देश में आर्थिक आपातकाल जैसे हालात : ममता बनर्जी
| Rainbow News - Apr 17 2018 4:56PM

देशभर में कैश की किल्लत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने देशभर में कैश की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। ममता बनर्जी इसकी तुलना आर्थिक आपातकाल से की है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह स्थिति उन्हें नोटबंदी के दिनों की याद दिला रही है। साथ ही उन्होंने केन्द्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या देश में ‘आर्थिक आपातकाल’ चल रहा है? बनर्जी ने ट्वीट किया, 'कई राज्यों में एटीएम मशीनों में नकदी नहीं होने की रिपोर्ट देख रही हूं। बड़े नोट गायब हैं। यह नोटबंदी के दिनों की याद दिला रहा है। क्या देश में वित्तीय आपातकाल चल रहा है। नकदरहित एटीएम।'    

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कैश के किल्लत के बीच प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। केंद्र सरकार कि आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की बैंकिंग सिस्टम को खराब कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएनबी स्कैम के संदर्भ में नीरव मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि नीरव मोदी 30000 करोड़ रुपये लेकर भाग गए लेकिन पीएम ने एक शब्द भी नहीं कहा। हमें लाइनों में खड़ा रहने के लिए मजबूर किया। हमारे जेब से 500, 1000 रुपये के नोट छीनकर नीरव मोदी के पॉकेट में डाल दिए।

देश में जारी कैश किल्लत पर राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने देश की बैंकिंग व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। नीरव मोदी 30 हजार करोड़ लेकर भाग गया, लेकिन पीएम एक शब्द नहीं बोल पाए। हमारी जेब से 500 और 1000 रुपए के नोट छिनकर नीरव मोदी को दे दिया गया और हम ATM की लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं। वहीं वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर कहा है कि देश में कैश के हालात का जायज़ा लिया। कुल मिलाकर पर्याप्त से ज़्यादा कैश चलन में है और बैंकों के पास भी है।

कुछ इलाक़ों में अचानक और बढ़ी हुई मांग से पैदा हुई क़िल्लत से जल्द ही निबटा जा रहा है। इधर वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि कैश की कोई किल्लत नही हैं, ये अलग बात है कि कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि 2-3 दिन में सब ठीक हो जाएगा। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में ATM से नकदी नहीं मिल रही है।

बताया जा रहा है कि कई बैंकों की शाखाओं से भी लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते NPA ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है। बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है। ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और ATM  पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है।



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