टी.एस.आई. सुधांशु वर्मा ने कायम रखा है खाकी का खौफ
| Rainbow News - Jun 18 2018 6:21PM

यातायात उपनिरीक्षक सुधांशु वर्मा

वर्दी की हनक जहाँ तक मुझे याद है पिछले 60 सालों से अब तक बनी हुई है। हमारे बचपन में एक थानेदार हुआ करते थे, जो आम लोगों के लिए खौफनाक हरकतें किया करते थे। उनकी इस हरकत से तंग एवं भयभीत लोगों ने उन्हें धोबिया दारोगा कहना शुरू कर दिया था। क्योंकि धोबिया दारोगा जब किसी की अपने बेतों से पिटाई करते थे तो कहा करते थे कि साले मैं जाति से धोबी हूँ। यदि तुमने मुझे थानेदार/दारोगा नहीं माना तो ऐसी धुनाई करूँगा जैसे मेरी जाति के लोग कपड़े की धुलाई करते हैं। धोबिया दारोगा का खौफ एवं उनके वर्दी की हनक लगभग एक दशक तक कायम रही। उसके उपरान्त हमारे शहर में एक थानेदार आए, जिनका नाम था अमरनाथ सिंह। सुबह जब ये वर्दी पहन कर तैयार होते थे तब नाश्ता करते समय चौकीदार से कहकर अपना बिस्तर बन्द होल्ड आल कसवा लेते थे।

किसी मुँह लगे ने पूछा था कि दारोगा जी ऐसा क्यों करते हैं तो उन्होंने कहा था कि पता नहीं कब मेरा परवाना आ जाए......। इसलिए अपना बोरिया बिस्तर पहले से ही बिस्तर बन्द में रखवा लेता हूँ। यह घटना लगभग 48 साल पहले की है। जब थानेदार अमरनाथ सिंह थाने से निकलते थे तो उनकी बुलेट मोटर साइकिल की आवाज सुनकर भले मानुषों के होश उड़ जाते थे। सड़क पर चलने वाले राहगीर और अन्य लोग किनारे पटरियों पर चले जाते थे। हमारे शहर का थाना जब कोतवाली की श्रेणी में आया तो इंस्पेक्टर इंचार्ज/कोतवाल के रूप में टी.पी. बनौधा ने प्रथम चार्ज लिया। उनकी हनक भी पूर्ववर्ती थानेदारों की तरह रही। अच्छे-अच्छों की हजामत करने वाले बनौधा को आज भी उनकी कार्यशैली के चलते याद किया जाता है। यह बात लगभग 33 वर्ष पूर्व की है।

बनौधा जी के बाद कुछेक दारोगा और कोतवाल ही रहे जो अपनी कार्यशैली से चर्चा-ए-आम रहे हों। बनौधा कोतवाल के काफी समय उपरान्त उदयभान सिंह, एस.एन. गुप्ता, मनोज कुमार पंत आदि कोतवाल ही चर्चा में रहे। बीते वर्ष मनोज कुमार पन्त अकबरपुर कोतवाली के प्रभारी थे। उनकी हड़कम्पी कार्यशैली से आम लोग भयाक्रान्त रहते थे। मूछों और चश्में व उनकी स्टाइल की वजह से लोग उन्हें सिंघम कहते थे। अक्सर मनोज कुमार पन्त कोतवाली से निकल कर जब शहर की तरफ आते थे तब सड़क पर से रिक्शा, राहगीर, ठेला वाले व गरीब तबके के दुकानदार जान की खैर मनाते हुए सड़क की पटरी छोड़ दिया करते थे।

ठीक उसी अन्दाज में इस समय एक वर्दी दारोगा ने अपना हनक कायम कर रखा है। जिसके जिम्मे है यातायात नियंत्रण। वह यातायात उपनिरीक्षक के पद पर तैनात है। नाम है सुधांशु वर्मा। एक युवा, तेज-तर्रार ऊपर से खाकी वर्दी धारी- जैसे सोने पे सुहागा। है तो दारोगा आज यातायात में है, कल नागरिक पुलिस में तबादले पर जाएगा और फिर वर्दी की हनक कायम कर अपना जलवा बिखेरेगा। जिसका रिहर्सल वह अकबरपुर/शहजादपुर के भीड़-भाड़ वाले इलाके में पटरी दुकानदारों, ई-रिक्शा चालकों, ठेला वालों पर अपना रौब गालिब कर उन्हें अपशब्दों से अलंकृत करता हुआ ठीक उसी अन्दाज में उनकी दैहिक समीक्षा करता है जैसे फिरंगियों के जमाने में पुलिस हिन्दुस्तानियों पर किया करती थी।

बर्बर ढंग से पिटाई करने वाले इस यातायात दारोगा को देखकर असहायों/गरीब पटरी दुकान दारों, ठेला, रिक्शा वालों की रूहें फना हो जाया करती हैं। किसी ने बताया कि सुधांशु वर्मा यातायात नियंत्रण में कम रूचि लेकर चेकिंग के नाम पर अवैध धन वसूली पर ज्यादा ध्यान देते हैं। अकबरपुर/शहजादपुर उपनगरों में यातायात व्यवस्था को सुचारू ढंग से करने के लिए जो पुलिस बल लगाया गया है उसके कमाण्डर के रूप में सुधांशु वर्मा टी.एस.आई. नियुक्त हैं जो प्रातः 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक दोनों उपनगरों में अपने तरीके से पुलिसिया हनक कायम कर सड़क पर गमनागमन करने वाले वाहनों के चालकों से चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। डिटेल में और भी बहुत कुछ आने वाले दिनों में...................।

(ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर, जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा पाया वैसा लिखा)



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