ईद की तैयारी तेज़ बाज़ार में बढ़ी रौनक
| Rainbow News - Jun 12 2018 3:21PM

अंबेडकरनगर। ईद के चंद दिन शेष रह जाने से खरीदारी पूरी तरह परवान चढ़ चुकी है और साथ ही बाजार भी गुलजार हो गए हैं। अगले चार-पांच दिनों में मुस्लिम समाज के सबसे बड़े त्योहार ईद-उल-फित्र को लेकर जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों तक के प्रमुख बाजार गुलजार हो गए हैं। मौसम खुशगवार हो जाने से बाजारों की रौनक में इजाफा हुआ है। खरीदारी को लेकर दुकानों में भीड़ उमड़ रही है। दिन से लेकर रात तक दुकानों की रौनक देखते बन रही है। कहीं सेवइयां खरीदी जा रही हैं तो कोई इत्र पसंद कर रहा है तो कपड़े खरीदने वाले भी पीछे नहीं है।

यूं तो बाजार में गहमागहमी कई दिन पहले से है लेकिन खुशियों के पर्व ईद के स्वागत की तैयारी में जुटे रोजेदारों ने रविवार को पूरा समय खरीदारी पर दिया। शुक्रवार अथवा शनिवार को ईद होना निश्चित है। यदि शनिवार को ईद हुई, जिसकी अधिक संभावना है तो शुक्रवार को अलविदा की नमाज को लेकर उस दिन खरीद-फरोख्त पर आंशिक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दिन भर बाजार में खरीदारी करते लोग दिख रहे हैं। टोपी, सेवईयां, इत्र, कपड़े की दुकान पर काफी भीड़ देखी गयी। किराने की दुकानों से लेकर चीनी, मेवे, मसाले के लिए ग्राहक उमड़ पड़े। मिट्टी, स्टील, फाइवर, कागज व प्लास्टिक के प्याले काफी महंगे बेचे गये। ईदगाहों व मस्जिदों की रंगाई-पुताई व सफाई का काम मुकम्मल हो चुका है।

इत्र की खुशबू से सराबोर होगी ईद:

ईद की बात बिना खुशबूदार इत्र के अधूरी है। बाजार में इत्र की कई किस्में हैं-मसलन शमामा, मोतिया, रूह खस, चंपा, मोगरा, रात की रानी, चमेली वगैरह। एक इत्र दुकानदार ने बताया कि बाजार में तीस रुपये से लेकर 100 रुपये तक की इत्र उपलब्ध है। लेकिन गिल, चंपा, मोगरा इत्र की जबरदस्त मांग है। लगे हाथ वह यह गिला कर ही देते हैं कि महंगाई ने इस कारोबार को भी नहीं बख्शा।

आर्टिफिशियल इत्र की डिमांड ज्यादा। अब मार्केट में आर्टिफिशियल इत्र भी आ चुका है और इसके खरीदारों की तादाद भी कम नहीं है। इसकी खुशबू पुराने इत्र के मुकाबले कहीं नहीं ठहरती है। छोटी-छोटी शीशियों में पहले इत्र भेंट करने का भी चलन था। माना जाता था इससे रिश्तों में और मिठास आती है। इत्र अल्लाह को भी नजर की जाती है। बाजार में इत्र की कई दुकानें हैं। बस स्टेशन के निकट इत्र विक्रेता अनुराग उपाध्याय बताते हैं ईद का पर्व करीब होने के साथ इत्र की बिक्री बढ़ी है। दूसरी और जिन घरों के सदस्य खाड़ी के देशों में रहते हैं उन्हें स्थानीय बाजार से इत्र, सेंट आदि क्रय करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। इस बार भी इत्र की कई वेराइटी मौजूद है, लेकिन देशी इत्र जन्नते फिरदौस, अतरफुल, मजमुआ आदि की डिमांड सबसे ज्यादा है। दुकानदारों की मानें तो अब लोकल इत्र की अपेक्षा ब्रांडेड इत्र की बिक्री जोर पकड़ने लगी है।

खूब लुभा रहे एक से बढ़कर एक परिधान:

ईद पर्व पर सबसे ज्यादा युवाओं को एक से बढ़कर एक वैरायटी में मौजूद कुर्ता पायजामा खूब आकर्षित कर रहा है। इधर उमस भरे मौसम में गर्मी से निजात पाने के लिए भी ज्यादातर लोग सूती पायजामा कुर्ता व टोपी की खरीदारी कर रहे है। वहीं सूट व साड़ियों एवं श्रृंगार की दुकानों पर महिलाओं व युवतियों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। रेडीमेड दुकानों में सर्वाधिक भीड़ हो रही है। आमतौर पर ईद के मौके पर कुर्ता-पायजामे का विशेष चलन है। ईद की नमाज कुर्ता पायजामा पहनकर ही अदा की जाती है। इस वजह से बाजार में कुर्ते-पायजामें की मांग बढ़ी है। वैसे तो परम्परागत कुर्ते-पायजामे की बिक्री सालों भर होती है,लेकिन ईद के मौके पर आधुनिक फैशन की दुनियां में शार्ट कपड़े के प्रचलन के कारण शार्ट व डिजाइनर कुर्ते का बोलबाला है।

रेडीमेड कपड़ों के प्रमुख विक्रेता इम्तियाज अहमद के मुताबिक पठानी कुर्ते की मांग काफी अच्छी देखी जा रही है। लेकिन लखनवी कुर्ता भी किसी से कम नहीं है। बच्चों को इस बार बैलून पायजामा व शार्ट कुर्ता खूब भा रहा है। शार्ट के साथ ही पठानी कुर्ता,वी-शेप का कुर्ता,लखनवी चिकेन वर्क,सफेद कुर्ता-पायजामा भी खरीददारों को खूब भा रहा है।महिलाओं के लिये अलग रेंज के कपड़े बाजार में उपलब्ध हैं। युवतियों में लखनवी सलवार सूट का क्रेज बढ़ा है। इन सबों के अलावा खादी भंडार में भी खादी के कुर्ता-पायजामे के रेंज भी उपलब्ध हैं। ईद के नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ी है तो बिक्री का ग्राफ बढ़ा है। हालांकि त्योहार के एक सप्ताह पहले दुकानों पर भीड़ परवान पर रहेगी। बाजार में 100 रुपये से लेकर 900 रुपये तक का कुर्ता व 100 रुपये से 300 रुपये तक का पायजामा उपलब्ध है।

दुकानदार डब्बू गुप्ता कहते हैं इस बार शार्ट के साथ पठानी कुर्ते की मांग ज्यादा है। बढ़ते फैशन व ईद के लिये जरूरी होने के कारण कुर्ता-पायजामे की बिक्री में इजाफा हुआ है। मार्केट में डिजायनर शार्ट कुर्ता-300-900 रुपये, साधारण कुर्ता 100-500 रुपये, शेरवानी कुर्ता-1500-5000 रुपये, लखनवी चिकेन-300-900 रुपये, पठानी सूट-500-1500 रूपये, बच्चों का सफेद में 100-300 रुपये, रंगीन में-150-500 रुपये, पायजामा-100-250 रुपये, चूड़ीदार पायजामा-150-350 रुपये मूल्य तक मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त ज्वेलरी, कपड़ों, चूड़ियों तथा खाद्य सामग्री की दुकानों पर भी लोगों का हुजूम देखा जा सकता है।



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