सड़क दुर्घटनाओं का सबब बने ई-रिक्शा, परिवहन व पुलिस महकमा बना अंजान
| Rainbow News - Jun 13 2018 4:11PM

अम्बेडकरनगर जिले में मानव चालित तिपहिया रिक्शे का प्रचलन खत्म हो चला है। इसका स्थान अब ई-रिक्शा ने ले लिया है। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रफ्तार से बगैर उपयुक्त ड्राइविंग लाइसेन्स चलने वाले ई-रिक्शा के चालकों द्वारा नित्य-नियमित अनेकों दुर्घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। फिर भी परिवहन विभाग व पुलिस महकमा अंजान सा बना हुआ है। जिसका परिणाम यह हो रहा है कि निरंकुश ई-रिक्शा चालकों द्वारा झगड़े-झंझट-फसाद को अंजाम दिया जा रहा है।

सड़कों व गलियों में फर्राटा भरने वाले इन ई-रिक्शा चालकों की बेहूदगी और अनापेक्षित कार्यशैली सबके लिए सिरदर्द बनी हुई है। अकबरपुर- शहजादपुर दोनों जुड़वा उपनगरों में सवारियाँ ढोने वाले ई-रिक्शा की संख्या हजारों में है। ई-रिक्शा का पंजीयन व चालक का लाइसेन्स परिवहन विभाग द्वारा निर्गत किया जाता है। बावजूद इसके ई-रिक्शा चालक यातायात नियमों को ताक पर रखकर बेतहाशा रफ्तार में चलते हैं। शहर में दुर्घटना और जाम की समस्या को बढ़ाने में ई-रिक्शा अपना प्रमुख योगदान दे रहा है।

एक जमाना था जब मानव चालित रिक्शा चलाकर गरीब तबके के लोग अपने परिवार की जीविका चलाते थे। वहीं अब डेढ़ से दो लाख रूपए खर्च कर पैसे वालों ने ई-रिक्शा खरीद व उसका संचालन करके हजारों रूपए प्रतिदिन आमदनी का स्रोत बना लिया है। ई-रिक्शा से सवारियाँ ढोने के साथ-साथ माल वाहन का भी कार्य किया जाने लगा है। यह तिपहिया वाहन बैटरी से संचालित होता है जो आवाज नहीं करता है। सड़क पर पैदल चलने वालों व छोटे दो पहिया वाहन के लिए ई-रिक्शा खतरा बने हुए हैं। इन पर नियंत्रण न लगाए जाने से सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हो गया है। शहर में ई-रिक्शा की भरमार से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चौपट होकर रह गई है। सड़कों पर सुबह से लेकर शाम और रात तक जाम की स्थिति बनी रहती है और इसका प्रमुख कारण है ई-रिक्शा की बहुतायत।

शाम होते ही जब नो-इन्ट्री की अवधि समाप्त हो जाती है तब बड़े वाहनों के संचालन में बाधा उत्पन्न करने वाले ई-रिक्शा व इसके चालक यातायात के नियमों की अनदेखी करते हुए सड़क पर अनियंत्रित ढंग से चलते हैं जिससे जाम की स्थिति घण्टों तक बनी रहती है। ई-रिक्शा का खौफ कुछ इस कदर बढ़ा है कि आबादी (रिहायशी कॉलोनियों) के लोग अपने बच्चों, महिलाओं व अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को गली सड़कों पर जाने से रोकने लगे हैं। यदि आवश्यक हुआ तो वे यह हिदायत देकर कि- जाओ लेकिन ई-रिक्शा से दूरी बनाकर पटरी पर चलना ही भेजते हैं।

दर्जनों ई-रिक्शा चालकों से जब उनके लाइसेन्स के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनके पास इस समय लाइसेन्स नहीं है उन्होंने उसको घर पर सन्दूक में बन्द कर सुरक्षित रखा है क्योंकि उसकी बनवाई में लगभग ढाई हजार रूपए का खर्च आता है। यह खर्चा परिवहन विभाग के नाम पर ई-रिक्शा चालक विक्रेता एजेन्सी मालिकों द्वारा उनसे लिया जाता है। कई युवक ई-रिक्शा चालकों ने यह कहा कि सरकार व विभाग द्वारा ई-रिक्शा चालन के लिए ड्राइविंग लाइसेन्स की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसकी जानकारी के लिए अम्बेडकरनगर के परिवहन महकमें के मुखिया ए.आर.टी.ओ. व एक बहुचर्चित लिपिक के नम्बरों पर कॉल किया गया तो उन लोगों ने फोन ही रिसीव नहीं किया।

यातायात के नियमों की अनदेखी करने वाले ई-रिक्शा चालकों पर कोई कानून शायद लागू नहीं होता। यदि ऐसा होता तो इन पर कार्रवाई जरूर होती। बगैर लाइसेन्स शराब के नशे में, कान में ईयर फोन लगाए बेहूदे ढंग से बातें करने वाले ये ई-रिक्शा चालक चालक की सीट पर इस तरह बैठे होते हैं जैसे कि वो किसी पार्क के जलाशय में नाव (पैडल बोट) पर बैठे पैडल मारकर पर्यटक की तरह बोटिंग का आनन्द लेते हुए सैर कर रहे हों। इन चालकों के बारे में जितना भी कहा या लिखा जाए वह सब नाकाफी ही साबित होगा। यहाँ यह भी बताना आवश्यक है कि अधिकांश चालक नवयुवक हैं। इनके पिता एवं संरक्षक पूर्व में मानव चालित रिक्शा चलाकर जीविकोपार्जन करते रहे हैं। चूंकि ये नवयुवक आधुनिक ई-रिक्शा का संचालन करते हैं इसलिए इनके ठाट-बाट और अदाएँ आधुनिक ही होतीं हैं। इनसे कोई भी भद्र, शरीफ महिला-पुरूष यदि शालीनता की अपेक्षा करता है तो यह बेमानी ही होगा।

बहरहाल कुछ भी हो यदि ऐसे ई-रिक्शा संचालन की निगरानी नहीं की गई और समय-समय पर इनके ड्राइविंग लाइसेन्स एवं अन्य जरूरी कागजातों के साथ-साथ चालकों की भौतिक स्थिति की चेकिंग नहीं की गई तो यह अत्यन्त शोचनीय होगा। साथ ही दुर्घटनाओं के सबब बने ई-रिक्शा चालकों का मनोबल भी बढ़ता ही रहेगा। ऐसी परिस्थिति में सड़क व गलियों में अनियंत्रित रफ्तार से फर्राटा भरने वाले ई-रिक्शा व उसके चालक दुःखद स्थिति उत्पन्न करते रहेंगे। इसके पूर्व भी सिरदर्द साबित हो रहे ई-रिक्शा व उसके चालकों के बारे में विस्तृत रूप से रेनबोन्यूज द्वारा संवाद प्रकाशन करके परिवहन विभाग व पुलिस महकमें का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। परन्तु इन दो महत्वपूर्ण व जिम्मेदार महकमों के अधिकारियों व मुलाजिमों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी जिससे हालात पूर्ववत है।



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