महावीर उत्तरांचली की दो ग़ज़लें
| -Mahaveer Uttaranchali - Apr 13 2018 12:41PM

(1.)

छिन गया रुत्बा तो क्या है
पास अपने हौसला है

तूने मुझको मन से चाहा
दिल कहे तू देवता है

तूने छोड़ा उसपे सब कुछ
देख वो क्या मांगता है

हो न पाया जो हमारा
दिल उसी को ढूंढता है

ये तरक़्क़ी है कहाँ की
टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता है

(2.)

थोड़ा और गहरे उतरा जाये
तब जाकर इश्क में डूबा जाये

लफ़्ज़ों में शामिल अहसासों को
महसूस करूँ तो समझा जाये

है ज़रूरी ये कोरे काग़ज़ पर
जो सोचा है, वो लिक्खा  जाये

ये मुमकिन तो नहीं चाहत में
जो दिल चाहे वो मिलता जाये

सोच रहा हूँ काबू में अपने
जज्बात को कैसे रक्खा जाये

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