दुर्लभ डी.एफ.ओ. गंगा प्रसाद के कार्यकाल में कैसे पूरा होगा 28 लाख पौधरोपण का लक्ष्य...?
| Posted by- Editor - Apr 10 2018 5:11PM

इस समय चर्चा है कि अम्बेडकरनगर जिले में 28 लाख पौध रोपण का लक्ष्य सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष की तुलना में ढाई गुना से अधिक है। ऐसे में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी काफी हलकान देखे जा रहे हैं। बीते वर्ष 10 लाख पौधों का रोपण करके कीर्तिमान स्थापित करने वाले वन विभाग के तत्कालीन प्रगागीय वनाधिकारी ए.के. शुक्ला का स्थानान्तरण हो चुका है। उनके स्थान पर इस समय गंगा प्रसाद जैसा सीनियर अधिकारी यहाँ नियुक्त हुआ है। कहा जा रहा है कि अब उनके सामने समस्या यह है कि पूरे जिले में इतनी पर्याप्त जमीन ही नहीं बची है जहाँ 28 लाख पौधों का रोपण करके लक्ष्य पूरा किया जाए।

इन्हीं सबके बावत जानकारी हासिल करने की गरज से हमने जब प्रभागीय वनाधिकारी गंगा प्रसाद से दूरभाषीय सम्पर्क कर मिलने का मन्तब्य बताया तो उन्होंने कहा कि सॉरी! अभी मैं लखनऊ आ गया हूँ, कल फैजाबाद में मीटिंग है, मुलाकात अभी सम्भव नहीं है। जबकि वास्तविकता यह है कि वह जिले में ही थें और मीडिया से मिलने से बचने के लिए बहाना बना रहे थे। इस तरह का उनका टरकाऊ रवैय्या कोई नया नहीं है ऐसा वह प्रायः करते रहते हैं और मीडिया से मिलने से कतराते हैं। कभी स्वास्थ्य परीक्षण, तो कभी शादी-ब्याह में शिरकत और कभी लखनऊ तो कभी फैजाबाद मीटिंग में व्यस्तता बताकर प्रभागीय वनाधिकारी मीडिया को दर्शन देने से बचते रहते हैं।

खैर! यह बात तो डी.एफ.ओ. गंगा प्रसाद की व्यक्तिगत है परन्तु जब उनके ऑफिस अन्य से उनके लोकेशन के बारे में पता किया जाता है तो उत्तर मिलता है- अधिकारी हैं, कहाँ जाते हैं यह किसी को नहीं मालूम होता। विभागीय गाड़ी और चालक को साथ लिए और चले गए। किसकी मजाल है कि साहब आप कहाँ जा रहे हो, कब लौटोगे यह पूछे। कार्यालय के कुछ कर्मियों ने नाम न प्रकाश में आने की शर्त पर बताया कि बड़े साहब गाजियाबाद, लखनऊ, फैजाबाद और जिले की बैठकों में कब जाते हैं यह विभाग के किसी मुलाजिम को नहीं पता होता। पुराने अफसर हैं, इनकी फेमिली गाजियाबाद और नजदीकी रिश्तेदार लखनऊ, दिल्ली जैसे स्थानों पर रहते हैं। साहब जब भी आउट ऑफ स्टेशन होते हैं तो इन्हीं जगहों पर जाते होंगे। हमें क्या पड़ी है कि ज्यादा पूंछ-तांछ करें।कई विभागीय कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि हर कोई निवर्तमान डी.एफ.ओ. भीमसेन नहीं हो जाएगा। जो सर्वसुलभ और मिलनसार वनाधिकारी रहे।

हालांकि डी.एफ.ओ. ए.के. शुक्ला के बारे में इन लोगों का कहना है कि वह मिलते सभी से थें और अपने तरीके से सबको प्लीज रखते थे भले ही उनका स्टाइल ठेठ प्रतापगढ़िया रहा हो। वह मुँह लगे स्वजातीय मीडिया कर्मियों को चना, चबैना, भेली, गुड़ व ठण्डा पानी पिलाते थे। अन्य जाति के मीडिया कर्मी भले ही उनकी इस कार्यशैली से असंतुष्ट रहे हों परन्तु स्वजातीय पत्रकार बन्धु ए.के. शुक्ला के हिमायती थे। वहीं डी.एफ.ओ. भीमसेन के बारे में यह सर्वविदित है कि वह जिले के मीडिया कर्मियों व अन्य से समभाव रखते थे। उनके कार्यकाल में हर आम-खास व जरूरतमन्द अनप्लीज्ड नहीं रहा।

वर्तमान डी.एफ.ओ. गंगा प्रसाद का दर्शन जब मीडिया को ही दुर्लभ है तब ऐसे में किसी समाचार का प्रकाशन जो आम-खास के लिए महत्वपूर्ण हो और वन विभाग से सम्बन्धित हो बगैर पूरी जानकारी के कैसे सम्भव है? यही नहीं अन्य आम लोग उनके इस कार्य-व्यवहार से कैसे संतुष्ट होंगे? कुछ लोगों का कहना है कि डी.एफ.ओ. प्रसाद का मन यहाँ नहीं लग रहा है वह अपना स्थानान्तरण अन्य जिले में कराने के लिए प्रयासरत हैं। यही कारण है कि वह विभागीय कार्यालय के अपने चैम्बर में कम ही बैठते हैं। अब आप ही अन्दाजा लगाएँ कि- ऐसे में इनके कार्यकाल में जिले में हरित क्रान्ति व वन संरक्षण कैसे सम्भव है 28 लाख पौध रोपण की तो बात ही दूर।



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