देश की मुआवजे की राजनीति पर खांटी खड़गपुरिया की चंद लाइनें...
| -Tarkesh Kumar Ojha/ - May 21 2018 11:03AM

सरकार की इस अदा पर मरने को जी करता है
जीते जी नहीं थे काम के पर मरने पर लाखों का चेक कटता है
जिंदा थे तब नहीं थी फुर्सत तबियत पूछने की
ज्यों मरे तो लंबा जुलूस निकलता है
जहालत भरी जिंदगी के दरम्यांन शक्ल देखना भी नहीं था गवारा
मयखाने में मर गए तो राहत का हेवी डोज मिलता है ...

-तारकेश कुमार ओझा



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