सुप्रीम कोर्ट ने शोभना भरतिया को सवा लाख रूपया हर्जाना ठोका
| Rainbow News - Mar 21 2018 3:51PM

सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल 2018 तय

श्रीकृष्ण प्रसाद (अधिवक्ता) की ओर से

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च 2018 को एक ऐतिहासिक आदेश में मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड। नई दिल्ली। की चेयरपर्सन व पूर्व कांग्रेस सांसद शोभना भरतिया को सवा लाख रूपए की हर्जाना राशि के भुगतान का आदेश दिया। मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड।नई दिल्ली। नामक कंपनी देश में दैनिक हिन्दुस्तान नाम के हिन्दी दैनिक का प्रकाशन करती है। हर्जाना-राशि से एक लाख रूपया नई दिल्ली के अरूणा असफअली मार्ग, 18।1, स्थित वार विडोज ऐसोसियेशन। देश के शहीदों की विधवाओं की संस्था। और पच्चीस हजार रूपया रेस्पोन्डेन्ट नं0. 02 मन्टू शर्मा को भुगतान करने का आदेश पीटिशनर शोभना भरतिया को कोर्ट ने दिया। सुप्रीम कोर्ट के मिर0 जस्टिस जे0 चेलामेश्वर और मिर0 जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने 16 मार्च 2018 को दोनों पक्षों को सुनने के बाद  उपर्युक्त आदेश सुनाया और इस मुकदमे की सुनवाई की अगली तारीक्ष 18 अप्रैल 2018 निर्धारित कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च 2018 को पारित अपने आदेश में लिखा है कि ----..‘‘कोर्ट अनुभव करता है कि स्पेशल लीव पीटिशन । क्रिमिनल। . 1603। 2013 , जो अब क्रिमिनल अपील नं0. 1216। 2017 के नाम से जाना जाता है, में पीटिशनर  को अपने वरीय अधिवक्ता की अनुपस्थिति में बहस के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थीं , इसलिए कोर्ट रेस्पोन्डेन्ट नं0. 02 मन्टू शर्मा को क्षतिपूत्र्ति के लिए  पीटिशनर शोभना भारितया को सवा लाख की हर्जाना.राशि के भुगतान का आदेश दिया जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे लिखा है कि ...---‘‘‘ गत 18 जनवरी 2018 को भी न्यायालय में बहस इसलिए स्थगित कर दी गई थीं क्योंकि पीटिशनर शोभना भरतिया के विद्वान वरीय अधिवक्ता न्यायालय में अनुपस्थित थे । रेस्पोन्डेन्ट नं0.02 के विद्वान वरीय अधिवक्ता ।श्रीकृष्ण प्रसाद। ने न्यायालय से प्रार्थना की थीं कि मुकदमे का निबटारा त्वरित होना चाहिए।

न्याय का तकाजा था कि कोर्ट ने पीटिशनर शोभना भरतिया और रेस्पोन्डेन्ट नं0. 01 बिहार सरकार को न्यायालय में अपना.अपना पक्ष रखने के लिए 14 मार्च 2018 की अगली सुनवाई तिथि निर्धारित की थीं। रेस्पोन्डेन्ट नं0.02 मन्टू शर्मा की ओर से बहस में हिस्सा ले रहे वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने न्यायालय से बहस में हिस्सा न लेने के लिए पीटिशनर शोभना भरतिया पर बड़ा हर्जाना लगाने और उनका और बिहार सरकार का पक्ष सुन लेने की प्रार्थना कीं। अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने कोर्ट को सूचित किया कि पीटिशनर इस मुकदमे में सुनवाई से कतरा रही है और रेस्पोन्डेन्ट नं0.02 मन्टू शर्मा के अधिवक्ता नई दिल्ली से लगभग दो हजार किलोमीटर दूर बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से हर तिथि पर सुप्रीम कोर्ट में विगत पांच वर्षों से कोर्ट की काररवाई में हिस्सा लेते आ रहे हैं और सुनवाई लगातार टलती जा रही है। जिन विद्वान अधिवक्ताओं ने 16 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट में बहस में हिस्सा लियाः सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2018 को बहस के दौरान पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से विद्वान वरीय अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, रंजीत कुमार, सिद्धार्थ लुथरा, आर0 एन0 करंजावाला, संदीप कपूर, देवमल्य बनर्जी, विवेक सूरी, ए0एस0 अमन, वीर इन्दरपाल सिंह संधु, मनीष शर्मा, अविरल कपूर, करण सेठ, आई0 खालिद, माणिक करंजावाला, कार्तिक भटनागर, रेस्पोन्डेन्ट नं0.01 बिहार सरकार की ओर से विद्वान अधिवक्ता ई0सी0 विद्यासागर और मनीष कुमार और रेस्पोन्डेन्ट नं0.02 मन्टू शर्मा की ओर से विद्वान वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद। मुंगेर, बिहार। शकील अहमद, प्रत्युष प्रातीक, उत्कर्ष पांडेय और राज किशोर चैधरी। ए0ओ0 आर0। ने भाग लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शोभना भरतिया और बिहार सरकार को बहस में अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया\ इस बीच   बिहार सरकार ने अचानक दैनिक हिन्दुस्तान के कथित अवैध मुंगेर संस्करण सहित अन्य जिलाबार संस्करणों  में सरकारी विज्ञापनों के प्रकाशन पर रोक लगाई

अठारह जनवरी। 2018। को बहस की निर्धारित तिथि पर पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति को सुप्रीम कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है और कोर्ट ने अपनी गहरी नाराजगी प्रकट की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी  2018 को पारित अपने आदेश में अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए  निम्नलिखित आदेश पारित किया है. न्याय का तकाजा है कि कोर्ट दोनों पार्टियों। पीटिशनर शोभना भरतिया और रेसपोन्डेन्ट नं0-01 ।बिहार सरकार। को अगली तारीख 14 मार्च  2018 को अपना पक्ष रखने का अंतिम-मौका प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में आगे लिखा है कि- ``आज बहस स्थगित की जाती है पीटिशनर के विद्वान अधिवक्ता की अनुपलब्धता की स्थिति में। रेस्पोन्डेन्ट के विद्वान अधिवक्ता न्यायालय से प्रार्थना करते हैं कि इस मुकदमे को जल्द से जल्द निबटाने की जरूरत है। ``18 जनवरी  2018 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नं0-02 में  न्यायमूर्ति श्री जे0 चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति श्री संजय किशन कौल की खण्ड ण्पीठ दैनिक हिन्दुस्तान अखबार की मलकिन शोभना भरतिया ।नई दिल्ली। के स्पेशल लीव पीटिशन ।क्रिमिनल। नं0-1603।  2013\ जो अब क्रिमिनल अपील नं0- 1216। 2017 है\ पर सुनवाई  कर रही थीं।

स्ुप्रीम कोर्ट  में इस मुकदमे में रेसपोन्डेन्ट नं0-02  मन्टू शर्मा ।मुंगेर/बिहार। की ओर से बहस में हिस्सा  ले रहे बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ।मुंगेर\ बिहार। ने बहस में पीटिशनर शोभना भरतिया के विद्वान अधिवक्ता के बहस में हिस्सा न लेने पर न्यायालय से पीटिशनर शोभना भरतिया पर बड़ा जुर्माना लगाने की प्रार्थना कीं और न्यायालय को बताया कि वे लगभग पांच वर्षों  से कोर्ट की कार्यवाही में नियमित भाग ले रहे हैं  परन्तु पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्तागण बहस से कतरा रहे हैं।`` विद्वान न्यायाधीश। द्वय। ने काफी समय तक विचार ण्विमर्श के बाद उपरोक्त लिखित आदेश पारित किया और पीटिशनर और बिहार सरकार को अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने और अपना-अपना पक्ष रखने का ``अंतिम मौका`` प्रदान किया। स्मरणीय है कि पिछली तिथि को बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष इस मुकदमे से जुड़ी संचिकाओं  की चोरी होने की स्थिति में बहस में हिस्सा लेने में असमर्थता प्रकट की थीं  और अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने की बात  न्यायालय से कही थीं। इस बीच पटना से खबर आई है कि दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के मुंगेर और अन्य जिलाबार कथित फर्जी संस्करणों के प्रकाशन और अवैध ढंग से सरकारी विज्ञापन छापकर सरकारी खजाना लूटने से जुड़े इस मुकदमे की स्रप्रीम कोर्ट में चल रही  अदालती सुनवाई के बीच में  बिहार सरकार के सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग। पटना\बिहार। ने अचानक भागलपुर प्रिंटिंग स्टेशन से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के कथित अवैध  मुंगेर संस्करण सहित अनेक जिलाबार अन्य अवैध संस्करणों में सरकारी ण्विज्ञापन प्रकाशन को स्थगित कर दिया है।

दैनिक हिन्दुस्तान के बिहार के मुंगेर सहित अनेक जिलाबार संस्करणों में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ।पटना\बिहार। के सरकारी विज्ञापन  का प्रकाशन बन्द है। अन्य हिन्दी दैनिकों के मुंगेर संस्करण में पी0आर0डी0 ।पटना। का  सरकारी विज्ञापन प्रकाशित हुए हैं परन्तु दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर सहित अन्य कई जिलाबार संस्करणों में सरकारी विज्ञापन  प्रकाशित नहीं हुए हैं । दैनिक  हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण में  इनदिनों झारखंड राज्य के विज्ञापन भरे पड़े हैं। जरूरत पड़ने पर कोर्ट हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण के प्रकाशन और सरकारी विज्ञापन घोटाले में एस0आई0टी0 गठित करेगा- सुप्रीम कोर्ट ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण के  प्रकाशन और सरकारी विज्ञापन घोटाले की जांच के लिए एस0आई0टी0 का गठन करेगा । साथ ही  बिहार सरकार के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त  वरीय अधिवक्ता माननीय विद्यासागर की ओर से स्पेशल लीव पीटिशन। क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 से जुड़ी सभी संचिकाओं की अचानक  चोरी होने  की स्थिति में कोर्ट काररवाई में हिस्सा लेने में असमर्थता व्यक्त करने पर सुप्रीम कोर्ट  ने बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी संस्करण और दो सौ करोड़ के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़े मामले में गत 18 जनवरी 2018 को सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर कीं थीं।

पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से कोर्ट में बहश कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरीय विद्वान अधिवक्ता माननीय सिद्धार्थ लुथरा ने कोर्ट को कहा कि -ष्माई लार्ड एस0आई0 टी0 की कोई जरूरत नहीं है । ।नो नीड आफ एस0आई0टी0 माई लार्ड ।बीते 06 दिसंबर 17 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नं0-02 में माननीय न्यायमूर्ति श्री जे0 चेलामेश्वर और माननीय न्यायमूर्ति श्री  संजय किशन कौल की खण्ड पीठ  बिहार के मुंगेर के कोतवाली थाना  कांड संख्या-445। 2011 की नामजद प्रमुख अभियुक्त व  हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह ।नई दिल्ली। की अध्यक्ष शोभना भरतिया ।पूर्व सांसद। के स्पेशल लीव पीटिशन। क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 पर सुनवाई कर रही थीं। अभियुक्त शोभना भरतिया ने मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 को रद्द करने की प्रार्थना को  लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन।क्रिमिनल। नं0- 1603। 2013 दायर किया है।

06 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट नं0-02 में एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0 -1603। 2013 में सुनवाई के दौरान रेस्पोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा ।सामाजिक कार्यकर्ता मुंगेर\बिहार। की ओर से बहस  में हिस्सा लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद।मुंगेर\बिहार। ने न्यायालय के समक्ष मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के 5 मार्च  2013 के ``इन्टरीम स्टे आर्डर`` की अवेहलना के मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव और अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की न्यायिक काररवाई अलग से शुरू करने की प्रार्थना कीं। सुप्रीम कोर्ट में बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसादने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट  के 5 मार्च 2013 के ष``इन्टरीम स्टेण्आर्डर`` की अवहेलना कर बिहार सरकार ने मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या- 445। 2011 में ष्पुर्नअनुसंधान शुरू किया और बिहार सरकार। रेस्पोन्डेन्ट नं0-01। ने सुप्रीम कोर्ट में जो काउन्टर-एफिडेविट  सुपुर्द किय उसमें बिहार सरकार ने प्राथमिकी नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया को ष्निर्दोष साबित करने का भरपूर प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट ने 05 मार्च 2013 को इन्टरीम स्टे आर्डर पारित किया था \मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या-445। 2011 की नामजद प्रधान अभियुक्त शोभना भरतिया के एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने  05 मार्च 2013 को मुंगेर के कोतवाली थाना कांड संख्या-445। 2011 में प्राथमिकी  से निकलने वाली सभी प्रकार की काररवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थीं।

अवमानना काररवाई और सी0बी0आई0 जांच की प्रार्थना  की गई थीं\ 17 जुलाई2017 को भी सुप्रीम कोर्ट में बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद।मंुगेर\बिहार। ने सुप्रीम कोर्ट में माननीय न्यायमूर्ति श्री जे0 चेलामेश्वर की अध्यक्षतावाली दो सदस्यीय खण्डण्पीठ के समक्ष बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान के जिलाबार फर्जी संस्करण और सरकारी विज्ञापन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सी0बी0आई0 जांच या अन्य एजेंसी से जांच  कराने और सुप्रीम कोर्ट  के 05 मार्च 2013 के इन्टरीम स्टेण्आर्डर  की अवहेलना करने वाले बिहार सरकार के मुख्य सचिव ओैर अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों के विरूद्ध अलग से अवमानना की अदालती काररवाई  शुरू करने की प्रार्थना की थीं । इस तारीख को पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से वरीय अधिवक्ता और पूर्व एटार्नी जेनरल आफ इंडिया मुकुल रोहतगी ने बहस में हिस्सा लिया और पीटिशनर शोभना भरतिया को ष्निर्दोष बताया ।निचली अदालत में इस  मुकदमे से जुड़ी सभी मूल संचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने  तलब किया \ 17 जुलाई 17 को रेसपोन्डेन्ट नं0-02 मन्टू शर्मा की ओर से अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद की ओर से बहस में हिस्सा लेने के बाद खण्डण्पीठ ने एक  आदेश पारित किया और पटना उच्च न्यायालय और मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय को इस मुकदमे से जुड़ी संबंधित सभी मूल संचिकाओं। लोअर कोर्ट रिकार्ड। को  सुप्रीम कोर्ट भेजने का आदेश पारित किया ।मूल संचिकाएं  सुप्रीम कोर्ट भेजी गईंर\ पटना उच्च न्यायालय और मुंगेर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय ने कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 से जुड़ी सभी अदालती काररवाई की मूल संचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट भेज दिया है ।

उच्च न्यायालय ने शोभना भरतिया के पीटिशन को खारिज किया थार-- पटना उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अंजना प्रकाश ने 17 दिसंबर 2012 को मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 की नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया और अन्य अभियुक्त शशि शेखर और अन्य की ओर से दायर क्रिमिनल मिससेलेनियस पीटिशन नं0- 2951। 2012 और अन्य पीटिशन को खारिज कर दिया  और मुंगेर पुलिस को कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 में तीन माह के अन्दर  पुलिस अनुसंधान पूरा करने का आदेश पारित किया। माननीय न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में यह भी लिखा कि --`` मुंगेर के जिला पदाधिकारी के पत्र ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों की जांच रिपोर्ट भी संलग्न की है जो दर्शाता है कि इस कांड में पुलिस अनुसंधान पूरी गति में है और घटना का हिस्सा मुंगेर में भी है। मुकदमा में क्या है\बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय के माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री मनोज कुमार सिन्हा के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मुंगेर शहर  के पुरानीगंज मोहल्ले के निवासी व सामाजिक कार्यकर्ता मन्टू शर्मा के प्रतिवेदन पर  प्राथमिकी जिसकी संख्या- 445। 2011 है दर्ज कीं  ।पुलिस ने प्राथमिकी में ।1। शोभना भरतिया।अध्यक्ष हिन्दुस्तान प्रकाशन समूह।नई दिल्ली।2। शशि शेखर । प्रधान संपादक\ दैनिक हिन्दुस्तान\नई दिल्ली ।3। अक्कू श्रीवास्तव । स्थानीय संपादक  दैनिक हिन्दुस्तान पटना संस्करण। 4। बिनोद बन्धु । स्थानीय संपादकए दैनिक हिन्दुस्तान भागलपुर संस्करण। और ।5। अमित चोपड़ा । प्रकाशक मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड । नई दिल्ली। को भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420। 471। 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स एक्ट 1867 की धाराएं  8।बी। 14 और 15 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया और पुलिस अनुसंधान शुरू कर दिया।

नामजद अभियुक्तों पर आरोप है- मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 के सूचक व सुप्रीम कोर्ट के एस0एल0पी0।क्रिमिनल। नं0-1603। 2013 के रेस्पोन्डेन्ट नं0 -02 मन्टू शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी ओर से जो काउन्टर-ऐफिडेविट जमा की है  उसमें मुंगेर कोतवाली थाना कांड संख्या-445। 2011 के सभी नामजद अभियुक्तों पर आरोप है कि उनलोगों ने वर्ष 2001 के 02 अगस्त से वर्ष 2011 के 30 जून तक मुंगेर जिले के पाठकों के लिए दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध मुंगेर संस्करण का मुद्रण भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से करता रहा और मुंगेर जिले के पाठकों के बीच प्रकाशित करता रहा । इस पूरी अवधि में अभियुक्तों ने दैनिक हिन्दुस्तान के  न केवल ष्मुंगेर संस्करण बल्कि दैनिक हिन्दुस्तान के  मुजफ्फरपुर और  भागलपुर संस्करणों के लिए प्रेस रजिस्ट्र्ार।नई दिल्ली। से अलग से ष्सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्र्ेशन और  रजिस्ट्र्ेशन नम्बर नहीं प्राप्त किया । बल्कि अभियुक्तों ने जालसाजी और धोखाधड़ी करते हुए सेम  टाइटिल के दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण को आवंटित ष्सर्टिफिकेट आफ रजिस्ट्र्ेशन और षजिस्ट्र्ेशन नम्बर -आर0एन0आई0 नं0-44348। वर्ष 1986 को मुंगेर भागलपुर और मुजफ्फरपुर  के अवैध हिन्दुस्तान के संस्करणों के लिए उपयोग कर बिहार सरकार और भारत सरकार तथा मुंगेर भागलपुर और मुजफ्फरपुर जिलों के सरकारी विभागों  से इस दौरान लगभग दो सौ करोड़ रूपया का सरकारी विज्ञापन सरकारी पदाधिकारियों से धोखाधड़ी और जालसाजी कर  प्राप्त कर लिया और उसे प्रकाशित कर लगभग दो सौ करोड़ रूपया का चूना  राजकीय कोष को लगाया।

जब विभिन्न स्तरों पर जांच शुरू हुई  तो सभी नामजद अभियुक्तगण वर्ष 2011 के 01 जुलाई  से मुंगेर  भागलपुर और मुजफ्फरपुर के दैनिक हिन्दुस्तान के अलग-अलग संस्करणों में प्रिंट ण्लाइन में रजिस्ट्र्ेशन नम्बर के स्थान पर  आर0एन0आई0 नं0 ``आवेदित`` लिखने लगे । जबकि सभी नामजद अभियुक्तगण अवैध मुंगेर भागलपुर मुजफ्फरपुर  और जिलाबार के सेम टाइटिल हिन्दुस्तान के  संस्करणों की पिं्टण्लाइनों पर पटना संस्करण को आवंटित रजिस्ट्र्ेशन नं0- आर0एन0आई0 नं0-44348। वर्ष 1986 को 2 अगस्त 2001 से 30 जून 2011 तक लगातार छापते रहे और केन्द्र और राज्य सरकारों के समक्ष अवैध जिलाबार संस्करणों को वैध संस्करण घोषित कर सरकारी पदाधिकारियों को  सरकारी विज्ञापन  देने को इन्डयूस किया और सरकारी खजाना को जमकर लूटते रहे । इस लंवी अवधि में भारत सरकार और बिहार सरकार ने बिना निबंधन के मुंगेर भागलपुर मुजफ्फपुर और अन्य जिलाबार संस्करणों को सरकारी विज्ञापन देने का सिलसिला जारी रखा और सरकार के खजाने को लूटने की ईजाजत दे दीं। रेस्पोन्डेन्ट नंण्02 मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर-ऐफिडेविट में सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि--`` दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध भागलपुर और मुजफ्फरपुर संस्करणों के प्रकाशन और लगभग एक करोड़ पन्द्रह हजार 955 रूपए के  अनियमित भुगतान का भंडाफोड़  बिहार सरकार के वित्त । अंकेक्षण। विभाग के मुख्य लेखा नियंत्रक ने अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या--195। 2005\06 में उजागर किया।
मुख्य लेखा नियंत्रक ने अंकेक्षण प्रतिवेदन में लिखा कि---``दैनिक हिन्दुस्तान  के भुगतान  से संबंधित  संचिका - विज्ञापन। लेखा। 2\7।2004 और संचिका-- विज्ञापन। लेखा। 42\4। 2003 के अवलोकन और आकस्मिक विपत्रों की जांच से अंकेक्षण  से स्पष्ट हुआ है कि  हिन्दुस्तान दैनिक को पटना के अतिरिक्त मुजफ्फरपुर और भागलपुर मुद्रण केन्द्रों को स्वतंत्र प्रकाशन दिखाकर उनके विज्ञापन के लिए अलग ण्दर  पर वर्ष 2002--03  और वर्ष 2003--04  में  कुल एक करोड़ पन्द्रह हजार नौ सौ पचपन रूपया का अवैध भुगतान किया गया।``

संचिका से स्पष्ट है कि भागलपुर और मुजफ्फरपुर कोई स्वतंत्र प्रकाशन या संस्करण नहीं है वरन् पटना संस्करण का केवल मुद्रण केन्द्र है और इनके लिए अलग से कोई पंजीयन आर0एन0आई0 से नहीं प्राप्त था। पटना संस्करण की पंजीयन संख्या-- 44348। 1986 ।पटना। ही उनका पंजीयन के रूप में अंकित था। अभियुक्तों ने जालसाजी  और धोखाधड़ी क्यों कीं\सुप्रीम कोर्ट को रेस्पोन्डेन्ट नं--02 मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर--ऐफिडेविट  में बताया है कि भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन  और दृष्य प्रचार निदेशालय। डी0ए0वी0पी0। नई दिल्ली  और बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग।पटना। की विज्ञापनण्नीति है कि प्रेस ण्रजिस्ट्र्ार। नई दिल्ली। से निबंधित समाचार ण्पत्र को ही सरकारी विज्ञापन दिया जाता है। प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स एक् 1867 के तहत प्रेसण्रजिस्ट्र्ार। नई दिल्ली। से अखबार का निबंधन कानूनी बाध्यता है। डी0ए0वी0पी0। भारत सरकार। की विज्ञापन ण्नीति रही है कि प्रेसण्रजिस्ट्र्ार से निबंधित समाचारण्पत्र  जब तीन वर्ष नियमित प्रकाशन पूरा कर लेता है तो उस समाचारण्पत्र को विभाग विज्ञापन ण्सूची में शामिल करता है और विभाग उस अखबार के लिए विज्ञापनण्दर भी निर्धारित करता है। डी0ए0वी0पी0 के विज्ञापनण्दर पर ही बिहार सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग। पटना। राज्य सरकार की विज्ञापनण्सूची में उस समाचारण्पत्र को शामिल करता है और उस समाचार ण्पत्र को सरकारी विज्ञापन जारी करता है। परन्तु भारत सरकार और बिहार सरकार ने दैनिक हिन्दुस्तान के बिना निबंधनवाले अवैध भागलपुर और मुजफ्फरपुर संस्करणों  को वर्ष 2001 से 30 जून 2011 तक सरकारीण्विज्ञापन देने और सरकारी खजाना लूटने की इजाजत दे दीं।

सुप्रीम कोर्ट को रेस्पोन्डेन्ट नं0--02 मन्टू शर्मा ने लिखित रूप में आगे  बताया है कि--`` जब बिहार सकरार ने वित्त अंकेक्षण प्रतिवेदन --195। 2005\06 के आलोक में राज्य सरकार के तात्कालीक महाधिवक्ता से कानूनी ण्सलाह मांगी तो तात्कालीक महाधिवक्ता ने हिन्दुस्तान अखबार के विरूद्ध कानूनी काररवाई न करने और अवैध संस्करण के कारण सरकारी खजाने से लगभग एक करोड़ के अनियमित भुगतान की वसूली भी न करने की सिफारिश राज्य सरकार से कर दी जिससे अभियुक्तों का मनोवल बढ़ गया और अभियुक्तों की ओर से अवैध जिलाबार संस्करणों के प्रकाशन और अवैध जिलाण्बार संस्करणों में अवैध ढंग से केन्द्र औेर राज्य सरकारों के विज्ञापन छापने और सरकारी खजानों की लूट का सिलसिला वर्षोंण्वर्ष तक जारी रहा। रेसपोन्डेन्ट नं0ण्02 मन्टू शर्मा ने अपने काउन्टर--ऐफिडेविट में दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के अवैध संस्करण और लगभग एक करोड़ के विज्ञापन मद में हुए अनियमित भुगतान की वसूली को रोकने के मामले में पूर्व महाधिवक्ता की भूमिका की भी जांच कराने की प्रार्थना सुप्रीम कोर्ट से लिखित रूप में की है। सभी नामजद अभ्यिुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप सत्य  प्रमाणित--- मुंगेर के पुलिस उपाधीक्षक ऐ0के0 पंचालर और पुलिस अधीक्षक पी0 कन्नन  की सुपरविजन रिपोर्ट नं0--01 और नं0--02 जारी हो चुकी है। दोनों वरीय पुलिस पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी सुपरविजन रिपोर्टों में लिखा है कि---``` अनुसंधान और पर्यवेक्षण तथा उपलब्ध दस्तावेजी ण्साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि  मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-- 445। वर्ष 2011 के सभी नामजद अभियुक्तों जिसमें अभियुक्त शोभना भरतिया शशि शेखर अक्कू श्रीवास्तव बनोद बंधु और अमित चोपड़ा शामिल हैं के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420।471। 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्र्ेशन आफ बुक्स् एक्ट-- 1867 की धाराएं 8।बी। 14 और 15 के तहत आरोप ष्प्रथम दृष्टया सत्य हैं। मुंगेर के डी0एम0 कुलदीप नारायण ने पटना उच्च न्यायालय को जो जांच रिपोर्ट सौंपी थीं उन्होंने मुंगेर के डी0एस0पी0 और एस0पी0 की सुपरविजन रिपोर्ट नं0---01 और 02 की प्रतियां भी भेज दी थीं ।

पटना उच्च न्यायालय को समर्पित मुंगेर डी0एम0 कुलदीप नारायण की जांच रिपोर्ट में क्या है\मुंगेर के तात्कालीक डी0एम0 कुलदीप नारायण ने लिखा है कि---``` मैंने आज सुबह मुंगेर और लखीसराय जिलों से दैनिक हिन्दुस्तान की प्रतियां प्राप्त की हैं । मुंगेर संस्करण और लखीसराय संस्करण । जो पूर्व बिहार संस्करण के नाम से प्रकाशित होता है । में  एक ही स्थानीय संपादक एक ही मुद्रक और प्रकाशक एक ही फोन नं0 और एक ही आर0एन0आई0 नं0 छपा है। दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण  पर भी वहीं आर0एन0आई0 नं0 छपा है। इस प्रकार प्रतीत होता है कि एक ही रजिस्ट्र्ेसन नम्बर पर  भिन्नण्भिन्न जिलों में भिन्नण्भिन्न समाचारों को प्रकाशित और वितरित किया जा रहा है। चूंकि समाचार अलग-अलग है इसीलिए वेसब अखबार। जिलाबार अखबार। अलगण्अलग समाचार पत्र माने जायेंगें और उन सभी को अलग-अलग रजिस्ट्र्ेसन नम्बर लेना चाहिए। जबकि मुंगेर संस्करण में ऐसी बात नहीं है। इस घोटाला में जांच के दायरे में देश के वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडेय  महेश खरे  विजय भस्कर विशेश्वर कुमार और कंपनी उपाध्यक्ष योगेश चन्द्र अग्रवाल भी शामिल हैं\ मुंगेर जिला के प्रथम श्रेणी के विद्वान न्यायिक दंडाधिकारी श्री डी0एन0 भारद्वाज की अदालत में 19 अप्रैल 2012 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज वयान में अभियोजन पक्ष की ओर से गुजरे स्वतंत्र गवाह काशी प्रसाद। अधिवक्ता ।  बिपिन कुमार मंडल । अधिवक्ता । और श्रीकृष्ण प्रसाद । अधिवक्ता । ने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष वयान किया है कि दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जी मुंगेर संस्करण के प्रकाशन और करोड़ों के विज्ञापन घोटाला में कंपनी के बिहार के उपाध्यक्ष योगेश चन्द्र अग्रवालए अखबार के प्रधान संपादक मृणाल पांडेयए संपादक महेश खरे संपादक विजय भस्कर और संपादक विश्वेश्वर प्रसाद  की भी मिली भगत रही है।

-श्रीकृष्ण प्रसाद अधिवक्ता\ मुंगेर\ बिहार, मो0 9470400813



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