माँ एवं शिशु स्वास्थ्य की देखभाल में कारगर है होम्योपैथी : प्रो0 अवधराम
| Rainbow News - Jun 4 2018 4:31PM

लखनऊ। होम्योपैथी को जन-जन तक पहंुचाकर ही सभी को स्वास्थ्य की सुविधायें उपलब्ध करायी जा सकती है यह विचार महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो0 अवधराम ने होम्योपैथी साइंस कांग्रेस सोसाइटी की तत्वाधान में निपसिड सभागार में माँ एवं शिशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिये होम्योपैथी विषयक संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में जनआकांक्षाओं को पूरा करने की क्षमता है। संगोष्ठी के संयोजक डा0 अनुरूद्ध वर्मा ने कहा कि देश में माँ एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक नहीं है तथा उनकी बीमारी एवं मृत्युदर को कम करने में अपेक्षाकृत सफलता प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था, प्रसवोपरान्त एवं स्तनपान के दौरान होने वाले समस्याओं के समाधान में होम्योपैथी पूरी तरह कारगर है। अध्यक्षता करते हुए पूर्व निदेशक होम्योपैथी प्रो0 वी0एन0 सिंह ने कहा कि स्वस्थ शिशु एवं खुशहाल माँ से ही शसक्त राष्ट्र का निर्माण सम्भव है।
    वैज्ञानिक सत्र में होम्योपैथिक विश्वविद्यालय जयपुर के रजिस्ट्रार डा0 तरकेश्वर जैन ने बताया कि जब बच्चों का व्यवहार बदल जाये और वह ठीक से वार्तालाप न कर सके और वह अपने में ही खोया रहता है। माँ बाप को सावधान हो जाना चाहिए और तुरन्त ही किसी होम्योपैथिक चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए। जो बच्चे बहुत ज्यादा बेचैन एवं पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते है और अपनी तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहते है ऐसे में वह ए0डी0एच0डी0 बीमारी से ग्रसित हो सकते है। इन दिनों रोगों का होम्योपैथी में सटीक उपचार उपलब्ध है उन्होंने उपचारित रोगियों का सप्रमाण प्रस्तुत किया।
    पंजाब से डा0 सैय्यद तनवीर हसन ने बताया कि यदि गर्भवती महिला किसी प्रकार के तनाव में ग्रसित है तो इसका प्रभाव तनाव से होने वाले कार्टिसोल हार्मोन्स उसके गर्भ में पल रहे बच्चे से अनेक बीमारियां उत्पन्न कर सकता है जैसे समय से पूर्व जन्म गर्भपात, कम वजन का बच्चा एवं मन्दबुद्धि बच्चा आदि अनेक रोग हो सकते हैं। इसका होम्योपैथी में सटीक इलाज है उन्होेंने सलाह दी कि यदि स्वास्थ संतान चाहिए तो गर्भवती माँ को पूरे गर्भ के दौरान तनाव से मुक्त रहना चाहिए।

केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक डा0 दिव्या तनेजा ने कहा कि उन स्थितियों का जानना बहुत जरूरी है जहां पर अकेले होम्योपैथी काम करती है और कुछ स्थितियों में एलौपैथिक मैनेजमेंट के साथ। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में डाटा इक्ट्ठा करना आवश्यक है। होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान के सहायक निदेशक डा0 ए0के0 गुप्ता ने कहा कि होम्योपैथिक औषधियों द्वारा रोगोयं की रोकथाम की जा सकती है।
    किंग जार्ज चि0 विश्वविद्यालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो0 रेखा सचान ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल विश्व स्वास्थ संगठन के दिशा निर्देशों के अनुसार करनी चाहिए उन्होंने गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इलाहाबाद के प्रख्यात वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डा0 एस0एम0 सिंह ने बताया कि जटिल से जटिल प्रसव भी होम्योपैथिक दवाओं से आसान हो सकता है। उन्होंने अनेक रोगों के होम्यापैथिक उपचार की चर्चा की। बालरोग विशेषज्ञ डा0 टी0आर0 यादव एवं फातिमा हास्पिटल के डा0 मृत्युंजय पाण्डे ने बच्चों में होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सत्र में होम्योपैथिक चिकित्सक डा0 नरेश अरोड़ा ने कहा कि बच्चों की ज्यादातर बीमारियों का इलाज होम्योपैथी से सम्भव है।

      डा0 निशान्त श्रीवास्तव ने कहा कि डायपर को लगातार नहीं पहनायें रखना चाहिए, उन्होंने नवजात शिशुओं में होने वाले चर्मरोगों के होम्योपैथिक उपचार के सम्बन्ध में चर्चा की। लखनऊ के डा0 पंकज श्रीवास्तव होम्यो आर्थों हिलर ने बताया कि छोटे बच्चों में सूखा रोग (रिकेट्स) कुपोषण व धूप की किरणों के कम मिलने की वजह से होता है जिसका होम्योपैथिक दवाओं से बच्चों की पाचन क्रिया को दुरूस्त कर शरीर में सूरज की किरणों से बनने वाली बिटामिन डी के माध्यम से कृतिम उपचार (Physical Medicine) के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। संगोष्ठी को डा0 वी0वी0 सिंह नवाब, डा0 भक्त वत्सल, डा0 ए0एम0 सिंह, डा0 एस0डी0 सिंह आदि ने सम्बोधित किया एवं सचालन स्फूर्ति सिंह ने किया।

-डा0 अनुरूद्ध वर्मा, मो0-9415075558



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