ऐसे तो नहीं होगी किसानों की आय दोगुनी
| Posted by- Editor - May 17 2018 4:40PM

उप कृषि निदेशक की मेहनत पर लापरवाह कृषि अधिकारी फेर रहे हैं पानी

अम्बेडकरनगर। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तमाम योजनाएँ चला रही है और आए दिन गोष्ठियों व कार्यक्रमों के माध्यम से नई तकनीक, खाद-बीज, कीटनाशक दवाओं व उच्च तकनीकी कृषियन्त्रों के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूक कर रही हैं। ऐसे अधिकारी जिन्हें किसानों के प्रति लगाव है वह अपनी कर्मठता का परिचय देते हुए सरकारी योजनाओं का अक्षरशः अनुपालन करने व कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इनका प्रतिशत कम ही होगा। किसानों के हितों के दृष्टिगत स्थापित/संचालित विभागीय महकमें में कार्यरत सरकारी मुलाजिम मात्र खानापूर्ति कर अपनी हजारों/लाखों की पगार लेने मात्र तक ही अपनी ड्यूटी को अंजाम देते हैं।

उत्तर प्रदेश का अम्बेडकरनगर एक ऐसा जिला है जो कृषि प्रधान है और यहाँ का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहाँ का किसान कृषि उत्पाद उद्यमी कहलाता है। बावजूद इसके जब जिले के सुदूर ग्रामीणांचलों का किसान खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य उर्वरकों की चाहत लेकर कृषि महकमे की ब्लाक स्तरीय इकाईयों पर जाता है तो उसे इन जगहों पर तैनात कृषि अधिकारियो/कर्मचारियों की अनुपस्थिति से निराशा हाथ लगती है। किसान अपनी समस्या किससे कहे, दुःखड़ा किससे रोये यह भी सुनने वाला कोई नहीं।

हालांकि इस जिले में कृषि महकमें के मुखिया उप कृषि निदेशक विनोद कुमार अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनकी कर्मठता किसानों के हितों के प्रति तत्परता काबिले-तारीफ कही जा सकती है। परन्तु जिले के सुदूरांचल स्थित ग्रामीण किसानों को इस महकमें के अन्य जिला, तहसील व ब्लाक स्तरीय कृषि अधिकारियों की कार्यशैली और किसानों के प्रति उपेक्षात्मक व गैर जिम्मेदाराना रवैय्ये से कृषि महकमें के मुखिया उप कृषि निदेशक विनोद कुमार का प्रयास बेमानी साबित हो रहा है।

अम्बेडकरनगर जिले में जिला कृषि रक्षा अधिकारी पद वर्षो से रिक्त चल रहा है। इस महत्वपूर्ण पद का प्रभार जिला कृषि अधिकारी को दिया गया है। यही कारण है कि किसान कृषि रक्षा से सम्बन्धित कोई जानकारी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। उनका दोहरा शोषण हो रहा है। ऐसा इसलिए कि जिला कृषि अधिकारी/कृषि रक्षा अधिकारी के चहेते और संरक्षित कीटनाशक व उर्वरक विक्रेताओं द्वारा वे सभी कार्य किए जाते हैं जिसके लिए सरकार द्वारा कृषि रक्षा महकमें का गठन और उसके ओहदेदारों की नियुक्ति की गई है। ऐसे व्यवसाई जो विभाग के चहेते हैं वह लोग किसानों को अपने तरीके से कीटनाशक, उर्वरकों के बारे में बताकर और अच्छी-खसी रकम लेकर उसका विक्रय करते हैं। अपने लाभ के लिए ये व्यवसाई किसानों के साथ इस तरह पेश आते हैं जैसे कृषि रक्षा विज्ञानी। खैर! यह तो रही कीटनाशक, उर्वरक व अन्य कृषि रसायन विक्रेताओं की बात।

जिले के पूर्वांचल आलापुर तहसील अन्तर्गत कृषि रक्षा इकाई रामनगर (बहरामपुर) के कार्यालय व गोदाम से सम्बन्धित एक संवाद प्राप्त हुआ है जिसके सम्बन्ध में बात करने के लिए जिला स्तरीय कृषि अधिकारियों से सम्पर्क किया गया तो उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि वह फैजाबाद मण्डलीय मीटिंग में हैं। इतना कहकर उन्होंने फोन कट कर दिया। जब जिला कृषि अधिकारी डॉ. धर्मराज सिंह के सी.यू.जी. नम्बर पर फोन किया गया तो उनका सी.यू.जी. नम्बर अस्तित्व में न होने की जानकारी सम्बन्धित मोबाइल कम्पनी द्वारा दी गई। इसके बाद जब लैण्डलाइन बेसिक फोन पर कॉल की गई तो वह आउट ऑफ आर्डर मिला। यह जहमत क्यों उठाई गई उसके बावत आप भी जान लें.......

आलापुर अम्बेडकरनगर से एक पत्रकार रिपोर्टर ने खबर भेजी है जिसके सम्बन्ध में बात करने के लिए कृषि महकमें के जिला स्तरीय अधिकारियों से दूरभाषीय सम्पर्क किया गया। लेकिन नतीजा सिफर रहा। खबर कुछ इस प्रकार है-

ऐसे तो नहीं होगी किसानों की आय दोगुनी

राजकीय कृषि रक्षा इकाई रामनगर के कार्यालय पर लटक रहा ताला

आलापुर (अम्बेडकरनगर)। कृषि रक्षा इकाई रामनगर (बहरामपुर) के कार्यालय व गोदाम पर लटक रहा ताला किसान हो रहे परेशान। कृषि रक्षा इकाई पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों के दर्शन हुए दुर्लभ। मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं शासन के निर्देशों का नहीं है कृषि महकमे के अधिकारियों कर्मचारियों पर कोई असर अक्सर कार्यालय व गोदाम में ताला बंद कर गायब रहते हैं अधिकारी व कर्मचारी गुरुवार को 12:00 बजे तक भी नहीं खुल पाया राजकीय कृषि रक्षा इकाई रामनगर के कार्यालय का ताला।



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