मंगल के साथ शनि की युति का प्रभाव करा सकता है उत्पात
| Rainbow News - Apr 12 2018 12:14PM

वक्रीय शनि अड़ैया एवं साढ़ेसाती के प्रभाव को करेगा कम 

भोपाल। तारीख 18 को धनु राशि पर शनि होगा गृह स्थिति के अनुसार गुरू पूर्व से ही वक्रीय चल रहे है शनि के वक्रीय होते ही वक्रीय ग्रहों की संख्या चार होगी। तारीख 15 रविवार श्राद्ध अमावस्या से चन्द्रमा भी मंगल की राशि मेष में जायेगा। अतः पृथ्वी में भूकम्प कम्पन्न प्राकृतिक प्रकोप संभव है।
    नेहरू नगर स्थित ज्योतिषमठ संस्थान के संचालक पं. विनोद गौतम के अनुसार अधिकतर भूकम्प अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास आते है। इस स्थिति में गृह योग तारीख 15 अमावस्या से बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल का समय भूकम्प आदि प्राकृतिक प्रकोपकारी प्रभाव गृह बना रहे है। आकाशीय गृह स्थिति के अनुसार इस दौरान पृथ्वी का स्वामी मंगल 22 अंश पर शनि के साथ धनु राशि में गतिमान रहेगा। जबकि शनि के वकृतत्व का प्रभाव 12 अंश पर पृथ्वी पर पड़ेगा। इस स्थिति में शनि मंगल की युति तथा चन्द्रमा का प्रभाव 6.3 की तीव्रता का भूकम्प देने में सक्षम है। इस योग के प्रभाव से भारत में दिल्ली एवं जबलपुर के आसपास का क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। मंगल शनि की युति दुर्भिक्षु योग बनाती है जिसके प्रभाव से धार्मिक उन्माद बड़ता है तथा शेयर व्यापार व्यवसाय भी प्रभावित होता है।
    शनि के वक्रीय होने से साढ़े साती एवं अडै़या शनि के प्रभाव में आयेगी कमी। पं. गौतम के अनुसार वर्तमान समय पर वृष एवं कन्या राशि में अड़ैया शनि का प्रभाव एवं वृश्चििक, धनु तथा मकर राशि पर साढ़े साती का प्रभाव चल रहा है। तारीख 18 को शनि के वक्रीय होते ही उपरोक्त राशि वालो को शनि के प्रकोप से राहत मिलेगी। शनि की उल्टी चाल का प्रभाव धनु राशि पर साधु संत एवं महात्माओं के लिए शुभताकारी नहीं है। शनि मंगल की युति मंदिर निर्माण की गति में भी रूकावट पैदा करेगी। शनि 6 सितम्बर तक उल्टी चाल वक्र गति का रहेगा।



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