ्यताएं फली-फूली और कालान्तर में रिसर्च का विषय बनी। एक अच्छे समाज के लिए हम सभी को बहुत कुछ से बचना होगा, बहुत कुछ बचाना होगा। राष्ट्रपिता ने भी कहा था कि यदि हम दूसरों पर आश्रित रहने के बजाय अपना रास्ता स्वयं खोजे तो अपने साथ-साथ देश का भी भला कर पायेंगे।

-शिवेन्द्र कुमार पाठक, स्वतंत्र पत्रकार, गाजीपुर, मो0- 9415290771



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