अल्लाह से डरो, तकवए इलाही अख्तियार करो और सच्चों के साथ हो जाओ
| -Ali Askari Naqvi - Jun 7 2018 3:50PM

अंबेडकरनगर। अल्लाह से डरो, तकवए इलाही अख्तियार करो और सच्चों के साथ हो जाओ। अल्लाह रब्बुल इज्जत यह मुतालबा पवित्र पुस्तक कुरआन में ईमान वालों से कर रहा है। तुम पर रोजे इसलिए फर्ज किए गए हैं ताकि तुम मुत्तकी बन जाओ।

मौलाना सैयद मासूम रजा कैफी मछलीगांव बताते हैं, माह-ए-रमजान में रोजे के जरिए 30 दिन इसलिए प्रैक्टिकल कराया जाता है ताकि उम्मती आंख, कान, जबान, हाथ-पैर एवं दिल-दिमाग के माध्यम से किसी प्रकार का गुनाह ना करें। जो रब से डरेगा वह भूल कर भी पाप के निकट नहीं जाएगा। दिल में खौफ-ए-खुदा होगा तो ईमान भी दुरुस्त होगा। इस तरह चोरी, बेईमानी, घटतौली, मिलावटखोरी, डुप्लीकेसी, गबन, धोखाधडी, अमानत में खयानत व मक्रो फरेब जैसे अति गंभीर पापों से दूरी बनी रहेगी।

यदि रोजे में भी उपरोक्त खामियां किसी रोजेदार में पाई जाती हैं तो समझ लेना चाहिए कि उसका नमाज-रोजा अल्लाह तआला को कुबूल नहीं है। मौलाना मासूम रजा ने जमाअत के साथ नमाज अदा करने पर बल दिया। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम के उस कथन का उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि- अगर जमाअत की नमाज छोड़ने वाले को यह मालुम हो जाए कि जमाअत में शामिल होने वाले को कितनी फजीलत मिलती है तो वह जरूर चलकर आए खाह; उसे घुटनों के बल आना पड़े।

मौला-ए-कायनात के सिलसिले में कहा कि जिनका जन्म खाना-ए-काबा में हुआ, उन्हें मस्जिद-ए-कूफा में जहर बुझी तलवार से शहीद कर दिया गया। हालांकि मौला को अपनी शहादत का इल्म था, फिर भी बारगाह--ए-इलाही में हाजिरी और सजदा-ए-माबूद में कोताही नहीं किया। यह उनके अनुयायियों के लिए एक अहम संदेश है। शायर-ए-अहलेबैत दबीर सीतापुरी ने क्या खूब कहा है- कातिल लिये तलवार पसे पुश्त खड़ा है, ये जान  के सजदे में चले जाओ तो जानें।



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