अभी भी वक्त है कुदरती पानी को सहेजें
| -Rituparna Dave - May 28 2018 4:32PM

पानी को लेकर विश्व युध्द की बातें अब नई नहीं हैं। सुनने में जरूर अटपटी लगती हैं लेकिन हकीकत और हालातों का इशारा कुछ यही है। इस बावत् विश्व बैंक की उस रिपोर्ट को नजर अंदाज करना बेमानी होगा जो कहती है “जलवायु परिवर्तन और बेतहाशा पानी के दोहन की मौजूदा आदत से, बहुत जल्द देश भर के 60 फीसदी वर्तमान जल स्त्रोत, सूख जाएंगे। खेती तो दूर की कौड़ी रही, प्यास बुझाने को पानी होना, नसीब की बात होगी।” उधर ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ की रिपोर्ट भी डराती है जिसने पानी संकट को दस अहम खतरों में ऊपर रखा है। दसवीं ‘ग्लोबल रिस्क’ रिपोर्ट में यह खास है। पहली बार हुआ है जब जल संकट को बड़ा और संवेदनशील मुद्दा माना गया वरना दशक भर पहले तक वित्तीय चिंताएं, देशों की तरक्की, ग्लोबल बिजनेस, स्टॉक मार्केट का छिन-पल बदलाव, तेल बाजार का उतार-चढ़ाव अहम होते थे।

सन् 2050 के लिए अभी सोचना होगा जब पीने के पानी के लिए करीब पांच अरब लोग जूझ रहे होंगे। यूनेस्को की एक हालिया जल रिपोर्ट कहती है कि अकेले भारत में 40 फीसदी जल संसाधन कम हो जाएंगे।  समझ सकते हैं पानी की किस कदर किल्लत होगी। उत्तर भारत का हाल तो अभी बेहाल है जो आगे और कितना बदतर होगा? पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में भूजल बेहद कम है! जबकि दक्षिण और मध्य भारत में अगले 30-32 सालों में पानी की गुणवत्ता और भी ज्यादा खराब होगी। प्रदूषित पानी की समस्या सतही भण्डारों के अलावा भूजल में भी है क्योंकि इसमें धातु का दूषित पदार्थ घुल जाता है जिसकी वजह जमीन पर खराब पदार्थों की डंपिंग है। कहने को   धरती का तीन चौथाई हिस्सा पानी से जरूर घिरा है लेकिन साफ पानी और गिरता भूजल स्तर दुनिया की सबसे बड़ी चिन्ता का सबब बन चुका है। पानी की जरूरत और उसे साफ रखने के महत्व को इन हालातों के बावजूद भी नहीं समझेंगे तो कब चेतेंगे?

मप्र के उमरिया के सरसवाही की इसी  23 मई की घटना ने झकझोर कर रख दिया। मोहल्ले के कुंए सूख गए थे इसलिए एक कुंए में सुरंग बनाकर पास के नाले से जोड़कर पानी लाने की कोशिश के दौरान मिट्टी धसक गई और दो सगे व एक चचेरे भाई की मौत हो गई। वहीं अनूपपुर के चोंडी गांव में दो साल पहले 23 अप्रेल की घटना बेहद झकझोरने वाली है। 14 साल का खेमचंद प्यास बुझाने, रोज की तरह घर के सूखे कुएं  की तलहटी में, चुल्लू भर पानी की खातिर उतरा तभी अचानक ऊपर से मिट्टी भरभरा गई। वो प्यासा ही कुंए में, जिंदा दफन हो गया।  32 घण्टों की कवायद के बाद, शव निकल  पाया। महाराष्ट्र के औरंगाबाद की हालिया घटना भी चिन्ताजनक है जिसमें 17 साल के नौजवान और 65 साल के बुजुर्ग की मौत हो गई। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश बिहार, ओडिशा में जहां-तहां पानी की जबरदस्त किल्लत है।

गुजरात के सरदार सरोवर बांध को बीते मानसून में मप्र में कम हुई बारिश के चलते केवल 45 फीसदी पानी मिला। वहां उद्योगों को पानी देना मुश्किल हो रहा है। लंदन से आई एक रिपोर्ट जो पूर्व चेतावनी उपग्रह प्रणाली के अध्ययन पर आधारित है, वह काफी डराने वाली है जो बताती है भारत एक बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है। भारत, मोरक्को, इराक और स्पेन में सिकुड़ते जलाशयों से  नलों में पानी गायब हो सकता है! दुनिया के 500,000 बांधों के लिए पूर्व चेतावनी उपग्रह सिस्टम बनाने वाले डेवलपर्स के अनुसार यहां पानी संकट ‘डे जीरो’ तक पहुंच जाएगा जिसका मतलब नलों से पानी एकदम गायब हो सकता है! जान हथेली पर रखकर पानी जुटाना गरीबों की नीयति बन चुकी है! पैसे वाले तो अपना इंतजाम आसानी  से कर लेते हैं। लेकिन गरीबों की स्थिति के लिए उपरोक्त घटनाएं सबूत हैं। इससे अमीर-गरीब के बीच की खाई और दुश्मनी भी बढ़ रही है।

हर साल लगभग 7-8 महीने पानी की कमीं से कई राज्य जूझते हैं। जनसंख्या बढ़ने के साथ कल-कारखानों, उद्योगों और पशुपालन को मिले बढ़ावे के बीच जल संरक्षण की ओर ध्यान नहीं गया नतीजन भूजल स्तर गिरता गया। अब समस्या पानी ही नहीं बल्कि शुध्द पानी भी है। दुनिया में करीब पौने 2 अरब लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा। सोचिए पानी को हम किसी कल कारखाने में नहीं बना सकते। कुदरती पानी का ही जतन करना होगा। इसके खातिर चेतना ही होगा। चीन, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, इजरायल सहित कई देशों में ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ पर काफी काम हो रहा है। सिंगापुर में तो यही पानी का खास जरिया बन गया है। भारत में इस बावत् जागरुकता की जरूरत है। गांव, बस्ती, मुहल्ले, घर-घर और खेतों में भूजल स्तर बढ़ाने की वैज्ञानिक विधि से रू-ब-रू कराने की आसान कवायद शुरू हो।

भूजल स्तर बढ़ाने खातिर ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ को जरूरी किया जाए और घर-घर और खेत-खेत पानी बैंक बनाने की ईमानदार कोशिश हो। लोगों को कम से कम इतना तो  समझाया जाए कि और कुछ नहीं तो, एक-दो बारिश के बाद घर की छत अच्छे साफ कर उससे निकलने वाले पानी को चंद फुट पाइप के जरिए सीधे कुंए में भरकर उसे रिचार्ज करना बेहद आसान और मुफ्त में बहुत बड़ा फायदा है। जिस कड़ाई से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के लिए खुले में शौच प्रतिबंधित है उसी तर्ज पर वर्षा जल संग्रहण को जरूरी कर इसके बड़े और चौंकाने वाले नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। जरूरत सरकारी इच्छा शक्ति और ईमानदार प्रयासों की है। बरसात आने वाली है क्यों न इसी साल घर पर ही सहज, सुलभ आसान सा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने की मुहिम चले जिससे जल बैंक में बढ़ोत्तरी हो और केवल दो-तीन महीनों की कोशिशों से पूरे साल बेहिसाब साफ, शुध्द और प्राकृतिक पानी मिल सके।



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