14 मार्च को लखनऊ में बिजली कर्मचारियों की विशाल रैली
| Rainbow News - Mar 12 2018 12:03PM

इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2014 एवं निजीकरण के विरोध में रैली

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र ने  इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2014 एवं निजीकरण के विरोध में  14 मार्च को लखनऊ में बिजली कर्मचारियों की विशाल रैली निकालने का निर्णय लिया है साथ ही  चेतावनी दी है कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2014 पारित करने की एकतरफा कोशिश हुई तो प्रदेश के तमाम बिजली कर्मचारी और इंजीनियर विरोध स्वरुप उसी दिन हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे।

समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय , सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद, बिपिन प्रकाश वर्मा, राजेंद्र घिल्डियाल, पवन श्रीवास्तव, भगवान मिश्र, पूसे लाल , ए के श्रीवास्तव, महेंद्र राय, शशिकांत श्रीवास्तव, पी एन तिवारी, करतार प्रसाद, शम्भू रत्न दीक्षित, के एस रावत, आर एस वर्मा की आज यहाँ हुई बैठक में 14 मार्च को लखनऊ में होने वाली रैली और सात जिलों के निजीकरण की कार्यवाही के विरोध में हड़ताल की रणनीति तय की गयी| संघर्ष समिति  ने बताया कि  विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने  प्रदेश सरकार और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को नोटिस भेज कर 14 मार्च को लखनऊ में विशाल रैली करने और इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2014 को पारित करने की एकतरफा कोशिश के विरोध में हड़ताल करने की सूचना दे दी है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 14 मार्च को प्रातः 11ः00 बजे हाईडिल फील्ड हाॅस्टल, लखनऊ से रैली प्रारम्भ होकर शक्ति भवन, मुख्यालय तक जायेगी और शक्ति भवन पर प्रदर्शन व् विरोध सभा की  जायेगी । समिति की मुख्य मांगे बिजली निगमों का एकीकरण कर उ प्र राज्य विद्युत परिषद लि का पुर्नगठन करना, इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2014 को वापस लेना, सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन गृहों का नवीनीकरण/उच्चीकरण करना और निजी घरानों को मंहगी बिजली खरीदने हेतु सरकार क्षेत्र के बिजली घरों को बंद करने की नीति समाप्त करना, बिजली कर्मियों की वेतन विसंगतियों का निराकरण करना, वर्ष 2000 के बाद भर्ती हुए सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेन्शन प्रणाली लागू करना और सभी श्रेणी के समस्त रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करना, भर्ती में संविदा कर्मियों को वरीयता देना और भर्ती होने तक संविदा कर्मियों को सीधे भुगतान करना मुख्य है।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का समिति पुरजोर विरोध जारी रखेगी और जिस दिन बिल सदन में रखा जायेगा उसी दिन विरोध स्वरुप प्रदेश भर के बिजली कर्मी एक दिन की हड़ताल/कार्य बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल में बिजली वितरण और विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस अलग अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत् आपूर्ति कम्पनियाँ बनाने का प्राविधान है द्य बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने (यूनिवर्सल पावर सप्लाई ऑब्लिगेशन ) की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा द्य स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कम्पनियाँ मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप , गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी  और घाटा उठाएगी।

उन्होंने कहा कि निजी घरानों पर अति निर्भरता की गलत ऊर्जा नीति का ही नतीजा है कि उप्र की बिजली वितरण कंपनियों का कुल घाटा 77 हजार करोड़ रु से अधिक हो गया है जो विद्युत परिषद के विघटन के समय मात्र 77 करोड़ रु था। स्पष्टतया घाटे के नाम पर बिजली बोर्ड के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। इसीलिए अब समय की आवश्यकता  है कि ऊर्जा क्षेत्र में नये-नये प्रयोग करने के बजाय उप्र राज्य विद्युत परिषद लि का पुर्नगठन किया जाये। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य का विषय है किन्तु यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल पारित हो गया तो बिजली के मामले में केंद्र का वर्चस्व बढ़ेगा और राज्यों की शक्ति कम होगी इस दृष्टि से भी जल्दबाजी करने के बजाये संशोधन बिल पर राज्य सरकारों, बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों की राय ली जानी चाहिए।

-शैलेन्द्र दुबे, संयोजक, 9415006225



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