अव्यवस्था की आग में झुलस रही चार धाम यात्रा
| -Dr. Brijesh Sati - May 30 2018 11:43AM

एसी कमरों से बाहर निकलो सरकार

-डा. बृजेश सती/ चार धाम यात्रा अव्यवस्था की आग में झुलस रही है। यात्रा से पूर्व एयर कंडीशन कमरों में की गई समीक्षा बैठकों की कवायद धरातल पर नजर नहीं आ रही है। धामों व मुख्य यात्रा पढावों में बुनियादी सुविधायें नदारद हैं। यहां यात्रा व्यवस्थायें हवाई हैं। ठीक उसी तर्ज पर, जैसे मुख्यमंत्री व उनके कैबिनेट सहयोगी इन धामों की हवाई यात्रा कर रहे हैं। सरकार चार धाम यात्रा को व्यवस्थिन नहीं कर पा रही है, और राग पांचवें धाम का अलाप रहे हैं। इन दिनों चार धाम यात्रा पूरे सवाब पर है। चार धाम में रिकार्ड श्रद्वालु दर्शनार्थ आ चुके हैं। यात्रियों के आने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन बदइंतजामी का आलम यह है कि चार धाम यात्रा की शुरूआत के पहले धाम यमनोत्री में हालात बेहद खराब हैं। जानकी  चटटी से यमनोत्री तक के पैदल मार्ग मे अराजकता का आलम है। स्थानीय प्रशासन की यात्रा को लेकर संजीदगी इस बात से समझी जा सकती है कि मंदिर के कपाट खुलने के एक माह बाद भी जिले का कोई आला अधिकारी धाम में यात्रा व्यवस्था का जायजा लेने का समय नहीं निकाल पाया।

गंगोत्री धाम में हालांकि कुछ हद तक स्थिति बेहतर है, लेकिन स्नान घाट व बुनियादी सुविधायें यहां भी नदारद हैं। घाटों में सुरक्षा के पुख्ता उपाय न होने के चलते कभी भी यहां कोई अप्रिय घटना हो सकती है। केदारनाथ यात्रा मार्ग में कुछ राहत है। केदारनाथ के लिये यात्रियों को हेली सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पैदल यात्रा मार्ग में गंदगी पसरी पडी है। बदरीनाथ यात्रा मार्ग में यात्रा का सबसे अधिक दवाब होने के चलते आये दिन जाम की स्थिति से दो चार होना पड रहा है। मुख्य पढाव जोशीमठ में पानी के लिये हाहाकार मचा है। बदरीनाथ धाम में भी यात्रियों को सरकारी तंत्र की विफलता का शिकार होना पड रहा है।  इस सबके बीच कुछ प्रयास सराहनीय हैं। इसमें रूद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा किये गये अभिनव प्रयोग की यात्रियों व स्थानीय लोगों द्वारा प्रशंसा की जा रही है। जिलाधिकारी मंगेश धिल्डियाल द्वारा सतत यात्रा का मूल्यांकन किये जाने से अन्य धामों की तुलना में यहां स्थितियां बेहतर हैं।
यमनोत्री धाम
यमनोत्री धाम में यात्रा व्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित है। जानकी चटटी से यमनोत्री तक के पांच किलो मीटर पैदल यात्रा मार्ग में यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं। पैदल यात्रा करने वाले तीर्थ यात्री किसी तरह जान जोखिम में डाल कर यात्रा कर रहे हैं। घोडे खच्चर व डंडी वाले पैदल यात्रियों को आवागमन के लिये जगह नहीं दे रहे हैं। घोडे व खच्चर में यात्रा कर रहे यात्रियों के साथ भी कई घटनायें हो चुकी हैं। प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक यात्री घोडे से गिर रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है। राजस्थान से चार धाम यात्रा पर आयी एक श्रद्वालु ने बताया कि घोडे वाले से कहा कि आराम से चलाओं तो उसने कहा कि गिर जाओगे तो भगवान के पास चले जाओगे। ऐसे ही एक महिला घोडे से गिरने के बाद यमनोत्री नहीं जा पायी। यमनोत्री में घोडा पडाव में केवल साढे तीन सौ घोडे खच्चर रखने की व्यवस्था है, लेकिन वहां 6700 घोडे खच्चर यात्रा मार्ग में चल रहे हैं। इतना ही नहीं शौचालय की जगह पर अतिक्रमणकर अस्तबल बना दिया गया है।
बडकोट से आगे यमनोत्री यात्रा मार्ग में यात्रियों से मनमाना दाम वसूला जा रहा है। कहीं भी रेट लिस्ट चस्पा नहीं है। 120 रू खाने की एक थाली के लिये जा रहे हैं। एक कमरे का रेट भी मनचाहा है। सफाई व्यवस्था का क्या कहने। व्यवस्था के नाम पर सफाई कर्मी खडे तो किये गये हैं, लेकिन सफाई कहीं दिखाई नहीं दे रही है। जगह जगह घोडे की लीद यात्रा मार्ग में पसरी पडी है। पलास्टिक व अन्य कचरा भी यात्रा मार्ग में गिरा पडा है। सफाई कर्मियों का कहना है कि घोडे खच्चर वालों के कारण सफाई नहीं हो पा रही है।
पेयजल को लेकर सरकारी दावे की हवा भी इस यात्रा मार्ग पर निकलती हुई दिखाई दे रही है। औपचारिताओं के लिये जगह जगह जल संस्थान ने बोर्ड लगाये हुये हैं लेकिन पेयजल स्टेंड पर पेयजल उपलब्ध नहीं है।  
गंगोत्री धाम
गंगोत्री धाम में यमनोत्री के मुकाबले व्यवस्थायें ठीक हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी यहां साफ झलक रही हैं। स्नान घाटों की स्थिति बेहद खराब है। घाट पर तीर्थ यात्रियों को स्नान व तर्पण करते हुये भारी असुविधा हो रही है। खासकर घाटों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। कभी भी यहां कोई अप्रिय घटना घट सकती है। घाटों की खराब स्थिति से तीर्थ पुरोहित भी खासे नाराज हैं। गंगोती मंदिर समिति के संयोजक कृपा राम सेमवाल व समिति के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है कि स्नान घाटों के निर्माण के लिये कई बार शासन प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन इस संदर्भ में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। गंगोत्री मदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है कि मंदिर के समीप बडी मात्रा में सिल्ट जमा हो रखी है। जिससे गंगोत्री धाम को खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से सिल्ट व पत्थरों को नदी से हटाने की मांग की है।
गंगोत्री में जाम लगने की खास वजह रोड के किनारे लगे दर्जनों फड  व्यापारी हैं। सडक के दोनों ओर ये रूद्रास व अन्य पूजा के सामान बेच रहे हैं। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में, ये सब कैसे ओर किसकी अनुमति से हो रहा है, समझना मुश्कििल नहीं है।
केदारनाथ
केदारनाथ यात्रा मार्ग भी अव्यवस्थाओं से अछूता नहीं है। यहां सबसे बडी समस्या हेलीकाप्टर सेवाओं को लेकर है। आन लाइन बुकिग करने के बाद भी यात्रियों को केदारनाथ के लिये सीट उपलब्ध हो पायेगी, कहना मुश्किल है। असल में केदारनाथ के लिये हवाई सेवायें देने वाली कुछ कंपनियों ने प्राईबेट टैवल ऐजेसिंयों को सीट बुकिंग का काम दिया हुआ है। इन ऐजेंसियों ने सीट एडवांस में बुक की हुई है। ये अपना फायदा देखकर सीट उपलब्ध करा रहे हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ यात्रा मार्ग में सफाई व्यवस्था नहीं है। हालांकि गत वर्षों की तुलना में इस बार घोडे व डंडी कंडी संविधा बेहतर है।
बदरीनाथ
यात्रा का दवाब सबसे ज्यादा बदरीनाथ धाम में ही देखने को मिल रहा है। इस यात्रा काल मे ंअब तक सबसे अधिक यात्री यही आये हैं। यहां पुरूषोतम मास होने के चलते दर्जनों भागवत कथा चल रही हैं। इसके लिये आयोजकों ने पहले से ही अधिकांश लाज व धर्मशाला बुक करा रखा है। इससे उन यात्रियों को असुविधा हो रही है, जिन्होंने यहा रहने के लिये एढवांस बुकिंग नहीं की है। हालांकि सरकार ने बिना पूर्व अनुमति भागवत कथा न करने का फरमान जारी किया था, लेकिन बावजूद इसके यहां कथायें चल रही हैं।  इसके अलावा पेयजल का भी संकट बना हुआ है। लडखडाई संचार व्यवस्था के कारण तीर्थ यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।  
जाम ही जाम
चार धाम यात्रा में यात्रियों की संख्या में लगातार बढोतरी हो रही है। लेकिन जाम सबसे बडी समस्या बनकर उभरी है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोमी व यमनोत्री के मुख्य यात्रा पढावों में सबसे ज्यादा जाम की समस्या बनी हुई है। जोशीमठ में वन वे सिस्टम होने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। पिछले कुछ दिनों से सेलंग से जोशीमठ के बीच घंटों जाम लगा रहता है। ऐसी ही स्थिति बडकोट से जंगलचटटी के बीच भी बनी हुई है।  इस मार्ग में कुछ स्थानों पर सडक संकरी होने के चलते जाम लग रहा है। इसके अलावा खरादी के कुछ दूरी पर पुल के समीप पुलिस द्वारा यात्री पंजीकरण कार्यालय खालेने के कारण जाम लग रहा है। यदि इस कार्यालय को दूसरी जगह सिफट किया जाय तो समस्या का हल निकल सकता है। गंगोत्री धाम के यात्रा मार्ग में जाम की स्थिति कमोवेश कम है। यहां सडक के किनारे फड लगने से अधिकांश जाम लग रहा है। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद आखिर कैसे सडक किनारे फड लगाया जा रहा है। केदारनाथ मार्ग में सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच स्थानीय निजी वाहनों के आवागमन स ेअब कम जाम लग रहा है।

रेट लिस्ट कहां है सरकार

तीर्थ यात्रियों की सकुशल व सुगम यात्रा का राज्य सरकार का दावा हवाई साबित हो रहा है। पूरे यात्रा मार्ग में यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है। होटल व लाज में मनमुताबिक किराया वसूलने के साथ ही खाने के दुगने दाम वसूले जा रहे हैं। बडकोट में जो एक थाने की थाली 100 रू की है, कुछ आगे चलकर दो वाटा मे ं120 की है। जंगल चटटी से यमत्रोत्री पैदल मार्ग में भी खाद्यय पदाथों के दुगने दाम वसूले जा रहे हैं। गंगोत्री धाम में अवश्य दाम नियंत्रित हैं। गंगोत्री में लाज व धर्मशाला के रेट अन्य धामों कीे अपेक्षा ठीक हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि अधिकांश स्थानों पर रेट लिस्ट नहीं है। ग्राहकों से मनमर्जी का दाम लिया जा रहा हैं। पूछे जाने पर दुकानदारों का कहना है कि हम खुद ही रेट तय करते हैं।
फूलों की घाटी की केशर
चार धामों के साथ ही मुख्य यात्रा पडावों में नकली खाद्यय पदाथों की ब्रिकी धडल्ले से की जा रही है। केशर, सिलाजीत व हींग को पैकेटों में स्थानीय उत्पाद बताकर यात्रियों को बेचा जा रहा है। फूलों की घाटी का केशर, यमनोत्री की पहाडियों से निकाला गया सिलीजीत और पहाडी हींग के नाम पर यात्री इन उत्पादों को खरीद कर ठगे जा रहे हैं। यह सब दिन के उजाले मे उत्तराखंड की मित्र पुलिस के आंखों के सामने हो रहा है। आखिर कैसे ये बाहरी राज्यों से आये हुये लोग तीर्थ यात्रियों को धोखा दे रहे हैं। क्यों प्रशासनिक अमला मूक दर्शक बना हुआ है। इस करोबार को खुला संरक्षण देने वाले वो चेहरे कौन हैं।
रेडियम के नाम पर हो रहा कारोबार
गंगोत्री राजमार्ग पर उत्तरकाशी व भटवाडी के बीच एक निजी संस्था द्वारा गाडियों में सुरक्षा को लेकर रेडियम स्टीकर बेचा जा रहा है। राजमार्ग में संस्था के कर्मचारी गंगोत्री धाम जाने वाले यात्रा वाहनों से प्रति वाहन 100 रूप्या वसूल रहे हैं। वाहनों को रोककर जवरन ये स्टीकर बेचे जा रहे हैं। पूछे जाने पर संस्था के कर्मियों का कहना है कि गाडियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर स्टीकर दिया जा रहा है। सवाल यह है कि इस स्टीकर से यात्रा वाहनों को किस प्रकार की सुरक्षा मिलेगी। क्यों प्रति वाहन ये सौ रूप्या वसूला जा रहा है। किसकी सह पर हो रहा है यह खेल।
इनकी भी सुनो
जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग
चार धामों एक केदारनाथ जनपद रूद्रप्रयाग में है। यात्रा की दृष्टि से यह यात्रियों के लिये चुनौतिपूर्ण है। आपदा के बाद इस मार्ग की दूरी 4 किलो मीटर बढ गई है। हेली कंपनियों की सीमित संख्या और यात्रा के बढते दवाब के चलते यत्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हेली कंपनियों की मनमानी भी यात्रियों को परेशान कर रही है। हेली कंपनियों को लेकर स्वंय जिलाधिकार मंगेश भी सख्त है। उन्होंने बताया कि दो कंपनियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मूल्य सूची न लगाने के कारण कुछ व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद भी कराया गया। सफाई व्यवस्था को लेकर डीएम का कहना है कि यात्रियों की बढती संख्या के कारण कुछ असुविधा हो सकती है, फिर भी उनके स्तर से लगातार मानिटरिंग की जा रही है।
जिलाधिकारी चमोली
बदरीनाथ धाम व मुख्य यात्रा मार्ग में अव्यवस्था के बारे में डीएम चमोली का कहना है कि सभी व्यवस्था चाक चौंबद है। आये दिन लग रहे जाम के बारे में उनका कहना है कि जोशीमठ में ये दिक्कत है, इसको वन वे कर दिया गया है। बदरीनाथ धाम में यात्रियों को आवासीय सुविधा न मिलने की बात पर वो कहते हैं कि वहां 10 से 12 हजार यात्रियों की ठहरने की ही क्षमता है, लेकिन यात्रा का दवाब बढने से कुछ दिक्कत है। धाम में चरमराई संचार व्यवस्था के बारे में कहना है कि इस संदर्भ में बीएसएनएल अधिकारियों से बात की  है। देर रात तक वाहनों की आवाजाही के सवाल पर  डीएम ने अनभिझता जताते हुये कहा कि इसको दिखवायेंगे।
डीएम उत्तरकाशी
यात्रा के लिहाज से यह जनपद महत्वपूर्ण है। यहां गंगोत्री व यमनोत्री दो धाम हैं। यात्रा का आगाज भी यहीं से होता है। यहीं सबसे ज्यादा छेद भी हैं। पटरी से उतर चुकी व्यवस्था पर डीएम उत्तरकशी का कहना है कि यमनोत्री धाम में कुछ समस्यायें हैं। जानकी चटटी से यमनोत्री पैदल पथ पर यात्रियों को हो रही असुविधा की बात स्वीकारते हुये उनका कहना है कि यह मार्ग केदारनाथ की तुलना में संकरा है। इससे पैदल यात्रियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि मार्ग चौडा नही किया गया तो अगले साल यात्रा रोक सकते हैं। गंगोत्री मार्ग में हेना में सडक सुरक्षा के नाम पर बेचे जा रहे स्टीकर पर उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच करेंगे। कहा कि केदारनाथ की तर्ज पर सर्विलांस सिस्टम सेट अप कर रहे हैं। इससे लगातार यात्रा की मोनटरिंग की जायेगी। 5 जून से यह सिस्टम काम करने लगेगा।



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