सड़क जाम के मुद्दे पर उच्च न्यायालय का निर्देश
| -Shivendra Kumar Pathak - Mar 17 2018 11:48AM

उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार के लिए निर्देश जारी किया है कि सरकार सुनिश्चित करे कि ट्रैफिक जाम में फँसकर किसी मरीज की मृत्यु न हो। यदि यातायात में मरीज को नुकसान पहुँचता है तो उसे अपराध की संज्ञा देते हुए तदानुसार कार्यवाही करें। सरकार आम जन को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए हर सम्भव उपाय करे। हाईकोर्ट ने सरकार को यह निर्देश स्नेहलता सिंह तथा राजकुमार सिंह द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।

जाम में जकड़ा रहा शहर/जाम में घंटों फंसे लोग/बार-बार जाम लगने से क्षुब्ध आमजन/गम्भीर होती जा रही है जाम की समस्या/सड़क पर जाम/हवा में धुंआ और फेफड़ों में कैन्सर/जाम में फंसे एम्बुलेन्स में मरीज ने दम तोड़ा/जाम में फंसे स्कूली बसों में गर्मी से तड़पते बच्चे/विलखते बच्चे/जाम समस्या से आमजन हलकान/नहीं दिख रहा कोई समाधान जैसे शीर्षकों से पटे समाचारों को लाइन बाई लाइन पड़ने वाले लोग भी घर से बाहर निकलते ही बन जाते है जाम का हिस्सा और फिर यह जिम्मेदार लोग भी जाम में फंसकर विवशतापूर्वक बन जाते है मूकदर्शक। तब क्षण-प्रतिक्षण देखने को मिलता है।

यातायात के नियमों की अनदेखी, तेज गति से गलत दिशाओं में वाहन का आना जाना/नशे में चालकों का वाहन चलाना/मोबाइल पर बात भी और वाहन चालन भी जाम में फंसे होने के बावजूद कमाल के स्टंट बाइकर्स/जो चाहे चींटी निकलने की जगह न हो फिर भी बाइक निकालने के प्रयास में किसी को चोटिल करते या खुद चोटिल हो जाते और फिर शुरू होता है फिर शुरू होता है ले तेरी की, दे तेरी की। जाम के बावत एक रिपोर्ट के मुताबिक जाम में बार-बार फंसने से हमारी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। रिपोर्ट हमें बताती है कि जिस वक्त व्यक्ति जाम में फंसता है तबसे लेकर एक घंटे तक उसके दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। न्यूजीलैण्ड हेराल्ड की रिपोर्ट को माने तो दौरे का यह खतरा अचानक बढ़ने की सबसे बड़ी वजह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, शोर-शराबा और उससे उत्पन्न तनाव।

ज्यादातर गाड़ियों से निकलने वाले धुंए में नाइट्रोजन ऑक्साइड और कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ होते है। वह गाड़ियां जो डीजल से चलती है अपने धुंआ के साथ साथ बड़ी तादात में छोटे-छोटे कण हवा में छोड़ती है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। एक अनुमान है कि बच्चों के फंेफड़े में जितने संक्रमण होते है उनमें 10 प्रतिशत हवा में मौजूद इन छोटे-छोटे कणों की वजह से होते है। जिन इलाकों में जाम की समस्या ज्यादा है, वहाँ संक्रमण का प्रतिशत और ज्यादा पाया गया है। दरअसल शहरी भारत में आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है लेकिन उस अनुपात में शहरों की आधारभूत संरचना के विकास का अभाव है। जो यातायात जाम का विशेष कारण है। ऐसे में चाहे पैदल यात्री हो या वाहन चालक सड़क सम्बन्धित नियमों का पालन करना और कराना सभी के अब जरूरी हो गया है।

जाने-अनजाने में हम अनेक समस्याएं खुद पैदा करते है। हमें अपनी कुछ आदतें और तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलना होगा। समय रहते यातायात के नियमों को लेकर जन-जन को जागरूक रहना होगा। जब हम यह मानते हैं कि सामाजिक आन्दोलनों में लोगों को एक लक्ष्य हासिल करने के लिए एकजुट किया जाता है। खासकर जागरूकता फैलाने और लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव लाने के लिए तो क्या हम समाज में एक नया वातावरण नहीं तैयार कर सकते जिससे भविष्य में किसी स्नेहलता या किसी राजकुमार सिंह को किसी जन-सरोकार के मुद्दे पर हाईकोर्ट का दरवाजा न खटखटाना पड़े।



Browse By Tags



Other News