महिलाएँ आज भी दोयम दर्जे पर क्यों....?
| Rainbow News - Jun 6 2018 4:34PM

-पुष्पा पाल/ आज भी महिलाओं का कोई अस्तित्व नही है। लोगों की सोच बदलने का नाम नही ले रही है। आज भी एक लड़की अगर अपने मायके में अपनी बातों को रखती हे या कहती है तो समाज और यहा तक उसके घर के लोग ये बोल ही देते है तुम्हार यहा क्या है ज्यादा बोलकर पुरूष बनाना चाहती हो?

और यही बेटी बहु बनकर बोलती है तब भी परूष इस बात को बोलता है लेकर आई हो, यही है महिलाओ के साथ रवैया और उनका इज्जत और सम्मान। यह समाज आज भी महिलाओ और बेटिया को दोयम दर्जा मानता है, पुरूष वादी सोच न बदली है ना बदलेगी।

ऐसी मानसिकता के लोग ही महिलाओं और बेटियों को आगे आने मे बाधक हैं और हालात को देखते हुए महिलाएँ आज भी अपने आपको भाग्य और भगवान को सौंप देती है। 21वीं सदी में भी महिलाओं की दशा-दुर्दशा देख-सुन कर मन खिन्न हो जाता है। क्या इस समाज के लोगों में व्याप्त पुरूष वादी सोच को बदला जा सकता है..........? या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा........?

पुष्पा पाल
सचिव
जन शिक्षण केन्द्र, कुटियवा,
बेवाना, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर उ.प्र.)



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