“जबरी पहुना भइल जिनगी” पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न
| Rainbow News - Apr 16 2018 11:56AM

विश्व भोजपुरी सम्मेलन की गाजियाबाद इकाई का हुआ शपथ ग्रहण

विश्व भोजपुरी सम्मेलन की गाजियाबाद इकाई का शपथग्रहण समारोह आज आर डी मिमोरियल पब्लिकस्कूल मे आयोजित हुआ। समारोह कि शुरुवात मे उपस्थित अतिथियों ने माँ सरस्वती कीप्रतिमा को माल्यार्पण के साथ दीपप्रज्वलित कर आज के समारोह की विधिवत शुरुवात की। उसके बाद समारोह मे पधारे लोक गायकश्री ओझा जी ने माँ सरस्वती के सम्मान मे एक भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुत किया। समारोह के अध्यक्ष कृष्णा इंजीनियरिंग कालेज के डाइरेक्टरडॉ संदीप तिवारी ने श्री अशोक श्रीवास्तव जी को अध्यक्ष और जे पी द्विवेदी को महासचिव के साथ कुल 21 लोगों को उनके दायित्व की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह मेमुख्य अतिथि श्री मनोज भावुक, पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभाके चेयरमैन श्री केदार नाथ तिवारी, मैं भारत हूँ” की सह संपादिका श्रीमति पुष्पा सिंह बिसेन, विश्व भोजपुरी सम्मेलन केदिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री विनय मणि त्रिपाठी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजीतदुबे जी के प्रतिनिधि के रूप मे पधारेश्री अरविंद दुबे जी उपस्थित रहे। तदुपरान्त गाजियाबाद मे दूसरी बार जयशंकरप्रसाद द्विवेदी के भोजपुरी गीत संग्रह “जबरी पहुना भइल जिनगी” का लोकार्पण हुआ। गाजियाबाद की धरती जो हिन्दी साहित्य का समुन्द्र है, वहाँ पर किसी भोजपुरी किताब का रचा जाना औरलोकार्पण स्वयं मे लोमहर्षक लगता है। विगत दो वर्षों मे यह दूसरी किताब कालोकार्पण है।

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के इतिहास पर मुख्यअतिथि श्री मनोज भावुक ने बृहत प्रकाश डाला। मनोज भावुक जी ने विश्व भोजपुरीसम्मेलन के 1995 से लेकर अब तक के सफर पर सिल सिलेवार ढंग से प्रकाश डाला। इसलिए उन्होने सम्मेलन के बाहर और भीतर, देश और विदेश सभी पक्षो पर बेबाकी से अपनी बात रखी। चूंकि मनोज भावुकजी दिल्ली इकाई और इंग्लैंड इकाई केअध्यक्ष रह चुके हैं और मारिशस मे हुवे वे अंतराष्ट्रीय महोत्सव मे सिरकत भी कर चुके हैं। भोजपुरी गीत संग्रह जबरी पहुना भइल जिनगीपुस्तक के नाम का जिक्र कराते हुवे कवि भावुक ने कहा “ यहनाम ही अपने आप मे एक पूरी कविता है और कबीर वाणी की तरह संकेत मे ही जिंदगी कीजिजीविषा और मुस्किलो के रूबरू करा देती है । जिनगी पहुना है और पहुना को एक न एकदिन जाना ही है । यही जीवन का एकमात्र सत्य है ।भोजपुरी गीत संग्रह के लोकार्पण पर उन्होने इसके रचयिता जयशंकर प्रसादद्विवेदी को शुभकामना दी और कहा कि “आज जहां हर केहू बेटा बेटी , रोजी रोजगार, कोट कचहरी मे अझुराइल बा उहवेंसाले भीतर दू दू गो किताब के सृजन कवि के साहित्य के प्रति अनुराग आउर लेखन केप्रति निष्ठा के दर्शावत बा”।

समारोह का अंतिम सत्र भोजपुरी कवि गोष्ठी के नाम रहा। वहाँ पधारे करीब दर्जन भर कवियोंने अपनी भोजपुरी गीत और कविता के माध्यमसे सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। सुनील सिन्हा ने जहां अपनी भोजपुरी कविता“माटी के देहिया से” से जहां लोगों को सोचने पर मजबूर किया, वही फरीदाबाद से पधारे श्री तरकेश्वर राय ने अपनी कविता के माध्यम सेभोजपुरी भाषा के मान्यता की अलख जगाई। अशोक श्रीवास्तव जी ने अपने गीत से खूबतालियाँ बटोरी। जे पी द्विवेदी ने अपनी व्यंग कविता “बनल रहे भौकाल बकैती” से लोगो के चेहरे परमुस्कान बिखेरी। मुख्य अतिथि श्री मनोज भावुक ने अपने भोजपुरी गीत से लोगो कोमंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ संदीप तिवारी जी अपने सम्बोधनमे पूर्वञ्चल के भाषा, संस्कृति और संस्कार पर बोलते हुएउसे बनाए रखने के लिए सभी को प्रेरित किया। वहाँ उपस्थित सभी अतिथियों ने इकाई केगठन पर बधाई और शुभकामना दी। धन्यवाद ज्ञापन श्री केदार नाथ तिवारी ने किया औरमंच संचालन श्री कैप्टन ने किया।



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