इमाम हजरत अली के बलिदान दिवस पर मजलिस व मातमी जुलूस
| -Ali Askari Naqvi - Jun 7 2018 3:47PM

अंबेडकरनगर। अंजुमन-ए-हैदरिया ताजपुर द्वारा इमाम हजरत अली के बलिदान दिवस पर जुलूस बयाद-ए-शहादत अमीरुल मोमनीन अलैहिस्सलाम का वार्षिक कार्यक्रम परंपरागत रूप से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना मुशीर अब्बास खान सुल्तानपुरी ने अजादारों को संबोधित करते हुए मौला-ए-कायनात के मार्ग का अनुसरण करने की अपील किया। उन्होंने कहा कि रसूले अकरम ने हजरत अली शान में एक हजार से अधिक हदीस फरमायी है। जिसमें कहा गया है कि अली का चेहरा देखना भी इबादत और अली का जिक्र भी इबादत। खत्मुल मर्तबत का इर्शाद-ए-गिरामी है, अली की मुझसे वही निस्बत है जो मूसा को हारून से थी।

अली तुम्हारे लिए बेहतरीन हाकिम हैं। सरवरे कायनात ने कहा मैं फर्जनदाने आदम का सरदार हूँ और अली अरब के सरवर हैं। यौमे खन्दक जरबते अली सकलैन की इबादत से अफजल है। ऐ अली मोमिन के सिवा कोई तुमसे मोहब्बत नहीं कर सकता और मुनाफिक के अलावा तुमसे कोई बुग्ज नहीं रख सकता। अली मुझसे हैं और मैं अली से हूं। जिसने अली को सताया उसने मुझे सताया। अली से दुश्मनी का मतलब मुझसे दुश्मनी।

कार्यक्रम में मौलाना सना अब्बास जैदी बाराबंकवी ने भी संबोधित किया। अंजुमन जाफरिया लोरपुर तथा अंजुमन हैदरिया ताजपुर ने नौहो मातम किया। रौजा इमाम हुसैन पर पहुंच कर जुलूस का समापन हुआ। अलइमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन ख्वाजा शफाअत हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



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